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धर्म:दत्त संप्रदाय के लोगों ने किया यज्ञ व नर्मदा पूजन, ओढ़ाई चुनरी

खरगोन8 दिन पहले
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  • स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती टेंबे के भारत भ्रमण पथ पर स्थित काशी विश्वेश्वर मंदिर मंडलेश्वर में हुए आयोजन

दत्त संप्रदाय के स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती टेंबे स्वामी के भारत भ्रमण पथ पर स्थित काशी विश्वेश्वर मंदिर मंडलेश्वर जहां स्वामी जी ने चतुर्मास किया था। वह स्थान वासुदेव कुटी के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर अक्कलकोट स्वामी समर्थ आश्रम ठाणे व शिरडी सांई मंदिर संस्थान के भक्तों ने चार दिनी धार्मिक आयोजन किया। जिसका समापन मंगलवार को दत्तयाग (यज्ञ) व नर्मदा पूजा से किया गया।

पेशवाई जागीर के जागीरदार परिवार के मुखिया अनिल जागीरदार ने बताया काशी विश्वेश्वर मंदिर में वासुदेव स्वामी सन 1906 और 1912 में दो-दो माह चातुर्मास के लिए रुके थे। जिस कुटिया में स्वामी जी रुके थे। वह कुटिया आज भी मूल स्वरूप में संरक्षित है। इसे वासुदेव कुटी कहा जाता है। इसमें स्वामी जी की खड़ाऊ व उनके द्वारा हस्तलिखित श्लोक को रखा गया है। जिस श्लोक के पाठ से कष्ट भी दूर होते है। स्वामी जी ने दो बार भारत भ्रमण किया था। वे जिस पथ से गुजरे। वह जहां-जहां रुके उन सभी स्थानों पर प्रतिवर्ष स्वामी जी के भक्त गुरु चरित्र परायण और दत्तयाग करते हैं। दत्तयाग में नर्मदा मां, लक्ष्मी माता का पूजन और यज्ञ किया। जिसमें तिल और सूखे बेलफल की आहुतियां दी गई। इसके बाद रामघाट पर नर्मदा मां का पूजन कर चुनरी ओढ़ाई गई।

ऐतिहासिक है काशी विश्वनाथ का मंदिर

काशी विश्वनाथ मंदिर मंडलेश्वर के प्राचीन मंदिरों में शामिल है। जहां भगवान सूर्य, माता दुर्गा, श्रीगणेश व लक्ष्मीनारायण सभी पूर्वाभिमुख है। यह मंदिर पेशवाई जागीरदारों के लिए बनवाया गया था। जो इस मंदिर के पुजारी भी है। पुणे के पेशवा बाजीराव के समय यह जागीर रही थी। जिनके तहत मलगांव, इच्छापुर, पीपरी व धामनोद के पास पंधाना सहित 10 गांव की जागीर दी गई थी। मंडलेश्वर की उपजेल भी जागीरदार का किला हुआ करता था। जिसे अंग्रेजों ने अधिग्रहित किया था।

इस किले के दक्षिण में बड़ा भूभाग है जो अतिक्रमण की चपेट में आता रहा है। शासन इसे हेरिटेट घोषित करें। अधिवक्ता संजीव एस मोयदे, इतिहासकार दुर्गेश राजदीप, लेखक मुफज्जल हुसैन, समाजसेवी नितिन जोशी, जागीरदार परिवार के मुखिया अनिल जागीरदार, स्वानंद जागीरदार पुणे ने मंडलेश्वर के ऐतिहासिक महत्व पर चिंतन किया और सरकार के आग्रह किया है कि पुराने किले से जेल हटाकर उसे नगर की जनता को सौंप दिया जाए ताकि जनता अपनी विरासत को सहेज सके।

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