वैक्सीनेशन से पहले युवाओं से उम्मीद:टीके के 68 दिन बाद कर सकेंगे रक्तदान, मुश्किल ये ब्लड बैंक में 5 दिन का स्टॉक

खरगोन6 महीने पहले
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  • जिला अस्पताल में 50 यूनिट ही रक्त, रोजाना 10 की खपत

जिले के एकमात्र ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। यहां मात्र 50 यूनिट रक्त बचा है। कोरोना के डर के कारण जिले के एकमात्र ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। यहां मात्र 50 यूनिट रक्त बचा है। कोरोना के डर के कारण रक्तदाता ब्लड डोनेशन करने नहीं जा रहे। पिछले डेढ़ माह से कोई शिविर भी नहीं लगा। इसका सीधा असर ब्लड की उपलब्धता पर पड़ा है। जबकि रोजाना 10 यूनिट ब्लड की खपत होती है।

1 मई के बाद यह परेशानी और बढ़ सकती है। क्योंकि 18 साल से अधिक उम्र आयु के लिए इसी तारीख से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ब्लड बैंक पहुंचने वाले रक्तदाताओं में इसी आयु वर्ग के लोगों की संख्या भी अधिक है। दोनों डोज के टीकाकरण में 40 दिन का अंतर होना जरूरी है। वहीं टीकाकरण के 28 दिन बाद ही युवा रक्तदान कर सकेंगे। यानी टीका लगने के 68 दिन बाद ही वे रक्तदान के लिए पात्र होंगे। इस दौरान रक्त की कमी से जरूरतमंदों के सामने परेशानी खड़ी हाे सकती है।

इससे निपटने के लिए युवा रक्तदाताओं को आगे आना चाहिए ताकि उनका रक्त संकट के समय किसी की जिंदगी बचाने के काम आ सके। जिले में थैलेसिमिया व सिकलसेल के मरीजों की संख्या करीब 400 है। हर माह इस बीमारी के पीड़ितों को ब्लड बैंक में रक्त चढ़ाया जाता है। कई पीड़ितों को हर 10 दिन में रक्त की आवश्यकता होती है। मेटरनिटी वार्ड व ट्रामा सेंटर में भी जरूरतमंदों को ब्लड उपलब्ध करवाया जाता है। ब्लड बैंक में रक्त की कमी होने पर इनकी परेशानी बढ़ सकती है।

इन्होंने समझी अपनी जवाबदारी अब आपकी बारी है

  • शहर के टैगोर पार्क निवासी 37 वर्षीय दीपेश कांतिलाल नागड़ा। बुधवार दोपहर ब्लड बैंक पहुंचे और रक्तदान किया। उन्होंने कहा हर 3 माह में रक्तदान करता हूं। शाम वैक्सीनेशन के लिए पंजीयन करवाना है। टीकाकरण के 3 माह बाद तक रक्तदान नहीं कर पाऊंगा। इसलिए पहले डोनेट किया ताकि आपात स्थिति में उसका उपयोग हो सके।
  • ग्राम डालकी के 37 वर्षीय अरविंद आनंदराम राठौड़ ने भी बुधवार को ब्लड बैंक पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने बताया कि एक साल पहले रक्तदान किया था। कोरोना काल में ब्लड बैक में खून की कमी है। थैलेसिमिया और सिकलसेल के मरीजों की जरूरत को देखते हुए मैंने रक्तदान किया है।

ब्लड सेपरेशन यूनिट : ड्रग इंस्पेक्टर के निरीक्षण में अटकी सुविधा

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेशन एंड कंपोनेंट यूनिट शुरू होना है। इसके लिए करीब दो साल पहले मशीन आई थी। कुछ मशीनें आना बाकी थी वे भी पहुंच चुकी है। इस यूनिट को शुरू करने के लिए लगभग सभी कमियों को पूरा किया जा चुका है। लेकिन यह शुरू नहीं हो पा रही है। यूनिट शुरू होने से मरीजों को प्लाज्मा डोनेट की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

ब्लड बैंक कर्मियों के अनुसार यूनिट शुरू करने के लिए केंद्र व स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर का अंतिम निरीक्षण बाकी है। निरीक्षण व लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी होते ही यूनिट शुरू की जा सकेगी।

हर माह इतनी जरूरत

  • 100-150 यूनिट मेटरनिटी वार्ड में
  • 80-90 यूनिट सिकलसेल मरीजों को
  • 60-80 यूनिट थैलेसिमिया पेसेंट्स को

कोरोना ने घटाए ब्लड कलेक्शन के आंकड़े

जरूरतमंदों की मदद करने या स्वेच्छा से रक्तदाता जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचते हैं। इसके अलावा समय-समय पर रक्तदान शिविर के आयोजन भी होते रहते हैं। लेकिन कोरोना के डर के कारण इनमें कमी आई है। हालात है कि वर्ष 2020 में ब्लड कलेक्शन का आंकड़ा 6 साल पहले हुए डोनेशन से भी पीछे चला गया। 2014 में 8527 लोगों ने ब्लड डोनेट किया था। इनमें से 2930 यूनिट 57 शिविरों के माध्यम से जुटाया गया था। जबकि 2020 में यह घट गया। कुल 8138 यूनिट ब्लड कलेक्शन हुआ है। इसमें से 2482 यूनिट 45 शिविरों में डोनेट किया गया। इस साल मार्च तक 2780 पुरुष व 50 महिलाओं ने ब्लड डोनेट किया है।

ब्लड बैंक में रक्त की कमी दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। कोरोना के चलते शिविर नहीं लगा सकते। लेकिन किसी क्षेत्र के 8 से 10 युवा रक्तदान करना चाहे तो ब्लड कलेक्शन एंड ट्रांसर्पोटेशन वेन भेजकर डोनेशन करवा सकते हैं।
- डाॅ. हेमेंद्र मुछाला, ब्लड बैंक प्रभारी

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