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नगरीय निकाय:खरगोन, कसरावद व सनावद में महिला पद आरक्षित बड़वाह में कोई भी उतर सकता है चुनावी मैदान में

खरगोन5 महीने पहले
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  • 1994 में खरगोन में बिना आरक्षण वाली आखिरी परिषद में नाथूलाल गोयल चुने गए थे,1999 से बदली प्रक्रिया

जिले के शहरी क्षेत्र में महिलाओं का राज करेंगी। नगरीय निकाय चुनाव के लिए अध्यक्ष व महापौर की आरक्षण की कार्रवाई बुधवार को भोपाल में हो गई। इसमें खरगोन व कसरावद निकाय अध्यक्ष सीट महिला सामान्य, सनावद पिछड़ा वर्ग महिला व बड़वाह अनारक्षित तय हुई है। महेश्वर अध्यक्ष अनीता हेमंत जैन है। खरगोन में 1999 के बाद दोबारा महिला को अध्यक्ष चुनने का अवसर मिलेगा। खरगोन में 6 जनवरी, सनावद में 8 जनवरी, करही-पाडल्या, कसरावद, व बड़वाह निकायों में 10 जनवरी को अध्यक्ष व पार्षदों का कार्यकाल पूरा हुआ था। भोपाल में अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर लंबित कार्रवाई बुधवार को पूरी हुई। वार्डों का आरक्षण पहले ही हो चुका है। निकाय चुनाव में 1994 में नपाध्यक्ष का चुनाव पार्षद ही करते थे। वे बाहरी व्यक्ति को भी चुन सकते थे। यानी जिसने पार्षद पद का चुनाव नहीं लड़ा वे भी अध्यक्ष के लिए फॉर्म भर सकते थे। यहां 1994 में नाथूलाल गोयल पार्षदों के वोट से अध्यक्ष चुने गए। खरगोन नपा कार्यालय अधीक्षक मोहन कुशवाह बताते हैं आरक्षण के बाद पहली बार 1999 में पहली महिला अध्यक्ष विमला जायसवाल को जनता ने चुना। उन्होंने पूरे पांच साल तक कामकाज किया। 2007 में निकाय चुनाव में संशोधन कर महिलाओं का आरक्षण 50% कर दिया गया। आधे पद महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए।

जानिए...निकाय अध्यक्ष की आरक्षण प्रक्रिया पूरी, 15 से चुनाव कार्यक्रम की उम्मीद

50% महिला आरक्षण बाय रोटेशन
मप्र में नगरीय निकायों में 50% महिला आरक्षण बाय रोटेशन होता है। यानी पिछली बार महिला वर्ग के लिए आरक्षित निकाय इस बार अनारक्षित होंगे। इसका आशय कि पिछली बार अनारक्षित रहे निकाय इस बार महिला वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। लाॅट निकालने में कई बार तकनीकी पेंच आने से कभी स्थिति बदल भी जाती है।

ऐसा है निकाय अध्यक्ष आरक्षण

खरगोन महिला सामान्य बड़वाह अनारक्षित सनावद महिला अपिव कसरावद महिला सामान्य बिस्टान अजजा करही-पाडल्या अजा अनारक्षित (नोट : महेश्वर, मंडलेश्वर व भीकनगांव निकाय का कार्यकाल है बाकी)

रोचक रहा सफर... जिले के 6 निकायों में चुनाव और आरक्षण का इतिहास

खरगोन : 21 साल बाद महिला कुर्सी
नपा खरगोन की 1914 में स्थापना हुई। अब तक 53 पुरुष व 1 बार महिला अध्यक्ष चुने गए। 5 बार अलग-अलग प्रशासक रहे। 1995 में पहली बार महिला अध्यक्ष के रूप में विमला जायसवाल चुनी गईं। आरक्षण बाद 2007 विपिन गौर पहली बार अध्यक्ष चुने गए। 1 जनवरी 2015 को दूसरी बार पदभार संभाला।

बड़वाह : 20 साल बाद सभी को मौका
नपाध्यक्ष सीट 2000 के बाद अनारक्षित हुई है। तब कांग्रेस से अध्यक्ष चुने गए थे। किसी भी वर्ग का उम्मीदवार को चुनाव में उतरने की छूट रहेगी। इस बार महिला-पुरुष दोनों वर्ग के आरक्षण इंतजार कर रहे प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे तो दलों को उम्मीदवार उतारने में कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। प्रमुख दलों के पास सूची भी लंबी होगी।

सनावद : पति के बाद संभाली कुर्सी
पिछले 5 साल में उठापटक रही। 2015 में अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा चुने गए। उन्हें लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई के बाद हटना पड़ा। 8 अगस्त 2017 के उपचुनाव में उनकी पत्नी मंजुला शर्मा चुनाव जीतकर अध्यक्ष बनीं। पिछली बार यहां सामान्य सीट थी। अब महिला ओबीसी सीट हो गई।​​​​​​​

बिस्टान : पहला अध्यक्ष अजजा का
नवगठित नगरपंचायत बिस्टान में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। यहां निर्वाचक नामावली प्रकाशन के बाद दावे-आपत्तियों का दौर चल रहा है। आदिवासी क्षेत्र में होने व 37 प्रतिशत आबादी होने से बिस्टान में अध्यक्ष के लिए अजजा वर्ग को आरक्षण का फायदा मिलने की बात सच साबित हुई। पहला अध्यक्ष अजजा वर्ग का चुना जाएगा।

कसरावद : 10 साल बाद फिर दोहराव
यहां की 50 साल पुरानी नगरपरिषद में पहला चुनाव 1999 में राजेंद्र यादव ने जीता था। 2010 के बाद दोबारा सामान्य महिला के लिए अध्यक्ष की सीट आरक्षित हुई है। 2010 में सामान्य सीट पर शोभा जायसवाल अध्यक्ष चुनी गई। वे पहली महिला अध्यक्ष थीं। उसके बाद 2014 में पिछड़ा वर्ग पुरुष सीट का आरक्षण हुआ। ​​​​​​​

करही-पाडल्या : 5 साल में 2 बार जीत
नवगठित परिषद में पहली बार अजा महिला प्रत्याशी आशा प्रेम वासुरे अध्यक्ष चुनी गई। उनसे पार्षद असंतुष्ट नजर आए। इसलिए भाजपा व कांग्रेस के पार्षदों ने मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटा दिया। खाली और भरी कुर्सी के लिए दोबारा चुनाव हुए। इसमें आशा ने दोबारा जीत दर्ज की। यह सीट महिला अजा की थी।​​​​​​​

और इधर तैयारी
निकाय चुनाव ईवीएम से पंच-सरपंच बैलेट से चुनेंगे

नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष व पार्षदों के अलावा जनपद व जिला पंचायत सदस्य के चुनाव ईवीएम से होंगे। जबकि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में सरपंच व पंचों के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। हिंदी वर्णमाला की बजाय अभ्यर्थियोें के नाम अंग्रेजी अल्फाबेट के क्रम से तय किए जाएंगे। नगर परिषद अध्यक्ष 3 लाख व 10 लाख की नपाध्यक्ष आबादी के नाम से न्यूनतम 4 लाख से 10 लाख व पार्षद 1 लाख से 2.50 लाख रुपए तक चुनावी खर्च कर पाएंगे। 1 जनवरी 2021 की निर्वाचक नामावली से चुनाव होगा। कार्यक्रम जारी होने के बाद दावे-आपत्तियाें के विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।
जानिए आरक्षण
अजा-अजजा की आबादी से तय होता है प्रत्याशी

नगर निगम में महापौर के लिए अजा, अजजा का आरक्षण आबादी के अनुसार होता है, जबकि ओबीसी आरक्षण 25 प्रतिशत होता है। ओबीसी आरक्षण में नियम है कि पिछली बार ओबीसी के लिए आरक्षित रहे निकायों को हटा कर यह आरक्षण होता है। इस बार भी पिछले बार की तरह वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही आरक्षण हो रहा है। ऐसे में जनसंख्या का अनुपात पिछले आरक्षण यानी 2014 जैसा ही होगा। आशय यह है कि अजा-अजजा के लिए आरक्षण में बदलाव नहीं होगा।


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