पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

आजीविका के मिशन पर नारीशक्ति:8771 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, प्रदेश में खंडवा के बाद जिला दूसरे नंबर पर

खरगोन17 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • 8 करोड़ का लोन लेकर स्व सहायता समूह की महिलाओं ने जिंदगी बदली व परिवार की कर रहीं आर्थिक मदद

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में जिले की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यहां के 871 स्व सहायता समूह की 8 हजार 771 महिलाएं लोन लेकर घर परिवार के आर्थिक विकास में सहभागिता कर रही हैं। मिशन में जिले में 8.88 करोड़ से ज्यादा लोन लेकर खुद तो आत्मनिर्भर बनी हैं दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। आत्मनिर्भरता के मामले में खरगोन जिले की महिलाएं प्रदेश में खंडवा के बाद दूसरे स्थान पर हैं।

ज्यादातर कम पढ़ी लिखी भी महिलाएं भी हैं, जो पति की आय पर निर्भर नहीं। वे अपने बल-बूते पर बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं। कोरोना काल में जिला प्रबंधक रीना गुप्ता, ब्लॉक प्रबंधक धर्मेंद्र दुबे, ब्लाॅक प्रबंधक इंदर डावर प्रेरित कर रहे हैं। जिला परियोजना अधिकारी सीमा निगवाल ने बताया कि योजना में जिले को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है। 10-12 महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें लोन दिलाकर आर्थिक मजबूती दी। अब वे खुद कामकाज संभालने लगी हैं।

आत्मनिर्भरता की कहानी... 15-20 हजार रुपए कमाकर परिवार के साथ बदली खुद की जिंदगी-

बकावां : कियोस्क सेंटर शुरू कर दे रहीं सेवा
बड़वाह की बकावां की योगिता केवट शिवलिंग स्व सहायता समूह के माध्यम से कियोस्क सेंटर चलाती हैं। हर माह 15 से 20 हजार रुपए कमा रही हैं। दो साल पहले समूह के नाम से 60 हजार रुपए लोन लिया था। कियोस्क सेंटर में महिलाओं को भी काम मिला है। वह आयुष्मान कार्ड, पैनकार्ड, मोबाइल रिचार्ज, एमपी ऑनलाइन आदि काम करती हैं।

लोनारा : खाद तैयार कर शुरू की जैविक खेती
लोनारा में श्रीकृष्ण आजीविका समूह की निशा जवरा 30 हजार रुपए लोन लेकर वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर रही हैं। दो एकड़ में जैविक खेती में टेंसी, गिलकी, भिंडी लगाई है। ढाई माह में 1300 रुपए की लागत 20-25 हजार रुपए आय हुई। अब करेला, गिलकी, मिर्च, फूलगोभी, बटला, टमाटर लगाया है।

बलखड़ : दूध डेयरी से 20 हजार माह की आय
बलखड़ बुजुर्ग (भगवानपुरा) में मां सरस्वती समूह की सुधा माणक ने एक साल पहले सामुदायिक निवेश निधि (सीएलएफ) से 50 हजार रुपए का लोन लेकर दो भैंस खरीदी। फिर दूध डेयरी खोली। किसानों से दूध खरीदकर घी, मावा बनाकर बेचती हैं। हर माह 20 हजार रुपए आय होती है। चारा लाने में महिलाओं को जोड़ने से उन्हें रोजगार मिला।

खबरें और भी हैं...