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इनसाइड स्टोरी:सुमित्रा और नारायण की तरह ही केदार की बैठक शिवराज से कराई, सत्ता से सहयोग का दिया भरोसा

खरगोनएक महीने पहले
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  • सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने नेपानगर व मांधाता का फॉर्मूला भगवानपुरा में लगाया

विधानसभा-2018 चुनाव में निमाड़ की कुल 16 में से 13 सीटों पर भाजपा ने हार का सामना किया। हार की समीक्षा में ज्यादातर सीटों पर कमजोर लोगों को टिकट देने व मजबूत आदिवासी नेतृत्व की कमी नजर असई। जब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने समर्थन वापस लिया तो भाजपा को निमाड़ के नुकसान की भरपाई के लिए बेहतर समय लगा। कमलनाथ सरकार गिरने के बाद सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया लगातार ने निमाड़ में सेंध लगाने का दायित्व संभाला। वे निर्दलीय व कांग्रेसी विधायकों से लगातार संपर्क में रहे। इसमें स्थानीय वरिष्ठ भाजपाइयों की मदद से विधायकों से शिष्टाचार के तौर पर संपर्क कर मन टटोला। डगमगाते सियासी माहौल के बीच डांवाडोल प्रतिनिधियों में यह युक्ति काम भी आई। यह बात नेपानगर में कांग्रेसी विधायक सुमित्रा कास्डेकर व मांधाता में नारायण पटेल के भाजपा में जाने व भगवानपुरा सीट के निर्दलीय विधायक केदार डाबर के सरकार को समर्थन के साथ सच साबित हुई। सूत्रों के मुताबिक भाजपा के पिछड़ा वर्ग के कद्दावर नेता के यहां रणनीति बनाकर सहयोगी अधिवक्ता शांतिलाल पाटीदार के साथ भोपाल भेजा गया। ताजा मामले में भदौरिया की रणनीति बताई जा रही है। उनसे संपर्क के बाद ही भगवानपुरा विधायक केदार डाबर की मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के साथ संक्षिप्त बैठक में तय बातें दोहराई गई। विधायक ने सियासी तौर पर ही सरकार को समर्थन दिया है पार्टीगत नहीं। निमाड़ क्षेत्र से भाजपा का आदिवासी नेतृत्व संकट में है। ऐसे में पार्टी को आदिवासी क्षेत्र के नेतृत्व को जिंदा करने में मदद मिलेगी।

3 माह पहले बोले थे - निर्दलीय पर कौन टाइम खराब करेगा
3 माह पहले भगवानपुरा विधायक केदार डाबर ने कहा था कि हम निर्दलीय हैं, निर्दलीय रहेंगे। किसी दूसरी पार्टी में जाने का विचार नहीं है। हमारे लिए कौन अपना समय खराब करेगा? अरुण यादव व सुरेंद्रसिंह बड़े नेता हैं। हम तो आदिवासी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आदिवासी भाइयों ने जिताया है उनकी सेवा करेंगे।

निमाड़ में एक फॉर्मूला इसलिए दो जगह कामयाबी से उम्मीद थी
नेपानगर में कांग्रेसी विधायक कास्डेकर व मांधाता विधायक नारायण पटेल के साथ पहले भदौरिया ने ही बात की थी। स्थानीय स्तर पर टिकट व जायज मांग को लेकर संतुष्ट किया। भगवानपुरा सीट विधायक निर्दलीय होने से मामला दूसरा जरूर था। लेकिन फॉर्मूला वहीं काम आया। विधायक के करीबी लोगों से संपर्क के बाद भदौरिया ने मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कराई। केदार ने क्षेत्र के विकास के एजेंडे की शर्त रखते हुए समर्थन की बात रखी तो सहज स्वीकार हो गई। मामलों में शिवराजसिंह का सहज रवैया सभी को पसंद आया।

इसलिए यह समय चुना : सत्ता में कद बढ़ाने जैसा है निर्णय
वोटिंग के ठीक पहले केदार का समर्थन देने से भाजपा को उसकी जरूरत पूरी होने जैसा लगेगा। यह उसे मोरल सपोर्ट देगा। जबकि दूसरी तरफ केदार जाधव यदि उप चुनाव के बाद यदि भाजपा अपने बूते सरकार बनाती है तब यह फैसला लेते तो उनकी अहमियत घट जाती। भाजपा की हार के बाद समर्थन देने का कोई मतलब नहीं रह जाता। ऐसे समय में जब सभी की निगाह भाजपा व कांग्रेस के सियासी माहौल पर है। ऐसे में केदार के समर्थन से उनका भाजपा सरकार में कद बढ़ाने जैसा है।

^ मैंने मेरे क्षेत्र के विकास के लिए भाजपा की सरकार को समर्थन दिया है। कार्यकर्ताओं ने चुनाव में उतारा था। जनता के प्रति जवाबदारी है। कमलनाथजी ने कोई बात सुनी नहीं हो या काम नहीं किया है ऐसा याद नहीं है। मेरी पत्नी कांग्रेसी व कार्यकर्ता समर्थक बने रहेंगे। -केदार डाबर, निर्दलीय विधायक भगवानपुरा

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