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आत्मनिर्भर:प्रदेश का पहला हैंडलूम कसरावद आर्ट क्लस्टर तैयार, कलेक्टर को भेंट की शॉल

खरगोन3 दिन पहले
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  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अगले माह के पहले सप्ताह में ऑनलाइन कर सकते हैं शुरुआत, साड़ी, शॉल, सूट व खादी के कपड़े तैयार होंगे

केंद्र सरकार के सूक्ष्म एवं लघु मंत्रालय के सहयोग से नावड़तौड़ी में प्रदेश का पहला हेंडलूम कसरावद आर्ट क्लस्टर प्राथमिक तौर पर तैयार हो गया है। क्लस्टर में साड़ी, शॉल, सूट, खादी के कपड़े और कुर्ते बनाए जाएंगे। इसका केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी फरवरी के पहले सप्ताह में विधिवत ऑनलाइन शुभारंभ कर सकते हैं। यह जानकारी जिला स्तरीय निर्यात संवर्धन समिति व जिला स्तरीय लघु उद्योग की बैठक में क्लस्टर की सचिव सीमा मिश्रा ने दी। बैठक में कपास के लिए टेक्सटाइल पार्क बनाने के लिए भी शुरूआत हुई है। महेश्वर पर्यटन स्थल है। नर्मदा के उसपार नावड़ातौड़ी में शालिवाहन प्राचीन शिव मंदिर के कारण खास पहचान भी है। यहां के कई ऐसे बुनकर हैं, जो कसरावद नगर में अन्य दुकानों पर काम कर रहे हैं। उन्हें आत्म निर्भर भारत से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार के सहयोग से यह कलस्टर स्थापित किया है। बैठक में कई ऐसे बिंदुओं सुझाव के साथ चर्चा की गई। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। बैठक में एकेवीएन के पीपी विजयवर्गीय, उद्यानिकी उप संचालक एसके मुजाल्दा, आईटीआई प्राचार्य हितेषी सुरागे, मंडी सचिव रामवीर किरार, कृषि वैज्ञानिक एसके त्यागी, उद्योगपतियों में सौरभ गर्ग, वेणीराम बिरला, श्री गोयल, बसंत अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी, व्यापारी व उद्योगपति उपस्थित रहे।

क्लस्टर में 407 बुनकर शामिल, 220 महिलाएं,187 पुरुष
कसरावद आर्ट क्लस्टर में अब तक 407 बुनकर जुड़े हैं। इसमें 220 महिलाएं व 187 पुरुष बुनकर शामिल है। इस आर्ट क्लस्टर बुनकर का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बुनकरों को जोड़कर एक नई ईकाई स्थापित कर उसे बढ़ावा देना है। इसी परिप्रेक्ष्य में यहां बनाई जाने वाली सामग्री को बुनकरों का ही नाम देकर ब्रांडिंग की जा रही है।

बुनकर रेखा की बनाई शॉल कलेक्टर को की भेंट
बुनकर रेखा की बनाई शॉल कलेक्टर अनुग्रह पी को भेंट की। उषा की बनाई साड़ी की भी ब्रांडिंग की जा रही है। नावड़ातौड़ी व सायता गांव में रहने वाले बुनकर अपने घरों में ही मटेरियल लाकर बनाने का कार्य कर रहे हैं। इस कलस्टर में दिव्यांगों के लिए भी एक अलग प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है।

सवाल : कपास टेक्सटाइल व मिर्च टेस्टिंग केंद्र की मांग
चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने कपास उत्पादक क्षेत्र में टेक्सटाइल इंडस्ट्री स्थापित करने की अपनी बात रखी। सुझाव आया कि टेक्सटाइल पार्क के लिए बिजली, पानी व जमीन की व्यवस्था होने पर हैंडलूम, पॉवरलूम, स्पिनिंग व नीटिंग सहित सभी तरह के काम एक जगह होने लगेंगे। कलेक्टर ने खरगोन व कसरावद एसडीएम को जगह तलाशने के लिए कहा है। जिला उद्योग के महाप्रबंधक एसएस मंडलोई ने निवेशकों की मांग व व्यवस्थाओं पर अलग बैठक की बात कही है। उद्योगपति सौरभ गर्ग ने बताया कि खरगोन में मिर्च की टेस्टिंग नहीं होने से मसाले खराब होने लगते हैं। यहां टेस्टिंग की सुविधा होना चाहिए।

जवाब : मंदसौर से बुलाएंगे कपास शोध केंद्र, होगी जांच
कलेक्टर ने कहा कि कपास उत्पादन खरगोन जिले में होता है। इसके लिए शोध केंद्र मंदसौर में है। इसके स्थानांतरण के लिए शासन स्तर पर व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जबलपुर को पत्राचार किया जाएगा। मिर्च व कपास उद्योग व खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़े उद्योगपतियों को गुंटूर व अमरावती इंडस्ट्रीज एरिया में दौरा कराया जाएगा। इसके अलावा स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया को चिली पेस्ट और स्पाइस लेब्रोटरी के लिए भी पत्र व्यवहार तैयार होगा। कलेक्टर ने कहा कि बीज का अंकुरण शत-प्रतिशत नहीं हो पाता है। इसके लिए अब खरगोन में बिकने वाले व आने वाले सभी मिर्च बीजों की लैब टेस्टिंग कराई जाएगी। इसके लिए ग्वालियर प्रयोगशाला प्रबंधन से चर्चा हुई है।

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