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  • There Is No Discussion On Medical College In 5 Tribal Areas Of The Division, Neither Rail Nor Medical College Facility In Khargone

कैबिनेट से निराशा:संभाग के 5 जनजातीय क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज पर चर्चा तक नहीं, खरगोन में न रेल,न मेडिकल कॉलेज की सुविधा

खरगोन2 महीने पहले
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  • इंदौर संभाग में 3 साल पहले सिर्फ खंडवा में शुरू किया था मेडिकल कॉलेज

आजादी के बाद से जिला मुख्यालय पर न रेल लाइन आई न जिला कोर्ट। मेडिकल कॉलेज की सुविधा भी मुहैया नहीं हो पा रही है। प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का केबिनेट ने निर्णय लिया है। जनजातीय क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करने वाली सरकार ने इंदौर संभाग के एक भी आदिवासी जिले को इसमें शामिल नहीं किया है। संभाग में 8 में से 6 आदिवासी जिले हैं, जिनमें एक में भी मेडिकल कॉलेज नहीं है। 18 साल पहले स्वास्थ्य विभाग जिला मुख्यालय पर टेमला रोड की जमीन पर मेडिकल कॉलेज खोलने को लेकर सर्वे कर शासन को स्वास्थ्य संसाधन, ओपीडी, पेरामेडिकल स्टाफ सहित कई जरूरी दस्तावेज भेज चुका है। उसके बाद 3 साल पहले दूसरी बार महेश्वर तहसील के लाडवी में मेडिकल कॉलेज खुलने मंगवाए प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

इसी साल सीएमएचओ डॉ. डीएस चौहान ने जिला मुख्यालय पर 3 जगह अलग-अलग 25 एकड़ जमीन का चिन्हांकन कर प्रशासन के माध्यम से भिजवाया था। इसमें भौगोलिक स्थिति, चिकित्सा स्टाफ सहित आगामी 10 सालों में जिला अस्पताल पर बढ़ने वाले भार की जानकारी उपलब्ध कराई। जनप्रतिनिधियों के लगभग 2 दशक से अधूरे प्रयास हो रहे हैं। इंदौर संभाग में खंडवा में मेडिकल कॉलेज है। धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी जिलों के 70 लाख से ज्यादा आबादी स्थानीय स्तर पर संसाधनों से वंचित है।

नए मेडिकल कॉलेज खुलने से 255 सीट पर दाखिला पक्का

प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज खुलने से 300 सीट बढ़ेंगी। हर कॉलेज में न्यूनतम 50 सीट जरूरी है। नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को मिलेगा। मेडिकल कॉलेजों में केंद्र की 15% व राज्य कोटे की 85% सीट होती है। 300 में से 255 सीट प्रदेश के लिए रिजर्व रहेंगी। यदि प्रदेश के विद्यार्थी बेहतर अंक लाते हैं तो वे ऑल इंडिया लेवल की 15% सीटों पर भी दाखिला ले सकते हैं। सीटें बढ़ने से कट ऑफ भी कम होने के आसार हैं। अनुमान के मुताबिक इंदौर संभाग के 5 जनजातीय जिलों से लगभग 5 हजार विद्यार्थी नीट की परीक्षा की तैयारी करते हैं।

भाजपा : सांसद-मंत्री की 22 माह की कोशिश बेकार

प्रदेश में लगभग 22 माह पहले बनी शिवराज सरकार को जिले के विधायकों की मंशा से अवगत कराया गया। खरगोन मेडिकल संघर्ष समिति ने मुहिम शुरू की। जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग रखी गई। सांसद गजेंद्र पटेल, प्रभारी मंत्री हरदीपसिंह डंग के बाद तत्कालीन कृषि मंत्री कमल पटेल ने कार्रवाई प्रचलित होने का भरोसा दिया। जिले के 5 विधायकों ने सहमति पत्र देकर खरगोन मुख्यालय पर ही मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग पर सहमति जताई थी। 6 अगस्त को राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सोलंकी ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया को आदिवासी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग रख चुके हैं।

कांग्रेस : पूर्व मंत्री ने भेजा लाडवी का प्रस्ताव

2018 में कांग्रेस सरकार में चिकित्सा शिक्षा एवं आयुष मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ अपने गृहक्षेत्र महेश्वर में अधूरे संसाधनों के साथ प्रस्ताव भेज दिया। इसके पहले स्वास्थ्य विभाग जिला मुख्यालय पर खोलने की जानकारी भेज चुका था। सरकार बदलने के बाद मामला अटककर रह गया। साधौ चाहती थी कि उनके क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज खुले। तब क्षेत्र की आबादी, भूमि आवंटन, स्वास्थ्य संसाधन, मरीजों की ओपीडी सहित अन्य जरूरी सर्वे कराकर भेजा गया था।

गुमराह हो रही है आदिवासी जनता : विधायक

सरकार व उनके नुमाइंदे आदिवासी क्षेत्र की लगातार उपेक्षा कर रहे हैं। लोगों की जरुरत का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सांसद व मंत्री के सिर्फ आश्वासन देने से गरीब आिदवासी लोग गुमराह हो रहे हैं। - रवि जाेशी, विधायक खरगोन

सरकार की प्राथमिकता में है कॉलेज : सांसद

सरकार धीरे धीरे मेडिकल कॉलेज खोल रही है। खरगोन में मेडिकल कॉलेज की सुविधा सरकार की प्राथमिकता में है। - गजेंद्र पटेल, सांसद खरगोन-बड़वानी

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