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टैक्स घटने का असर...:सवा करोड़ रुपए से घटकर 70 लाख रह गई थी मासिक आय

खरगोन3 महीने पहले
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  • 7 माह में टैक्स घटने व बाहर खरीदी से 31.32 प्रतिशत यानि 2.97 करोड़ का घाटा, अब पुराने नियम से खरीदी-बिक्री व परिवहन होगा

किसान कानून को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में कारोबार पहले की ही तरह करने के आदेश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 12 जनवरी के आदेश में किसान कानूनों पर रोक लगाने के बाद सारा काराेबार कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 के प्रावधानों के अनुसार होगा। इसमें मंडी के बाहर व्यापार करने वालों से भी टैक्स लिया जाएगा। खरगोन कृषि उपज मंडी में मई 2020 के पहले हर महीने औसत सवा करोड़ रुपए की आय होती थी। आंकड़े बताते हैं नए सिस्टम के कारण प्रदेश की ए ग्रेड मंडी खरगोन की आय बीते 7 माह में गिरकर औसत 70 लाख रुपए के आसपास रह गई। ये औसत 31.32 प्रतिशत की गिरावट है। मई में नए नियम लागू कर दिए गए। उसके बाद 7 महिनों में पिछले साल की तुलना में 2 करोड़ 97 लाख 76 हजार 828 रुपए आय में गिरावट आई। 2020-21 में अधिनियम लागू होने के बाद कुल 6 करोड़ 52 लाख 81 हजार 420 रुपए आय हुई। जबकि 2019-20 में 9 करोड़ 50 लाख 58 हजार 248 रुपए शुल्क मिला था। मंडी टैक्स भी 1 रुपए 70 पैसे प्रति क्विंटल से कम कर 50 पैसा प्रति क्विंटल कर दिया। फिलहाल मंडी में कपास के अलावा गेहूं, सोयाबीन, मक्का, तुअर, चना की आवक हो रही है।

मंडी : 5 साल में आय

13,57,62,866 2016-17 13,62,34,777 2017-18 16,04,48,765 2018-19 14,90,40,062 2019-20 6,52,81,420 2020-21

नोट आंकड़ें दिसंबर 2020 तक के हैं।

अधिनियम के बाद आय पर ये असर

माह 2019-20 2020-21 घट-बढ़% जून 52,32,830 70,14,621 34.05 जुलाई 28,26,646 75,52,481 167.18 अगस्त 44,34,085 9,28,391 -79.06 सितंबर 42,65,842 15,31,897 -64.08 अक्टूबर 1,37,68,822 98,04,271 -28.79 नवंबर 2,23,19,548 80,88,485 -63.76 दिसंबर 2,07,19,995 1,15,41,542 -44.29

नोट आंकड़े सभी रुपए में हैं।

अब मंडियों में चलेंगे पुराने ही नियम
किसान आंदोलन के बीच 12 जनवरी सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नए कृषि कानूनों पर रोक लगा दी थी। सरकार और किसानों के बीच बातचीत करके 2 माह में रिपोर्ट देने के लिए 4 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी बनाई। हालांकि आंदोलनकारी किसानों ने बात रखने से इंकार कर दिया था। आंदोलन अभी भी जारी है। कानूनों का आगे क्या होगा, इस पर असमंजस है। मप्र कृषि विपणन बोर्ड ने 28 जनवरी केंद्रीय कृषि अधिनियम के संबंध में ये निर्देश प्रदेश की सभी मंडियों को दिए। इसी दिन खरगोन में मंडी ने इस आदेश को जारी किया और व्यापारियों को सूचना भेजी। मंडियों में होने वाली खरीदी-बिक्री और परिवहन पर पुराने नियम ही चलेंगे।​​​​​​​

कर्मियों का भी था विरोध
पिछले साल मंडियों के अधिकार कम करने की तैयारी की थी तो प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के कर्मचारी इसके विरोध चले गए। कर्मचारियों ने मंडियों के संचालन में मुश्किल आने व कर्मचारियों का वेतन नहीं निकलने का खतरा बताया था। मई में लागू प्रावधानों के बाद मंडियों की आय घटती गई। कर्मचारियों को उम्मीद है आय फिर बढ़ेगी।

दो महीने बढ़ी थी खरीदी
अधिनियम की शुरुआत जून व जुलाई में सरकारी खरीदी के आंकड़े अपडेट होने पर मंडी को अच्छी आय हुई। जून में गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी पर 34.05% व जुलाई में सीसीआई की कपास खरीदी पर पिछले साल से 167.2% अधिक आय हुई।

लागू हुए पुराने प्रावधान
^कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में शासन स्तर से निर्देश जारी हुए हैं। मंडी टैक्स में बदलाव नहीं किया गया।
-रामवीरसिंह, सचिव कृषि उपज मंडी​​​​​​​

^ इससाल कपास व सोयाबीन का क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित हुआ है। हर उपज पर एमएसपी लागू होना चाहिए। - श्यामसिंह पंवार, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ​​​​​​​

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