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सरकार ! खंडवा में राशन का घपला:गुप्ता जिनिंग फैक्ट्री से 90 क्विटंल गेहूं मिला, अफसर ने पीडीएस की बोरियां न मिली कहकर व्यापारी को दी क्लिनचिट

खंडवा7 महीने पहले
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मुखबिर की सूचना पर शनिवार देर रात गुप्ता जिनिंग फेक्ट्री पहुंचे अफसर। - Dainik Bhaskar
मुखबिर की सूचना पर शनिवार देर रात गुप्ता जिनिंग फेक्ट्री पहुंचे अफसर।

खंडवा में एक बार फिर सरकारी अनाज की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। प्रशासन ने देर रात मूंदी में एक जिनिंग फैक्ट्री से 90 क्विंटल अनाज जब्ती में लेकर सुबह व्यापारी को क्लिनचिट दे दी। जबकि, कालाबाजारी के तार खंडवा के राशन माफिया से जुड़े हुए है, ट्रांसपोर्टिंग के जरिये कंट्रोल दुकान जाने वाला अनाज सीधे व्यापारियों के गोदामों पर खाली होता है।

मुखबिर की सूचना पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अफसरों ने शनिवार देर रात 11 बजे मूंदी में कन्नौद रोड स्थित संतोष कुमार, लखनलाल गुप्ता जिनिंग फैक्ट्री में दबिश दी। उन्हें सूचना मिली थी कि कंट्रोल दुकान जाने वाले ट्रकों से यहां सरकारी अनाज खाली हो रहा है। जिनिंग फैक्ट्री में गेहूं को फ्रेश करके राजस्थान, गुजरात में सप्लाई होती है।

अफसरों को यहां 90, 60 किलो की पैकिंग और खुला ढ़ेर मिलाकर करीब 90 क्विंटल गेहूं मिला। रविवार सुबह मंडी अफसर जांच के लिए आए तो व्यापारी ने किसानों से अनाज खरीदना बता दिया। पूरे मामले में व्यापारी को क्लिनचिट दे दी। बताया कि मौके से पीडीएस की बोरियां नहीं मिली। व्यापारी लाइसेंसधारी है तथा मंडी टैक्स भरते है।

गुप्ता जिनिंग फेक्ट्री के परिसर में रखा गेहूं।
गुप्ता जिनिंग फेक्ट्री के परिसर में रखा गेहूं।

ट्रक खाली होते है, बोरियां वापस ले जाते

गुप्ता जिनिंग फैक्ट्री के यहां सरकारी अनाज से भरे ट्रक खाली होते है। ट्रक वाले गेहूं निकालकर बोरियां अपने साथ ले जाते है। राशन के घपले में खंडवा के राशन माफिया का कनेक्शन का है। खाद्य विभाग एवं आपूर्ति विभाग के अफसर भी पूरे खेल में मिले हुए है। मूंदी की गुप्ता जिनिंग फैक्ट्री में सुबह और रात के समय राशन की तस्करी को अंजाम दिया जाता है।

हम किसानों की प्राेफाइल खंगालेंगे

जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी अरुण तिवारी ने बताया कि, मैंने फूड इंस्पेक्टर सुनील नागराज और मंडी इंस्पेक्टर एसएच सोलंकी को मौके पर भेजा था। उन्हें पीडीएस की बोरियां नहीं मिली। व्यापारी ने किसानों ने माल खरीदना बताकर किसानों की सूची दी है। अब हम किसानों की प्रोफाइल खंगालेंगे कि उनकी जमीन कितनी है, समर्थन मूल्य पर कितना गेहूं बेच चुके है और इस समय गेहूं कहां से आया।

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