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बिजली कंपनी में कर्मचारियों का संकट:36 हजार किमी लंबी लाइन में फाल्ट सुधार का जिम्मा 40 लाइनमैन पर, 300 की और जरूरत

खंडवा25 दिन पहले
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  • 6 लाइनमैन की संक्रमण से हो चुकी है मौत
  • 25 साल पुराने हैं तार

बिजली कंपनी में बिल भरने से लेकर सभी काम हाईटेक हो चुके हैं लेकिन कर्मचारियों की कमी से व्यवस्थाएं बिगड़ने लगी हैं। मानसून की शुरुआत होने वाली है और फाल्ट के लिए भी कंपनी अपनी पूरी तैयारी का दावा कर रही है। हकीकत ये है कि 25 साल पुराने ट्रांसफॉर्मर व बिजली के तार में होने वाले फाल्ट के लिए कंपनी के पास सिर्फ 40 लाइनमैन हैं जबकि 6 की संक्रमण से मौत हो चुकी है। कंपनी की शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में 36 हजार किमी लंबी 11 केवी, 33 केवी व एलटी की लाइनें बिछी हुई हैं, उपभोक्ता 3.25 लाख हैं लेकिन कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बजाय घटती जा रही है। कंपनी को 300 कर्मचारियों की और आवश्यकता है।

इनके अभाव में 25 साल पुरानी लाइनों के तारों व ट्रांसफार्मर की देखरेख करना मुश्किल हो जाता है। कंपनी का दावा है कि बिल, नए कनेक्शन आदि सभी को ऑनलाइन कर दिया है। हकीकत ये है कि पुरानी लाइनों पर मामूली लोड बढ़ने, हवा आंधी चलने पर इनमें फाल्ट हो जाता है। ताजा उदाहरण शनिवार रात बड़ाबम क्षेत्र में ट्रांसफार्मर में आग लगना है।

जिले में 36 हजार किमी लंबी बिजली की लाइनें बिछी हैं, मानसून में पानी लगते ही होंगे फाल्ट

हेल्पर के भी 192 पद खाली हैं
बिजली कंपनी के अनुसार उनके पास 300 अफसर कर्मचारियों की कमी है। जिसमें प्रथम श्रेणी के 11 में से 8, द्वितीय श्रेणी के 23 में से 14, तृतीय में 361 में 290, चतुर्थ में 454 में 214 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। 839 कर्मियों की जरूरत है जबकि 526 ही नियुक्त हैं। लाइन में 382 हेल्पर हैं, जिनमें 190 काम पर हैं, 192 पद खाली हैं। लाइनमैन के पद भी 17 हैं जिसमें 6 ही काम कर रहे हैं।

क्षमता खत्म पर नहीं बदल रहे तार
शहर की 11 केवी, 33 केवी व एलटी लाइन से जुड़े कई क्षेत्रों में 50 साल पुराने बिजली के तार हैं। क्षमता खत्म होने के बाद भी तारों को नहीं बदला जा रहा। इनमें एलटी कनेक्शन वाली लाइनों की हालत बहुत खराब है। घरेलू कनेक्शनों से जुड़ी इन लाइनों को न बदला गया और इनकी सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए गए।

पुराने ट्रांसफॉर्मरों पर पानी लगते ही हो जाते हैं फाल्ट
शहर में कई स्थानों पर अब भी पुराने ट्रांसफार्मरों से ही काम चलाया जा रहा है। तेज धूप के बाद पानी लगने व ओवरलोड होने पर इंसुलेटर सहित अन्य फाल्ट होने से ये जल जाते हैं। शनिवार रात बड़ाबम क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जलने का कारण ओवरलोड ही है।
शहर में सिर्फ 6 लाइनमैन, बिजली सुधार इनके जिम्मे
बिजली कंपनी के पास शहर में 6 व ग्रामीण में 40 लाइनमैन ही हैं। अगर कहीं फाल्ट या बिजली गुल होती है तो सुधार भी इन्हीं काे करना है। पिछले एक साल में कोरोना से 6 लाइनमैनों की मौत होने से स्थिति और बिगड़ गई है।
16 हजार ट्रांसफॉर्मर व 3.25 लाख उपभोक्ता हैं
जिले में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 33 केवी की 1700 किमी, 11केवी की 7500 किमी व एलटी की 11,500 किमी लंबी लाइनें हैं। इस पर 16 हजार ट्रांसफार्मर हैं और उपभोक्ताओं की संख्या 3.25 लाख हैं।

मेंटेनेंस के लिए आते हैं दो करोड़ रु.
मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी साल में दो बार प्री-मानसून व पोस्ट मानसून मेंटेनेंस करती है। इसके लिए साल में करीब 1 करोड़ रुपए का फंड आता है जबकि अफसर केवल सामग्री मिलना बताते हैं। मेंटेनेंस के नाम पर कंपनी व ठेकेदार पेड़ों की टहनियां छांटते हैं। लूज जंपर, इंसुलेटर को ठीक करते हैं।
किलोवाट के आधार पर हाेती है लोड क्षमता
किलोवाट क्षमता के आधार पर 25 केवीए, 63 केवीए, 100 केवीए, 200 केवीए, 315 केवीए और 500 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर लगाए गए हैं। 200 किलोवाट के ट्रांसफाॅर्मर पर 160 किलोवाट की क्षमता होती है। इसी प्रकार अन्य की भी गणना इसी आधार पर होती है।-

-जितेंद्र पाल, सहायक यंत्री, बिजली कंपनी।

मेंटेनेंस पूरा करते हैं, फाल्ट होने पर सुधार भी किया जाता है
प्री व पोस्ट मानसून का मेंटेनेंस हर साल पूरा करते हैं। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक लोड व बारिश के पानी से ट्रांसफार्मर और लाइनों में फाल्ट हो जाते हैं। जिनमें तुरंत सुधार कर विद्युत सप्लाई शुरू कर देते हैं। कोई दिक्कत आने पर उसका भी समाधान करते हैं।
- एसआर सेमिल, अधीक्षण यंत्री, बिजली कंपनी

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