किसानों को दोहरा नुकसान:हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई, नहीं निकला भूसा, इंदौर से 300 रु. ज्यादा देकर बुला रहे

महेश्वर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
हार्वेस्टर से गेहूं कटाई के बाद खेत में भूसा नहीं निकला। - Dainik Bhaskar
हार्वेस्टर से गेहूं कटाई के बाद खेत में भूसा नहीं निकला।
  • इंदौर के भूसे में मिलावट से मवेशी हो रहे हैं बीमार

मौसम के लगातार बदलने के कारण लोगों ने मजदूरी की जगह हार्वेस्टर से गेहूं कटाई कराई। इसके चलते कटाई के दौरान भूसा ही नहीं निकला। इससे मवेशियों की समस्या हो गई है। किसान मजबूरी में इंदौर से 300 रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा दाम देकर बुला रहे हैं। एक किसान को औसत 25 से 30 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है।

क्षेत्र मे इस साल अधिकांश हिस्सों में गेहूं और चने की बोवनी की गई थी। मार्च में मौसम में हुए बदलाव, बारिश व ओलावृष्टि के कारण किसानों ने फसल को हार्वेस्टर मशीन से कटवा लिया। इसके कारण कई स्थानों पर गेहूं के भूसे की किल्लत देखने को मिली। वहीं चने का रकबा क्षेत्र में इस बार कम रहा। जबकि गेहूं का रकबा महेश्वर तहसील में अधिक देखा गया था।

कृषि विभाग के एसएडीओ रामलाल वर्मा ने बताया कि इस वर्ष गेहूं का रकबा 33420 हेक्टेयर रहा। वहीं चने का रकबा 10315 हेक्टेयर में बुवाई की गई थी लेकिन मार्च महीने में मौसम में बदलाव और अचानक बारिश और ओले गिरने की खबरों के चलते किसानों ने अधिकांश क्षेत्रों में हार्वेस्टर मशीन से ही गेहूं कटाई कराई। इससे किसानों के सामने गेहूं के भूसे को लेकर समस्या हो गई।

महेश्वर तहसील में गेहूं का रकबा 33420 व चने का रकबा 10315 हेक्टेयर था

ऐसे समझें गणित

इंदौर में 100 क्विंटल की गाड़ी भरकर भेजते हैं। एक किसान को मवेशियों के लिए सालभर के लिए 100 क्विंटल भूसा उपयोग है। यह गाड़ी 50 से 55 हजार रुपए में मिल रही है। जबकि पहले किसानों से खरीदीने पर यह गाड़ी 20 से 25 हजार रुपए में ही मिल जाती है।

इसके अलावा गोशालाओं में भी आर्थिक भार बढ़ गया है। स्थानीय गोशाला के दिलीप पाटीदार ने बताया कि पहले हमें एक साल के लिए ढाई लाख रुपए रुपए सुखला पर खर्च होते थे। अब यह साढ़े पांच लाख रुपए हो गए हैं। ढाई से तीन लाख रुपए ज्यादा चुकाना होंगे।

गेहूं कटाई में एक बीघा के 2 हजार रुपए लेते हैं मजदूर

किसान मोहनसिंह ने बताया कि हार्वेस्टर मशीन एक बीघा गेहूं फसल कटाई के लिए 1000 से 1100 रुपए लेते हैं। वही मजदूरों की मजदूरी प्रति व्यक्ति 300 प्रतिदिन के हिसाब से लेते हैं। एक बीघा गेहूं फसल कटाई के लिए 2000 देना पड़े। किसानों ने क्षेत्र में आई हार्वेस्टर मशीन से ही कटाई कराई।

मजबूरी में किसानों को इंदौर भूसा मंडी से गेहूं का भूसा 550 प्रति क्विंटल, चना भूसा 600 प्रति क्विंटल व मसूर भूसा 650 प्रति क्विंटल की दर से किसानों से बुलाना पड़ रहा है। एक किसान 50 से 120 क्विंटल भूसे से भरी गाड़ियां बुला रहे हैं।

भूसे में मिलावट की आशंका, मवेशी होते हैं बीमार

किसान मोहनसिंह दरबार ने बताया कि खेतों में निकले भूसे में किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती है। कई बार देखा गया है कि बाहर से आने वाली से की गाड़ियों में विशेषकर चने और मसूर के भूसे में राई व सरसो का पाला भी मिलाकर व्यापारी बेच देते हैं। इससे मवेशियों के बीमार होने की आशंका बनी रहती है।

3 दिन पहले ही 650 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मसूर भूसे की 120 क्विंटल से भरी गाड़ी बुलाई है, क्योंकि 550 प्रति क्विंटल गेहूं के भूसे के बजाय मसूर का भूसा पशुओं के लिए अधिक पौष्टिक रहता है। इसलिए 100 प्रति क्विंटल अधिक देकर मसूर का भूसा पशुओं के लिए बुला रहे हैं।

यह कारण भी रहा

इस साल मौसम के कारण भी गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। इसके चलते भूसे की भी परेशानी आ रही है। खराड़ी के किसान महादेव पाटीदार ने बताया कि मौसम खराब के कारण गेहू्ं का दाना बारिक रहा। इससे उत्पादन पर असर हुआ है। एक बीघा खेत में पिछले साल गेहूं का उत्पादन 12 से 15 क्विंटल था। इस साल 7 से 8 क्विंटल ही रहा। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार यदि देखा जाए तो 33420 हेक्टेयर रकबे में गेहूं के उत्पादन तो कम रहा है। भूसे के उत्पादन पर भी भारी असर पड़ा है।

खबरें और भी हैं...