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अब बेरोजगार:केला फसल लगाते थे बोरबन तालाब पीड़ित

नेपानगरएक महीने पहले
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  • तालाब से महज 5 किमी दूर रहतीं हैं विधायक कास्डेकर

42.11 लाख रुपए के घोटाले से जुड़े बोरबन तालाब पीड़ित किसान केली की फसल लेते थे। इससे उन्हें खासा मुनाफा होता था लेकिन जमीन डूब में आने के बाद अब पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं। जिन किसानों को मुआवजा मिला, वह भी पर्याप्त नहीं है। जमीन बेचने के बाद रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है लेकिन आज तक विधायक सुमित्रा कास्डेकर और न ही पूर्व विधायक मंजू दादु हमारी तकलीफ जानने पहुंची हैं।

पीड़ितों ने कहा कास्डेकर पहले कांग्रेस में थीं। हमने उन्हें जीताकर विधायक बनाया। इसके बाद वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चली गईं। हमने उन्हें दोबारा मौका दिया और फिर से विधायक बनाया लेकिन हमारे बुरे वक्त में उन्होंने हमारी सुध नहीं ली है।

जबकि विधायक बोरबन तालाब से महज 5 किमी दूर देड़तलाई में रहतीं हैं। पूर्व विधायक मंजू दादु का गांव भी 25 किमी कानापुर है लेकिन उन्होंने भी आज तक हमारी परेशानी नहीं जानी। विधायक कास्डेकर कहती हैं कि पीड़ितों से मिलने एक बार गई थी।

एक बार गई थी तालाब पीड़ितों से मिलने
मैं बोरबन तालाब पीड़ितों से मिलने एक बार चौखंडिया गई थी। एक पत्र भी मुख्यमंत्री के नाम लिखा था। कलेक्टर से भी अनुरोध किया था कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। -सुमित्रा कास्डेकर, विधायक, नेपानगर

​​​​​​​तालाब जब बनने लगा तब गई थी
पिताजी ने ही बोरबन तालाब स्वीकृत कराया था। जब मैं विधायक बनी और तालाब का काम शुरू होने वाला था, तब वहां गई थी। कुछ लोग विरोध कर रहे थे कि तालाब नहीं बनना चाहिए तब मैंने समझाइश दी थी। वर्तमान में घर में कोविड मरीज होने के कारण वहां नहीं जा सकी। -मंजू दादु, पूर्व विधायक, नेपानगर

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