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कायाकल्प अभियान:पुरानी बिल्डिंग, नाला और पार्किंग से कटेंगे अंक, प्रबंधन का 80% का दावा

खरगोन25 दिन पहले
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  • टीम ने व्यवस्थाओं पर पूछे सवाल, कुड व्यवस्थाएं मिली बेहतर

कायाकल्प अभियान के तहत शनिवार को जिला अस्पताल में तीन सदस्यों की प्रदेश स्तरीय टीम ने फाइनल निरीक्षण किया। आठ बिंदुओं पर निरीक्षण हुआ। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग, पास में नगर पालिका के नाले व जगह-जगह पार्किंग के कारण नंबर कटने के आसार हैं। जबकि माड्यूल ओटी, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी, मेटरनिटी की बेहतर व्यवस्थाओं से अच्छे नंबर मिले। अस्पताल प्रबंधन ने 100 में से 80 से ज्यादा अंकों का दावा किया है।

जिला अस्पताल में सुबह 10 बजे डॉ. संदीप शर्मा भोपाल, डॉ. विपिन खटीक व नर्स काजुल तिवारी सागर से पहुंचे। टीम ने सिविल सर्जन के कक्ष व परिसर में जानकारी ली। टीम ने मेनगेट के पास बड़े नाले को लेकर कहा कि इससे गंदगी होती है। दुकानवाले कचरा नाले में बहाने से मच्छर पनपते हैं। ट्रांसफार्मर के पोल के आसपास तारों की बाउंड्रीवाल होना चाहिए। सर्जिकल वार्ड में पुताई व पुराने दरवाजे व खिड़कियों के नंबर काटे गए। कर्मचारियों से पूछा संक्रमण हो जाए तो कैसे इलाज करेंगे। चद्दर कितने दिन में बदलना है। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. दिव्येश वर्मा, प्रतीक पांजरे, दीपक यादव आदि मौजूद थे।

भर्ती मरीजों से पूछा- कोई पैसे तो नहीं मांगता

टीम ने मेटरनिटी में भर्ती शारदाबाई से पूछा कि कितने दिन में बेडशीट बदलते हैं। डॉक्टर को बुलाने पर आते हैं या नहीं। कोई पैसों की मांग या अभद्र व्यवहार करता है। इसके जवाब में शारदाबाई ने कहा कि रोजाना बेडशीट बदलते हैं। डॉक्टर इलाज करते हैं। शारदाबाई ने कहा कि नर्सों को बार-बार बुलाने जाना पड़ता है। ऑपरेशन थियेटर के बाहर कतार में मरीजों से पूछा- डॉक्टर इलाज कैसे करते हैं। फीस तो नहीं लेते हैं। मरीजों ने इंकार कर दिया। इसके बाद हर्बल गार्डन पहुंचे। यहां कम्पोस्ट व गार्डन को बेहतर बताया।

ऐसा है कायाकल्प का छठा चरण : 50 लाख का है पहला पुरस्कार
कायाकल्प का यह छठा चरण है। यह 2020 में ही हो जाना चाहिए, लेकिन कोरोना के कारण दो माह देरी से हुआ है। मार्च में परिणाम आएंगे। इसमें पहला पुरस्कार 50 लाख, दूसरा 20 लाख, तीसरा 10 लाख है। जबकि चौथे व पांचवे नंबर पर ढाई-ढाई लाख मिलेंगे। जिला अस्पताल को दो बार ढाई-ढाई लाख मिल चुके हैं।

यहां भी पहुंची टीम, ली जानकारी
बाॅयोमेडिकल वेस्ट : टीम ने बायोमेडिकल वेस्ट रूम पहुंची। यहां टीम ने कर्मचारियों से पूछा कितना बायोमेडिकल वेस्ट रख सकते हैं। गाड़ियां कब आती हैं। कितने दिन में बायोमेडिकल वेस्ट को डिस्ट्रॉय करना जरूरी है। इसके अलावा कर्मचारियों से सफाई व मरीजों से व्यवहार के बारे में जानकारी ली गई।
पेयजल टंकी : टीम के सदस्यों ने छत पर पहुंचकर पानी की टंकियों में झांककर देखा। यहां टंकियों में धुलाई की तारीख व अगली धुलाई कब होना है लिखा मिला।

ये तीन कमी बनी रोड़ा

1. बिल्डिंग: 1984 में अस्पताल भवन निर्माण हुआ था। खिड़कियां पुरानी व क्षतिग्रस्त।

2. नाला : मेनगेट पर गंदगी से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता।

3. पार्किंग : मेटरनिटी वार्ड के सामने पार्किंग के कारण अव्यवस्था के साथ मरीजों को परेशानी।

पूछा-क्या होते हैं 5 एस

टीम ने कर्मचारियों से पूछा कि पांच एस क्या होता है। कर्मचारियों ने बताया कि शॉर्ट (छांटना), सेट इन ऑर्डर (क्रम में लगाना), शाइन (साफ-सफाई), स्टैंडर्डाइज (मानक के अनुसार नियम बताना) व सस्टेन (आदत व्यवहार में लाना) शामिल है।​​​​​​​

^ सुविधाओं में लगातार सुधार जारी रहेगा। 80 प्रतिशत अंक मिलने की उम्मीद है। -डॉ दिव्येश वर्मा, सिविल सर्जन, खरगोन​​​​​​​​​​​​​​

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