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शून्य छाया दिवस:2 मिनट नहीं दिखी परछाई, ग्रामीण बच्चों ने भी देखा

खरगोन22 दिन पहले
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सोनाली ने सफाई कर समतल की जमीन। - Dainik Bhaskar
सोनाली ने सफाई कर समतल की जमीन।
  • खरगोन व सेगांव में 12.25 बजे पेसिंल की परछाई ने छोड़ा साथ
  • बॉक्स पर पेसिंल से किया प्रयोग

जीरो शेडो डे पर रविवार को खरगोन व सेगांव क्षेत्र में दोपहर 12.25 बजे 2 मिनट तक परछाई ने साथ छोड़ दिया। शहर के अलावा आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र में झोपड़ी में रह रहे माध्यमिक कक्षा के बच्चों ने खुद प्रयोग कर घर पर रहकर घरेलू सामग्री की मदद से खगोलीय घटनाक्रम को समझा। मोठापुरा गांव की 8वीं की सोनाली मंडलोई व आरती मंडलोई ने अपने घर के बाहर घरेलू बॉक्स पर लंबवत पेंसिल चिपकाकर प्रयोग को किया। जब पेंसिल की परछाई दिखना बंद हुई तो रोमांचित हो गईं। उन्हें पहले विश्वास नहीं हुआ कि भला परछाई कैसे साथ छोड़ती है। गांव के 7वीं के रोहित वर्मा ने बताया जो सेटअप तैयार किया था। गत्ता हिलने लगा तो मिट्‌टी डाल दी। परछाई गायब हुई और फिर 5 मिनट बाद बढ़ने लगी।

उन्हें रोनाल्ड रॉस साइंस क्लब मोठापुरा के नरेंद्र कर्मा, कल्पना चावला साइंस क्लब सेगांव के डॉ प्रशांत भावसार, न्यूज विजन साइंस क्लब घोट्या की रचना भावसार ने बच्चों को पहले ही शून्य छाया दिवस पर प्रयोग की कार्य विधि घरेलू तरीके से करना समझा दिया था।

नॉलेज : साल में दो बार बनती है शून्य छाया दिवस की स्थिति
विज्ञान शिक्षक कर्मा ने बताया पृथ्वी अपने अक्षांश पर साढ़े 23 डिग्री झुकी है। जब वह सूर्य कि परिक्रमा करती है और अपनी धुरी पर घूमती है। तब सूर्य का प्रकाश धरती पर हमेशा एक जैसा नहीं पड़ता। इसी कारण दिन व रात कि अवधि बराबर नहीं होती। जब सूर्य दक्षिण गोलार्द्ध स्थित मकर रेखा से 21 जून को उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा के अधिकतम बिंदू तक पहुंचता है।

तब भूमध्य रेखा से कर्क रेखा के बीच कुछ खास स्थानों पर सूर्य की किरणें सीधे गिरती है। ऐसा जब सूर्य वापस दक्षिण में स्थित मकर रेखा की ओर जाने लगता है तब भूमध्य रेखा से मकर रेखा पर मौजूद कई स्थानों पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं। तब वहां मध्याह्न में कुछ पलों के लिए परछाई साथ छोड़ देती है।

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