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एक टीके की कीमत आप क्या जानाे:कोविशील्ड के 17.50 लाख कीमत के 4364 डोज बर्बाद, कोवैक्सीन के शून्य

खंडवा24 दिन पहले
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  • शाम 4 बजे के बाद टीके लगवाने कम लोग पहुंचे
  • नियमानुसार 10% वेस्ट हो सकता है, लेकिन हमारे यहां यह आधे से भी कम, फिर भी यह ठीक नहीं

जिले में 16 जनवरी से 30 अप्रैल तक कोविशील्ड वैक्सीन के 1,06,830 में से 1,02,466 डोज का उपयोग हुआ, जबकि 4364 डोज बर्बाद हाे गए। यानी 4.09 प्रतिशत टीके की बर्बादी हुई है। सरकारी दर पर इन बर्बाद हुए टीकों की कीमत 17,45,600 रुपए होती है। बर्बाद होने वाले ये टीके 4 बजे के बाद खुलने वाले वायल के हैं, क्योंकि लोग इस वक्त में कम आते हैं। हालांकि सरकार के नियमानुसार कुल के 10 प्रतिशत डोज बर्बाद हो सकते हैं, लेकिन यह आंकड़ा जिले में आधे से भी कम है।

वही कोवैक्सीन के 14448 डोज मिले थे। सभी टीके लगे, यानी बर्बाद एक भी नहीं हुआ। दोपहर 3 से शाम 5 बजे के वक्त में कम ही लोग टीकाकरण के लिए आते थे। टीम ने तय किया कि अब तीन बजे के बाद 6 से 7 लोगों के मौके पर होने पर ही वायल खुलेंगे। यदि तीन से चार डोज बचते हैं तो घर-घर जाकर या सेंटर से कॉल कर डोज लगाएंगे।

बचाव : गांव-गांव में घुमाए प्रचार रथ

  • जिला टीकाकरण विभाग में पांच लोगों की टीम वैक्सीन के सौ फीसदी उपयोग का शेड्यूल तय करती है।
  • ग्रामीण स्तर पर हेल्थ वर्कर्स की टीम घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर टीकाकरण की जानकारी देती है।
  • 6 से 7 लाेगों के आने पर ही वायल खोला। डोज बचा तो हेल्थ वर्कर्स घर से बुलाकर सेंटर पर लोगों को लाई।
  • शहरी क्षेत्र में डोज के बचने पर सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से लोगों को बुलाया।

बदलाव : टीकाकरण का घटाया समय, अब सुबह 9 से दोपहर 4 बजे तक ही लग रहे
5 मई से 18 से 44 साल आयुवर्ग के लिए टीकाकरण शुरू किया। इस वर्ग के लोगों का शहरी क्षेत्र में स्लॉट बुकिंग व ग्रामीण में ऑनसाइट रजिस्ट्रेशन के माध्यम से टीकाकरण किया जा रहा है। टीके की बर्बादी को रोकने वैक्सीनेशन के समय में बदलाव किया। पहले जहां सुबह 9 से 5 बजे तक टीकाकरण होता था अब यह समय सुबह 9 से 4 बजे कर दिया गया है। 4 से 5 बजे के बीच में बचे हुए डोज ऑनसाइट बुकिंग के माध्यम से युवाओं को लगाए जा रहे हैं।

गणित : कोविशील्ड का एक डोज सरकार को 400 व निजी हॉस्पिटल को मिल रहा 600 रुपए में

कोविशील्ड का एक डोज सरकार को 400 व निजी हॉस्पिटल को 600 रुपए में मिल रहा है। जबकि कोवैक्सीन का एक डोज सरकार को 600 व निजी अस्पतालों को 1200 में पड़ रहा है। 30 अप्रैल तक बर्बाद हुए कोविशील्ड वैक्सीन के 4364 डोज की कीमत सरकारी दर से 17,45,600 रुपए है। इस नुकसान को तय शेड्यूल के अनुसार टीकाकरण करवाकर बचा सकते हैं।

डोज बचाने के लिए बनाई योजना
टीकाकरण के दौरान 10 फीसदी डोज खराब होने की शासन की गाइडलाइन है। खंडवा जिले में हमने डोज को बर्बाद होने से बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्ययोजना बनाई। जिसे कारण तय गाइडलाइन के आधे से भी कम डोज खराब हुए। मई महीने का आंकड़ा 31 मई के बाद जारी करेंगे।
-डॉ.अनिल तंतवार, जिला टीकाकरण अधिकारी

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