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श्री गोपाल मंदिर:जीवन में जो जैसे कर्म करता है उसे उसी के फल स्वरूप जीवन में कर्म की होती है प्राप्ति

खरगोनएक महीने पहले
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  • नगर के प्राचीन गोपाल मंदिर में महंत हनुमानदास महाराज के सान्निध्य में हो रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक ने कहा

नगर के प्राचीन श्री गोपाल मंदिर में महंत हनुमानदास महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा वाचक पंडित दीपक शर्मा ने श्रीकृष्ण भगवान के छप्पन भोग गोवर्धन पूजा के महत्व को बताया। भगवान गोवर्धन का पूजन किया। पं. शर्मा ने बताया भगवान इंद्र जब प्रकोप में थे तब उन्होंने वर्षा करके कहर बरपाया। चारों ओर हाहाकार मच गया। गांव जलमग्न होने लगे। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठा लिया। इससे गांव के सभी लोगों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे आकर शरण ली। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का मान नष्ट कर गिर्राज पूजा कराई थी। बृजवासियों ने गोवर्धन पहुंचकर गोवर्धन पर्वत का पूजन कर छप्पन भोग लगाया। उन्होंने कहा आज भी वृदांवन में बांके बिहारी को दिन में आठ बार भोग लगाया जाता है। पूरे सात दिन भगवान श्रीकृष्ण ने भूखे प्यासे गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था। समाजसेवी जगन राठौड़ व अनिल राय ने कहा इस भोग से मन के विकार दूर होते हैं। मन की शुद्धि होती है। भगवान अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए किसी ना किसी रूप में प्रकट होते हैं।

सभी को प्रेमपूर्वक बोलना चाहिए
कथा वाचक पंडित दीपक शर्मा ने बाल लीला माखन चोरी की कथा सुनाते हुए कहा जीवन में जो जैसे कर्म करता है। उसे उसी के फल स्वरूप जीवन में कर्म की प्राप्ति होती है। हम सभी को अपने जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए। जीवन में स्वार्थ की भावना को त्याग कर अपने जीवन को प्रभु भक्ति व दूसरों की सेवा में लगानी चाहिए। व्यक्ति स्वार्थ की भावना को त्यागकर परमार्थ भाव से जीवन यापन करे तो वह निश्चित रूप से एक अच्छा इंसान है। परमार्थ की भावना ही व्यक्ति को महान बनाती है। हम सभी को सभी से प्रेमपूर्वक बोलना चाहिए।

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