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ओंकारेश्वर परियोजना:ठेकेदार ने मरम्मत से किया इनकार, रिसाव रोकने कर्मचारियों ने नहर में बिछाई बरसाती

खरगोनएक महीने पहले
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  • अभी भी पानी कसरावद से 5 किमी दूर है, कार्यपालन यंत्री बोले- मार्च में मरम्मत करवाएंगे

ओंकारेश्वर परियोजना की नहर का पानी एनवीडीए के कई प्रयासों के बाद भी नगर तक नहीं पहुंच सका। जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से नहर का पानी रिस रहा है। नहर के पानी के भरोसे रबी फसलों की सिंचाई करने वाले किसान परेशान हो रहे हैं। एक माह पहले मरम्मत के निर्देश भी दिए गए, लेकिन ठेकेदार ने इनकार कर दिया। अब किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए कर्मचारियों ने नया रास्ता निकाला है। खुद राशि एकत्रित कर करीब 1000 मीटर दूरी तक नहर में प्लास्टिक बिछाई है। वर्तमान समय में कठोरा उद्वहन क्रमांक 64 की पानी की टंकी के पास तक पानी पहुंचा है। नहर क्षतिग्रस्त होने से 15 किसानों के खेतों में रिसाव का पानी पहुंच रहा है। पानी भरने से फसल प्रभावित हो रही है। साथ ही पानी आगे भी नहीं बढ़ पा रहा है। एनवीडीए के अफसरों का मानना है कि वर्तमान स्थिति में नहर की मरम्मत करवा पाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में लिकेज वाली जगह पर बरसाती बिछाकर ही पानी का रिसाव रोकने के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। मिर्जापुर व सामेड़ा के बीच जगह-जगह नहर क्षतिग्रस्त है। किसान कई बार समस्या भी बता चुके है। सामेड़ा के किसान महेंद्रसिंह पटेल व गौतम राठौड़ ने कहा 12 से ज्यादा किसानों के खेत तालाब बन गए है। कुछ किसानों ने तो रिसाव से परेशान होकर फसल लगाना ही बंद कर दिया है। क्योंकि फसल लगाते भी है तो खेतों में पानी भरा रहने से उत्पादन नहीं होता है। बुवाई करना व्यर्थ जाता है। समस्या का समाधान नहीं होने से किसानों ने इस मामले को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी कर ली थी। नगर क्षेत्र के किसानों ने कहा अब तक नहर का पानी कसरावद से 2 किलोमीटर दूर कसारड़ नाले तक भी नहीं पहुंचा है। पिछले दिनों निरीक्षण के दौरान एनवीडीए के अफसरों को यहां पुलिया पार करने में भी दिक्कतें उठाना पड़ी थी। यहां भी रिसाव होता है। सांसद गजेंद्रसिंह पटेल और पूर्व मंत्री व विधायक सचिन यादव को भी शिकायतें कर चुके हैं। किसानों ने कहा रबी सीजन में फसल नहीं ले पाएंगे तो नहर का क्या औचित्य रह जाएगा।

करोड़ों खर्च कर पानी नहीं मिला, अब बरसाती के भरोसे से आश्वासन
किसानों ने कहा करोड़ों रुपए खर्च कर नहर बनाई गई। लेकिन कमांड एरिया के किसानों को अब तक पानी नहीं मिला है। अब अधिकारी बरसाती के सहारे से पानी पहुंचाने का विश्वास दिला रहे है। जबकि नहर की पूरी मरम्मत के बाद ही प्रेशर से पानी छोड़ना चाहिए। मरम्मत के अभाव में हमेशा ही गेहूं-चना फसल को नुकसानी का डर रहेगा। नहर के कमांड एरिया में शामिल भीलगांव क्षेत्र में तो कंटीली झाड़ियों की सफाई तक नहीं करवाई गई है। सफाई के अभाव में पानी आगे बढ़ना मुश्किल है।
ठेकेदार से वसूलेंगे राशि
^ नहर में पानी पहुंचाने के लिए वैकल्पिक रूप से 425 फीट बरसाती लगाई है। मार्च के बाद नहर की मरम्मत करवाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। नहर निर्माता ठेकेदार यदि समयावधि में मरम्मत नहीं करता है तो उससे राशि वसूली जाएगी। इसके बाद विभाग ही अपने स्तर पर मरम्मत करवाएगा।
- जितेंद्रसिंह राणावत, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग

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