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परेशानी:नप ने पुराने फायर फाइटर को बनाया शव वाहन, मरम्मत के लिए नहीं मिल रहे पार्ट्स

खरगोन8 महीने पहले
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  • एक साल से किराए के वाहन से शव ले जाना पड़ रहे, सीएमओ बोले- नए वाहन का प्रस्ताव बनाएंगे

नगर परिषद ने करीब 5 साल पहले लोगों की सुविधा के लिए पुराने फायर फाइटर को शव वाहन में तब्दील किया। इसके माध्यम से 4 साल तक शवों को नर्मदा घाट तक पहुंचाने की निशुल्क सेवाएं दी गई। अब पुराने वाहन के पार्ट्स जवाब दे गए। अब शवों को घाट तक ले जाने के लिए दूसरा वाहन नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। किराए के वाहन से शवों को घाट तक ले जाना पड़ रहा है। सीएमओ का कहना है पार्ट्स नहीं मिलने से वाहन बार-बार खराब हो रहा है। नए वाहन का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। पिछले एक साल से नप का शव वाहन फिल्टर प्लांट परिसर के कबाड़खाने में रखा हुआ है। नगर की आबादी करीब 25 हजार है। कई परिवार तो शव घाट तक ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था कर लेते है, लेकिन गरीब परिवार इसकी सुविधा नहीं जुटा पाते है। इसके अलावा थाना क्षेत्रों में लावारिस शव मिलने पर भी नप के वाहन का ही उपयोग होता था। पुलिस को भी अतिरिक्त वाहन की व्यवस्था करना पड़ रही है। नगर के शंकर, रमेश, तिलोक, शिवपाल आदि ने कहा नप को प्रस्ताव भेजकर शासन से शव वाहन की मांग करना चाहिए। कई परिवारों को तात्कालिक रूप से वाहन की सुविधा मिलने से राहत मिलती है।

2016 में दी थी स्वीकृति
शव वाहन की सुविधा नहीं होने से 2016 में हुई नप की बैठक में पुराने फायर फाइटर वाहन को शव वाहन बनाने की स्वीकृति दी थी। इसके बाद इस वाहन को शव वाहन में परिवर्तित करवाया गया। 2016 से 2019 तक इस वाहन के माध्यम से करीब 450 शवों को नर्मदा घाट तक नि:शुल्क रूप से पहुंचाया गया। पिछले एक साल से वाहन खराब पड़ा है। जानकारी के अनुसार यह फायर फाइटर वाहन महाराष्ट्र की निजी कंपनी से खरीदा गया था। इसके पार्ट्स महाराष्ट्र में ही उपलब्ध होते है। इंदौर सहित आसपास के शहरों में पार्टस नहीं मिलने से नप कर्मचारी इसकी मरम्मत में रुचि नहीं ले रहे हैं।
^पार्ट्स नहीं मिलने से पुराने शव वाहन को फिल्टर प्लांट परिसर में रखा है। जिन परिवारों में मृत्यु होती है उनके फोन आते हैं, लेकिन वाहन खराब होने से सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। शासन को पत्र लिखकर मांग की जा रही है। जल्द वाहन उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे।
संजय रावल, सीएमओ

इधर... एक ही एंबुलेंस के सहारे ब्लॉक के मरीज

कसरावद | विकासखंड के मरीज व घायल एक ही एंबुलेंस के सहारे है। एंबुलेंस सुविधा बढ़ाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। हालांकि रोगी कल्याण समिति की बैठक में इस व्यवस्था को बेहतर करने के प्रस्ताव रखे गए लेकिन यह सुविधा नहीं मिल पाई है। वर्तमान में सांसद निधि से मिली एक ही एंबुलेंस है। यह एंबुलेंस किसी मरीज को छोड़ने के लिए जिला अस्पताल जाती है तब तक अन्य मरीजों को इसका इंतजार करना पड़ता है। स्थिति गंभीर होने पर किराए के वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ता है। जानकारी के अनुसार 20 साल पहले यहां एक एंबुलेंस वाहन मिला था। उसकी स्थिति ठीक थी लेकिन 20 साल बाद इमरजेंसी सुविधा में पुराने वाहन का उपयोग नहीं करने के नियम के तहत इसे जिला मुख्यालय भेज दिया गया। रोगी कल्याण समिति की पुरानी एंबुलेंस भी पोस्टमार्टम रूम के सामने लंबे समय से पड़ी होकर प्रभावित हो रही है। बीएमओ डॉ. राकेश पाटीदार ने कहा सांसद निधि से प्राप्त एंबुलेंस से मरीजों को सेवाएं दी जा रही है। रोकस के माध्यम से अन्य वाहन की मांग की गई थी। दोबारा शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि आपातकालीन स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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