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वनाधिकार:ऑनलाइन लगा दिए सैकड़ों फर्जी दावे

नेपानगरएक महीने पहले
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  • खंडवा, खरगोन, बड़वानी में बसे अतिक्रमणकारियों तक ने कर रखे हैं जिले में दावे
  • पंचायतों के रिकार्ड और ऑनलाइन में अलग-अलग आंकड़े
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जब से वनाधिकार अधिनियम 2005-06 लागू हुआ है, तब से लेकर आज तक जिले में लगातार जंगलों का खात्मा हो रहा है। नेपानगर क्षेत्र में अब तक करीब 6 हजार से अधिक अतिक्रमणकारियों को वन भूमि पर काबिज होने के कारण पट्टे मिल चुके हैं। लेकिन अब भी पट्टों के लिए अकेले नेपानगर और खकनार तहसील के 6 हजार से अधिक दावे पेंडिंग हैं। खास बात यह है कि वनाधिकार के लिए किए गए ऑनलाइन दावों में कई दावे फर्जी लगा दिए गए हैं। पंचायतों के पास जो रिकार्ड मौजूद है, उसमें आंकडे कुछ आ रहे हैं और ऑनलाइन पोर्टल पर इनकी संख्या कुछ और बताई जा रही है। पोर्टल पर इनकी संख्या अधिक है। वनाधिकार पट्टों के लिए बुरहानपुर तहसील के भी करीब आठ हजार दावे पेंडिंग होना बताए जा रहे हैं। जानकारी अनुसार खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिले के रहने वाले अतिक्रमणकारियों ने भी बुरहानपुर जिले में ऑनलाइन आवेदन कर रखे हैं। लेकिन इनकी सही जांच-पड़ताल जिला प्रशासन और वन विभाग नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि बाहरी अतिक्रमणकारी भी बुरहानपुर जिले में पट्टे लिए दावा लगा रहे हैं।

फैक्ट फाइल-
6 हजार पट्टेदारी पहले से हैं नेपानगर क्षेत्र में
6 हजार के दावे अब भी नेपानगर और खकनार तहसील में पेंडिंग
8 हजार से ज्यादा दावे बुरहानपुर तहसील के
50 हजार से आदिवासी काबिज हैं नेपानगर तहसील में

आधार कार्ड बना पट्टे हथियाने का हथियार, प्रशासन ने जांच नहीं की

जिले में करीब एक लाख से अधिक अतिक्रमणकारी वन क्षेत्र में काबिज हैं। वास्तविक हकदारों के अलावा फर्जी भी हैं, जिन्होंने दावे लगाने के लिए आधार कार्ड को हथियार बना रखा है। दूसरे जिले से यहां आकर बसने के बाद उन्होंने आधार कार्ड में अपना पता बदलवाया, लेकिन वन विभाग कार्ड की जांच नहीं कर पाया है। आधार कार्ड कहां बना है, इसकी प्रशासन और वन विभाग जांच करा ले तो आधे से ज्यादा फर्जी दावे खारिज हो सकते हैं।

यह होगी प्रक्रिया

पात्र अतिक्रमणकारियों की फाइल पंचायतों में निपटाई जा रही है। दावों का सत्यापन होने के बाद इसे वन विभाग के बीट गार्ड के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। यहां से दावे वनाधिकार समिति के पास जाएंगे। यहां सत्यापन के बाद पट्टे मिलेंगे। हालांकि ये पहले से बेहतर व्यवस्था है आधार कार्ड की जांच को भी शामिल किया जाना चाहिए था।
सागफाटा पंचायत में 123 दावे, ऑनलाइन 156

पंचायत और ऑनलाइन पोर्टल पर आंकड़ें अलग-अलग होने का एक उदाहरण सागफाटा पंचायत है। पंचायत में सिर्फ 123 दावे ही रिकार्ड में हैं। लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदनों की संख्या 156 बताई जा रही है। ऐसे में पंचायत सचिवों के सामने भी असमंजस की स्थिति है। कहीं न कहीं वे भी दबाव में हैं। बताया जा रहा है कि अधिकारियों पर इस बार वनाधिकार के दावों का जल्द से जल्द निराकरण करने और दावों का सत्यापन कर लाभ दिलाने का दबाव है। लेकिन ऐसे में फर्जी दावे करने वाले अतिक्रमणकारियों को ही फायदा होगा, अधिकांश ग्राम पंचायतों में खंडवा जिले के छनेरा और हरसूद सहित अन्य गांवों से भी ऑनलाइन दावे किए गए हैं। वनभूमि पर इन्हीं पंचायतों के तहत काबिज होना दर्शाया गया है।

पहले निरस्त हो चुके दावों पर ही हो रहा पुर्नविचार

पहले निरस्त दावों पर ही पुनर्विचार होगा। कियोस्क से किए आवेदन  पर विचार नहीं होगा। अनुविभाग में 6 हजार दावे पेंडिंग हैं। एससी टेमने, सीईओ जपं खकनार

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