धरोहर का स्थानांतरण:महेश्वर की 10वीं-11वीं शताब्दी की प्रतिमाएं भेज रहे ओंकारेश्वर

महेश्वर9 महीने पहले
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1998 में राजबाड़ा से यहां आया था संग्रहालय। - Dainik Bhaskar
1998 में राजबाड़ा से यहां आया था संग्रहालय।
  • इंदौर-भोपाल की तकनीकी टीम ने दौरा कर जानकारी जुटाई, 23 साल पहले राजबाड़ा से स्थानांतरित किया था, संग्रहालय को देंगे नया रूप

महेश्वर के पुरातत्व संग्रहालय की 10वीं-11वीं शताब्दी की प्रतिमाएं ओंकारेश्वर जाएंगी। संस्कृति विभाग ने तैयारी शुरू कर दी। हालांकि स्थानीय स्तर पर कोई आदेश नहीं पहुंचा है, लेकिन भोपाल के अफसर स्थानीय संग्रहालय को नया रूप देने का कह रहे हैं। कुछ दिन पहले उप संचालक तकनीकी अधिकारी कृष्णकांत बरई, पुरातत्व अधिकारी रमेश यादव, इंदौर संभाग के डिप्टी डायरेक्टर एसआर वर्मा व सहायक यंत्री अजय गुप्ता यहां आकर मुआयना कर चुके हैं।

संग्रहालय की देखरेख के लिए एक अधिकारी व दो कर्मचारी नियुक्त है। हालांकि पुरातत्व संग्रहालय के स्थानांतरण को लेकर स्थानीय स्तर पर जिला स्तरीय विभागीय अफसर साफ कुछ कह नहीं पा रहे हैं। न ही अभी यहां कोई सरकारी आदेश आया है। लेकिन भवन को नया रूप देकर कुछ बदलाव करने की बात कही जा रही है। इसे लेकर पूर्व संस्कृति मंत्री व महेश्वर विधायक डॉ विजयलक्ष्मी साधौ ने विरोध किया है। उनका मानना है कि देवी अहिल्याबाई होलकर व अन्य प्राचीन धरोहरों को देखने पर्यटक देश-विदेश से पहुंचते हैं। यहां आकर वे ओंकारेश्वर नहीं जाएंगे। वैसे भी यहां से कई कार्यालय बाहर शिफ्ट कर दिए गए हैं। जो वापस स्थापित नहीं किए गए।

1998 में राजबाड़ा से यहां आया था संग्रहालय
ढाबला मार्ग पर 26 अगस्त 1998 को विधायक व तत्कालीन मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने पुरातत्व संग्रहालय का लोकार्पण किया था। इसके पहले संग्रहालय राजवाड़ा परिसर में था। वहां से स्थानांतरित कर शहर से 1 किमी दूर यहां स्थापित किया। सालभर सैकड़ों स्कूली बच्चों की ट्रिप के अलावा देशी-विदेशी पर्यटक धरोहरें देखने आते है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी क्षेत्र की प्राचीन धरोहर को लेकर लोगों को जागरूकता कार्यक्रम करते हैं।

10वीं व 11वीं शताब्दी की प्रतिमाएं व सामग्री
यहां होलकर कालीन धरोहरों के अलावा परमारकालीन व 10वीं-11वीं शताब्दी के मंदिरों की प्रतिमाएं, अस्त्र-शस्त्र, सिक्के, डाई सील व कई रियासतों के चिन्ह हैं। इसके अलावा क्षेत्र के उचावद, ब्राह्मणगांव, खलघाट, खापरखेड़ा ग्रामों में पुरातात्विक उत्खनन से मिली सामग्री भी है। नर्मदा के उस ओर ग्राम नावड़ातोड़ी से ताम्र पाषाण युग, मोहन जोदड़ो के समकालीन उत्खनन सामग्री भी रखी हुई है।

डॉ साधौ ने कहा- जो कार्यालय गए, नहीं लौटे
विधायक डॉ. साधौ ने कहा कि कोई भी चीज जाने के बाद वापस नहीं आती है। यहां से पहले भी बड़े विभागों में एसडीओ, पीएचई, जल विद्युत परियोजना, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन, नवलपुरा में एनवीडीए का सब डिवीजन जैसे विभाग भाजपा की पिछले 15 साल की सरकार में अन्यत्र स्थानांतरित हो गए। इन्हें वापस लाने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कांग्रेस सरकार में 300 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज स्वीकृत कराया था। नई सरकार ने इसका नाम ही हटा दिया। यह क्षेत्रवासियों के साथ अन्याय है।

अस्थायी भेज रहे हैं
^ कई चीजें जोड़कर संग्रहालय को बेहतर प्रदर्शित करना हैं। मूर्तियों व अन्य धरोहर को अस्थाई तौर पर ओंकारेश्वर रखा जाएगा।
- शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव, संस्कृति विभाग, भोपाल

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