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24 बेड पर 62 बच्चे भर्ती:हर तीसरे बच्चे के फेफड़ों में संक्रमण, सांस में तकलीफ इसलिए आईसीयू जरूरी

खरगोन15 दिन पहले
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  • ज्यादातर बच्चों की गंभीर हालत, ठेकेदार के काम छोड़ने से नए आईसीयू का 15 दिन से काम बंद, रिटेंडरिंग के बाद होगा काम

जिला अस्पताल के 24 बेड के शिशु वार्ड में रोजाना 10 से ज्यादा बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। इन बच्चों को निमोनिया, डेंगू के लक्षण के साथ सांस की तकलीफ हो रही है। हर तीसरे बच्चे के फेफड़ों में संक्रमण के कारण आईसीयू की जरूरत है, लेकिन अस्पताल में आईसीयू ही नहीं है। रविवार को 24 बिस्तर शिशु वार्ड में 62 बच्चे भर्ती है। अधिकांश को निमोनिया है। कुछ बच्चों में डेंगू के लक्षण है। दोनों गंभीर व जानलेवा बीमारी है।

फेफड़ों में संक्रमण के कारण मौत हो सकती है। कोरोना महामारी व निमोनिया जैसी बीमारी में फेफड़ों पर संक्रमण होता है। इसके चलते व्यक्ति को सांस फूलती है। खांसी आती है। इलाज नहीं मिलने से संक्रमण फेफड़े तक ऑक्सीजन ही नहीं पहुंचने देता है। इससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तैयार किए जा रहे आईसीयू का काम 15 दिन से बंद है। ठेकेदार ने काम छोड़ दिया है। रिटेंडरिंग के बाद ही काम हो पाएगा। सिविल सर्जन ने कमिश्नर से निर्माण की समस्या बताई है।

मासूमों में बढ़ रही निमोनिया की तकलीफ

  • शिशु वार्ड में सांस की तकलीफ पर हेलापड़ावा की जुड़वा बहनें दीपाली व रूपाली (2) भर्ती है। आईसीयू नहीं होने से नर्स दोनों को नेबुलाईजेशन कर रही है। दोनों को सर्दी व खांसी है। सांस फूल रही है। पिता जामसिंह बताते हैं चार दिन से दोनों बालिकाओं की तबीयत गंभीर है।
  • झिरन्या के डेढ़ माह के राजवीर को निमोनिया है। उसे ऑक्सीजन बॉटल लगाई है। मां कमलाबाई ने बताया निमोनिया बताया है। खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ है।
  • झिरन्या के ही प्रवीण पिता प्रकाश (2) को भी निमोनिया है। परिजनों ने बताया कि यहां दो दिन से भर्ती किया है।

20 में से 10 बेड के आईसीयू का काम बंद

कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए आईसीयू व एचडीयू जरूरी है। अस्पताल में 20 बेड का काम शुरू हुआ था। 10 बेड के आईसीयू का काम बंद है। ठेकेदार ने काम छोड़ दिया है। सिविल सर्जन डॉ. दिव्येश वर्मा ने कमिश्नर की जानकारी दी है। उन्होंने दूसरे ठेकेदार से काम करवाने को कहा।

आईसीयू तैयार करने में लग सकते हैं 2 माह

आईसीयू का दोबारा टेंडर व काम होने में करीब 15 दिन से ज्यादा का समय लगेगा। काम शुरू हुआ तो निर्माण में करीब दो माह लगेंगे। क्योंकि अब तक वार्ड का पुराना सामान नहीं निकाला है। पुराने दरवाजे निकाले हैं। मशीन इंस्टाॅल में 15 दिन का समय लगेगा। कुल आईसीयू तैयार करने में 2 माह से ज्यादा समय लग सकता है।

स्टाफ से लेकर कम हैं वार्ड में संसाधन

शिशु वार्ड में पलंग की कमी है। पीडियाट्रिक बॉयपेप मशीन नहीं, मल्टीपेरा मॉनीटर, वोलुेट्रिक सीरिंज पंप, हाई फ्लो नोसल कैनुला जैसी जरूरी सुविधाएं भी नहीं है। इसके अलावा डॉक्टर व नर्स भी पर्याप्त संख्या में नहीं है। नर्सिंग कोर्स के विद्यार्थियों से काम ले रहे हैं।

बच्चों में निमोनिया और डेंगू की बीमारी है। आईसीयू के संबंध में कमिश्नर को जानकारी भेजी गई है। भोपाल से रिटेंडरिंग की प्रक्रिया चल रही है। - डॉ दिव्येश वर्मा, सिविल सर्जन

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