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फसल पर हमला:मोजेक वायरस से समय रहते नहीं निपटा गया तो भविष्य में बढ़ सकती है नुकसानी

नेपानगर5 दिन पहले
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  • उद्यानिकी विभाग अफसरों ने अंबाड़ा में ली 5 गांवों के किसानों की बैठक

केला फसल पर मोजेक वायरस के कहर से किसान चिंतित हैं। देर से ही सही उद्यानिकी विभाग ने मामले की गंभीरता को समझा और अब किसानों को इससे बचाव के लिए बैठक की। अंबाड़ा में रविवार को हुई बैठक में पांच गांवों के किसानों को बुलाया गया। इसमें अंबाड़ा, हिंगना, लिंगा, देवरी सहित अन्य गांवों के किसान शामिल हुए। उद्यानिकी विभाग उपसंचालक आरएनएस तोमर ने कहा- वर्तमान में जिले में अनुकुल तापमान में आद्रता के कारण केला फसल पर मोजेक वायरस का प्रकोप अधिक मात्रा में देखा जा रहा है।

अगर समय पर किसानों द्वारा इस रोग का निदान नहीं किया गया तो भविष्य में भारी नुकसानी को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने किसानों को वायरस से बचाव के सुझाव, तरीके बताए। केले की फसल पर वायरस के अटैक के किसानों को काफी नुकसान हो गया है। अब किसानों को संक्रमित पौधे उखाड़ना पड़ रहे हैं। इस दौरान गोपाल अप्पा, राजू तायड़े, अशोक पाटील, प्रमोद पाटील, ज्ञानेश्वर चौधरी, संतोष अप्पा, पंडित पवार, गोपाल राठौर, कमल सिंह ठाकुर, बाड़ू पाटील सहित किसान मौजूद थे।

रोग के यह है लक्षण

इस रोग को स्थानीय भाषा में हरण्या रोग के रूप में जाना जाता है। हरी पत्ती के नष्ट हो जाने से पत्तियों पर पीले रंगी की धारिया दिखाई देती है। पत्ते पानी के सम्पर्क में आते हैं तो पौधा सड़ा या जला हुआ दिखता है। समय के साथ-साथ केले के पौधों पर रोग के प्रमाण पाए जाते हैं और सीधे मरते जाते हैं।

रोग के कारण

यह रोग एक वायरस के कारण होता है। वायरस पानी से नहीं फैलता है। वायरस मिट्टी से नहीं फैलता है। यह वायरस मक्का, कपास, ककड़ी वर्गीय फसलों पर सुप्त अवस्था में बैठे रहता है।

प्रभावी नियंत्रण के लिए यह करें उपाय

संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर खेत से दूर ले जाकर जला देना चाहिए। बगीचे में प्रतिदिन निरीक्षण कर रोग ग्रसित पौधों को निकालकर उनके स्थान पर रोग रहित पौधे लगाना चाहिए। बगीचे में अवधि फसलों के रूप में कददुर्गाय फसलें टमाटर, साग भाजी फसलों को लगाने वाली सब्जी निकाले और बगीचे को साफ करें। इस रोग के निदान के लिए समस्त किसानों को सामूहिक रूप से मुहिम चलाकर रोग का नियंत्रण करके इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। एमीडाक्लोप्रिड 6 एमएल, एसीफेट 15 ग्राम स्टीकर 15 एमएल, नील 50 एमएल 15 लीटर पानी में मिलाकर करें। बगीचा साफ करने के उपरांत साफ मौसम में छिड़काव करना सुनिश्चित करें।

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