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  • Health Department Does Not Accept Positive Test Report Elsewhere, 2 Patients Referred To Indore, Report Is Not Valid, Yet Private Hospitals Are Investigating, Now Total 16 Patients Are Dengue Positive

डेंगू का दंश:अन्य जगह की पॉजिटिव जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता, 2 मरीज इंदौर रैफर, रिपोर्ट मान्य नहीं फिर भी जांच कर रहे निजी अस्पताल, अब कुल 16 मरीज डेंगू पॉजिटिव

खरगोन22 दिन पहले
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जिले में वायरल बुखार के साथ डेंगू तेजी से फैल रहा है। दो दिन में 7 मरीज सामने आए हैं। अब तक जिले में कुल 16 मरीज हो चुके हैं। रोज 2-3 मरीजों को इंदौर रैफर करना पड़ रहा है। सोमवार भी दो मरीजों को रैफर किया। मरीजों को सर्दी-जुकाम व ठंड के साथ तेज बुखार आ रहा है।

ज्यादातर निजी डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। डॉक्टर निजी लैब में सीबीसी सहित डेंगू की जांच लिख रहे हैं। जांच में भारी रकम चुकाना पड़ रही है। जबकि स्वास्थ्य विभाग उस जांच को डेंगू पॉजिटिव मानता ही नहीं।

जल्दी बीमारी पुष्टि के लिए मरीज निजी पैथोलॉजी में जांच करा रहे हैं। वहां रेपिड टेस्ट हो रहा है। इस टेस्ट में पॉजीटिव मरीजों के सेंपल जिला अस्पताल में भेजे जा रहे हैं। यहां एलाइजा मशीन से जांच होती है। इसमें 50 सेंपल में से केवल 3-4 ही पॉजिटिव निकल रहे हैं।

डॉक्टर निजी लैब में सीबीसी सहित डेंगू की लिख रहे हैं जांच
भाई-बहन काे डेंगू, निजी अस्पताल में हो रहा इलाज
ऊन बुजुर्ग के भाई बहन शाहिद शरीफ पठान (9) व माही (7) का निजी अस्पताल में 4 दिन से इलाज चल रहा है। प्लेटलेट्स 41 हजार तक आ गए। उनके सेंपल जिला अस्पताल भेजे हैं।

शहर में 20 से ज्यादा निजी लैब, जांच सूची नहीं लगाई
शहर में 20 से ज्यादा निजी लैब है। इनमें मनमर्जी से राशि ली जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कोई रेट लिस्ट जारी नहीं की है। लैब संचालकों ने भी लिस्ट नहीं लगाई है। ज्यादा रुपए लिए जा रहे हैं।

बुखार हुआ तो निजी लैब में 1400 की जांच
मरीज को वायरल बुखार, सर्दी-खांसी हो तो निजी लैब में सीबीसी, सीआरपी, एस क्रिटेनिन, यूरिन, पीएम एंड एम व डेंगू स्क्रीनिंग जांच होती है। जांचों के 1400 रुपए लग रहे हैं। डेंगू जांच के 700 रुपए लगते हैं। जांच रेपिड कार्ड से होती है। पॉजिटिव रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग मान्य नहीं करता है। कई लैब में रेट लिस्ट चस्पा नहीं है।

निजी लैब की रिपोर्ट में डेंगू, दो रैफर
निजी लैब की जांच में दो युवकों में डेंगू मिलने पर उन्हें इंदौर रैफर किया। धूलकोट की सोनिका मालवीया (16) को सर्दी-जुकाम व बुखार के बाद भर्ती कराया। जांच में प्लेटलेट्स कम मिले। 4 दिन में प्लेटलेट्स 38 हजार हो गए। सोमवार उसे इंदौर रैफर किया। वहीं निजी अस्पताल में शकरगांव के शिवम जायसवाल (17) के प्लेटलेट्स भी 38 हजार तक गिरने पर इंदौर भेजा है।

जिला अस्पताल में रोज जांच नहीं
जिला अस्पताल में रोज डेंगू की जांच नहीं होती है। इस वजह से मरीज जांच करवाने नहीं जाते हैं। 90 प्रतिशत सेंपल निजी लैब से जिला अस्पताल पहुंचते हैं। रोज जांच हो तो लोगों को महंगी जांचों से बचा सकते हैं। परिजन का कहना है निजी लैब की रिपोर्ट मान्य नहीं की जाती है तो डेंगू की जांच पर रोक लगाना चाहिए। जांच जिला अस्पताल में ही होना चाहिए।

रैपिड किट की बजाय एनएच 1 की जांच मान्य
रैपिड किट :
तत्काल जांच के लिए रैपिड किट उपलब्ध है, लेकिन इसके नतीजे 60 फीसदी ही सही होते हैं। यह जांच खून के रंग के आधार पर होती है। यह पॉजिटिव को भी निगेटिव बता सकती है।

एनएच 1 : एलाइजा एनएच 1 किट ब्लड सैंपल के कंपोनेंट अलग कर की जाती है। इसमें 5 घंटे लगते हैं। यह प्रारंभिक जांच है और शुरूआत में डेंगू का पता लगाकर इलाज शुरू करने के लिए केंद्र द्वारा मान्य है।

रेट लिस्ट लगवाएंगे

  • वायरल बुखार चल रहा है। प्लेटलेट्स कई कारणों से कम हो जाते हैं। हर मामले में डेंगू नहीं बता सकते हैं। जिला अस्पताल में ज्यादा जांच होगी। निजी लैब में रेट लिस्ट लगाएंगे। -डॉ. डीएस चौहान, सीएमएचओ
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