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आक्रोश:करंट से घायल किसान की समय पर इलाज नहीं मिलने से हुई मौत, डॉक्टर को जल्द हटाने की मांग

खरगोन2 महीने पहले
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  • बमनाला अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की, डॉक्टर बोलींं- मेरी ड्यूटी भीकनगांव में थी

सिंचाई के लिए खेत में पहुंचे बमनाला के किसान को करंट लग गया। परिजन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पदस्थ डॉक्टर नहीं मिली। ताबड़तोड़ भीकनगांव अस्पताल लेकर रवाना हुए लेकिन रास्ते में ही घायल किसान ने दम तोड़ दिया। मृतक के परिजनों व ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए डॉक्टर को हटाने की मांग की। डॉक्टर को बुलाने व चर्चा के बाद ही शव का पोस्टमार्टम करवाने पर अड़ गए। एसडीओपी व तहसीलदार की समझाइश के बाद ग्रामीण माने। इस मामले में डॉक्टर का कहना है भीकनगांव में ड्यूटी होने से बमनाला में उपस्थिति नहीं रही। परिजनों के अनुसार शैलेंद्रसिंह पिता बलीराम तंवर (23) मंगलवार सुबह 5 बजे खेत में सिंचाई करने गया था। इसके बाद उन्हें पता चला कि सिंचाई के लिए बिजली का सप्लाय सुबह 11 बजे से होगा। वे लौट आए। 11 बजे खेत पर पहुंचे। मोटर का स्विच चालू करने के दौरान तार खुले होने से जांघ पर करंट लग गया। उन्हें घायलावस्था में बमनाला अस्पताल लाया गया। यहां पदस्थ डॉ. ज्योति ठाकुर अस्पताल में नहीं मिली। परिजन ताबड़तोड़ शैलेंद्र को भीकनगांव अस्पताल लेकर रवाना हुए। स्थिति गंभीर होने से रास्ते में ही मौत हो गई।

डॉक्टर पर लगाए लापरवाही के आरोप
बमनाला अस्पताल में डॉक्टर के नहीं मिलने व शैलेंद्र की मौत से परिजन आक्रोशित हो गए। मृतक के काका उपसरपंच राजेंद्रसिंह तंवर, छतरसिंह तंवर, अजय तंवर सहित 25 ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए है। साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की। परिजनों व ग्रामीणों ने डॉ. ठाकुर को बुलवाने व चर्चा के बाद ही पोस्टमार्टम करवाने की बात कही। सूचना मिलते ही एसडीओपी प्रदीप ऊइके, तहसीलदार देवकुंवर सोलंकी सहित पुलिस बल अस्पताल पहुंचा। समझाइश के बाद परिजन व ग्रामीण पोस्टमार्टम करवाने के लिए तैयार हुए।
मरीजों के प्रति बर्ताव भी अच्छा नहीं
ग्रामीणों ने कहा बमनाला में अस्पताल केवल नाम का ही है। वहां कोई चिकित्सक नहीं रख सकते तो ताला लगा देना चाहिए। मरीज व उनके परिजनों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। आरोप लगाया कि डॉ. ठाकुर का मरीजों से बर्ताव भी ठीक नहीं है। ओपीडी भी कभी चलाते, तो कभी बंद रहती है। अस्पताल के ठीक पीछे घर होने के बाद भी शाम 5 बजे बाद किसी मरीज को नहीं देखा जाता है। पहले भी ऐसी लापरवाही से एक मरीज की मौत हो चुकी है। उस समय भी अस्पताल परिसर के सामने रास्ता रोकने जैसे हालात बने थे। लेकिन कार्यशैली में सुधार नहीं हो रहा है।

पूरे विकासखंड में हैं सिर्फ 5 डॉक्टर
तहसील मुख्यालय के अस्पताल सहित पूरे विकासखंड में केवल 5 डॉक्टर पदस्थ है। यह क्षेत्रफल व जनसंख्या के हिसाब से नाकाफी है। भीकनगांव के अस्पताल में रोजाना 250 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते यहां बारी-बारी से सप्ताह में एक दिन डॉक्टरों को बुलाया जाता है। इससे संबंधित अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे ही रहती है। कई बार डॉक्टरों की पदपूर्ति की मांग की गई, लेकिन जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने कोई पहल नहीं की। प्रभारी बीएमओ व तहसीलदार ने कहा डॉक्टरों की कमी से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं।
भीकनगांव अस्पताल में ड्यूटी थी
^हर मंगलवार मेरी ड्यूटी भीकनगांव अस्पताल में रहती है। इसलिए बमनाला स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित नहीं रही। इसमें मेरी कोई लापरवाही नहीं है।
- डॉ. ज्योति ठाकुर, बमनाला
सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है
^तहसील मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। वे लोगों के इलाज के साथ ही बीएमओ का काम भी देख रहे हैं। सीएमएचओ कार्यालय से ब्लॉक में पदस्थ डॉक्टरों को यहां एक दिन सेवा देने के निर्देश दिए हैं।
- डॉ. मनोज निराले, प्रभारी बीएमओ भीकनगांव

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