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अवैध रेत उत्खनन पर रोक नहीं:बेखाैफ चलता है खनन, खदान की मंजूरी नहीं फिर भी रॉयल्टी के नाम पर होती है अवैध वसूली

खरगोन3 दिन पहले
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  • रेत उत्खनन का गांव बना सेमरला, जिम्मेदारों का नहीं है ध्यान

नावघाट खेड़ी के बाद नगर के पास सेमरला अवैध रेत उत्खनन का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। महेश्वर रोड पर रतनपुर फाटे से करीब 5 किमी अंदर होने के कारण होने पर यहां आसानी से पुलिस, राजस्व व खनिज विभाग अधिकारियों का सीधा दखल नहीं हो पाता है। यदि आते भी है तो मार्ग पर जगह-जगह बैठे मजदूर इसकी सूचना उत्खननकर्ताओं तक पहुंचा देते हैं। जिससे यहां से उत्खननकर्ता बेखौफ होकर रेत के ट्रैक्टर व ट्राॅली निकालकर ले जाते हैं। किसी ठेकेदार व व्यापारी को यदि रेत अच्छी मात्रा में चाहिए तो वह अपनी जवाबदारी पर माल पहुंचाने की ग्यारंटी भी देते हैं। अधिकारियों की नाक के नीचे से अवैध रूप से रेत निकालकर ले जाने की ग्यारंटी देने वाले यह उत्खननकर्ता किसके शय पर इतनी हिम्मत दिखा रहे हैं। मंगलवार को भास्कर टीम जब सेमरला पहुंची तो घाट के पहले ही जगह-जगह रेत के ढेर नजर आए। बिना किसी खौफ के मजदूर ट्रैक्टर में रेत भरने का कार्य कर रहे थे। आश्रम के पास पूरे परिसर में यह ढेर लगे थे। परिसर में एक दर्जन से अधिक रेत के ढेर देखने को मिले। जिसका सौदा करने वाले लोग ही वहां बैठे हुए नजर आए। पंचायत भवन से कुछ दूरी पर रेत का यह स्टाक न सरपंच को दिखता है न किसी जनप्रतिनिधियों को। रेत व्यवसायी आराम से ऊपर ही रेत धोने का कार्य ही करते हैं।

दिन में निकालते हैं रेत, सुबह 6 बजे से भरने लग जाते हैं ट्रैक्टर-ट्राॅली

नाव संचालक ने बताया यहां से जितनी रेत चाहिए उतनी रेत मिल जाती है। दिनभर यहां रेत निकालने का काम चलता है फिर सुबह होते ही ट्रैक्टर लगना शुरू हो जाते हैं। एक दिन में 15 से अधिक ट्रैक्टर भर जाते हैं। कभी-कभी इनकी संख्या ज्यादा भी होती है। सुबह 8 बजे तक ट्रैक्टर रेत भरकर निकल जाते हैं। यह ट्रैक्टर सेमरला, मुराल्ला सहित अधिकांशतः बड़वाह व आसपास के ग्रामीणजनों के है। उत्खनन का यह पूरा कार्य सेमरला घाट व इससे कुछ दूरी पर एक वीरान स्थल पर होता है।

खदान मंजूर नहीं फिर भी राॅयल्टी के नाम पर 1300 रुपए की वसूली, कार्रवाई करें
घाट पर पहुंचने पर पता चला कि यह रेत नर्मदा में से नाव निकाली जा रही है। ग्राहक बनकर बात कि तो रेत के ढेर के पास बैठी महिला ने बताया की मजदूरों द्वारा 2 हजार रुपए में रेत निकालकर ट्रैक्टर वालों को दी जाती है जबकि 1300 रुपए राॅयल्टी के देते हैं जो राॅयल्टी के रुपए ले रहा है उसकी जवाबदारी है कि रेत को नगर से होकर तय स्थान तक पहुंचाया जाए। इस तरह 4 हजार रुपए के आसपास ट्राॅली वाले यह रेत ग्राहक को सप्लाय करते हैं। अधिकारी द्वारा ट्राॅली पकड़ने की बात पर महिला ने बताया विभिन्न जगह पर लोग बैठे रहते हैं जो अधिकारी के आने की सूचना देते हैं कोई आएगा भी तो ट्रैक्टर को ठिकाने पर लगा देंगे। यहां खदान स्वीकृत नहीं है फिर भी रेत उत्खनन किया जा रहा है।

अवैध उत्खनन में मौत के बाद भी नहीं होती है कार्रवाई, सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है
कई स्थानों पर अवैध रेत के साथ मुरुम का भी उत्खनन क्षेत्र में किया जा रहा है। इस पर रोक लगना तो दूर इन पर कार्रवाई भी खानापूर्ति के लिए की जाती है। पिछले दिनों भी एक मजदूर की अवैध मुरुम उत्खनन करने के दौरान मुरुम गिरने पर दबने से मौत हो गई थी। इसके बाद भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। जिससे लोगों में आक्रोश है। लोगों ने बताया अवैध उत्खनन में मजदूरी की जान जोखिम में डालकर ठेकेदार लाखों रुपए कमाते हैं लेकिन उनकी मौत होने पर न तो प्रशासन मदद करता है न ही ठेकेदार मदद करते हैं। अवैध उत्खनन में मजदूरों की मौत होने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाना चाहिए।

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