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अभियान:5 हजार स्वयंसेवक मिट्‌टी के गणेश बनाकर हर साल कर रहे प्राण प्रतिष्ठा

खरगोन21 दिन पहले
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समन्वयक जोशी ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे हैं। - Dainik Bhaskar
समन्वयक जोशी ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे हैं।
  • नर्मदा घाटी में नदी की पवित्रता के साथ जल की शुद्धता बना अभियान, नर्मदा समग्र का दावा 10 साल में 80% घटाया पीओपी प्रतिमा विर्सजन

नर्मदा में जल प्रदूषण रोकने पिछले 2011 से मिट्‌टी की गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण देकर तैयार उसी प्रतिमा की स्थापना कर उत्सव मनाने का अभियान चल रहा है। नर्मदा घाटों पर प्रतिमा निर्माण के साथ जल जागरूकता पाठशाला लगती है। ताकि नर्मदा को प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं सेे हो रहे प्रदूषण को रोका जा सके। नर्मदा घाटी में धीरे-धीरे 5 हजार से ज्यादा प्रतिनिधि नर्मदा समग्र की मुहिम से जुड़कर मुहिम नर्मदा जल की शुद्धता में जुटे हुए हैं। 10 सितंबर से गणेश उत्सव शुरू होगा।

कोरोना काल में नर्मदा क्षेत्र में ओंकारेश्वर, मंडलेश्वर, जलकोटी (महेश्वर), छोटा बड़दा व बड़ा बड़दा सहित 10 केंद्रों पर ऑनलाइन मिट्‌टी प्रतिमा निर्माण की पाठशाला चल रहा है। इसबार यह लक्ष्य रखा है कि हर घर व सार्वजनिक स्थल पर मिट्‌टी की गणेश प्रतिमा की ही स्थापना हो। नर्मदा समग्र राज्य समन्वयक मनोज जोशी का मानना है कि एक दशक में समाज प्रतिनिधि व लोगाें की मदद से लगातार जागरूकता आ रही है। नर्मदा में 80 फीसदी प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा पाए हैं। अब त्योहारों से पर्यावरण की शुद्धता का संदेश देने के लिए हर घर में मिट्‌टी प्रतिमा स्थापना के लक्ष्य पर काम हो रहा है।

प्रतिमा में बीज मिलाए, गमले में खिलेंगे फूल
इसबार मिट्‌टी में ही गेंदा, परिजात सहित कई फूलों के बीज भी डाले जा रहे हैं ताकि गमले में विसर्जन के बाद फूल का पौधा तैयार किया जा सके। जल प्रदूषण के प्रति जागरूकता व विसर्जन के दौरान किनारे पर कृत्रिम जलकुंडों में पीओपी प्रतिमा विसर्जन कराने का प्रशिक्षण दिया गया। शनिवार को नर्मदा समग्र के नर्मदा एंबुलेंस समन्वयक राजेश जाधम ने देशभर के 52 लोगों को मिट्‌टी प्रतिमा निर्माण सिखाया।

नियम : प्रतिमा पंडाल का आकार तय
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी बीएस सोलंकी ने त्यौहारों पर पीओपी प्रतिमा निर्माण, विक्रय व स्थापना को प्रतिबंधित किया है। पंडाल का आकार 30 बाय 45 फीट तय किया है। 10 लोग विसर्जन स्थल जा सकेंगे। चल समारोह पर रोक रहेगी।

ऐसे मिली सफलता..

  • एनजीटी ने जलस्रोतों में केमिकल रंगों से प्रदूषण रोकने गाइडलाइन जारी की।
  • जिले में नर्मदा क्षेत्र में हरसाल 50 हजार छोटी-बड़ी पीओपी प्रतिमाओं का विसर्जन होता है।
  • विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों व समाज प्रतिनिधियों को प्रतिमा निर्माण सिखाया।
  • स्थानीय प्रशासन की मदद से कृत्रिम जल कुंडों की स्थापना करवाई।
  • एसडीएम-तहसीलदार से पीओपी निर्माण व विक्रय पर रोक लगवाई।

10 साल से अभियान में समाज, संस्था व शासन-प्रशासन स्तर पर सहभागिता हो रही है। 80% पीओपी प्रतिमाओं को विसर्जन से रोका। प्रदूषण मुक्त का संदेश दे रहे हैं। - मनोज जोशी, स्टेट कॉऑर्डिनेटर नर्मदा समग्र भोपाल

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