जैन समाज:23 साल बाद मुनि संघ आया, आचार्य वर्धमान सागर सहित आए 18 मुनिश्री

खंडवा9 महीने पहले
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मंच पर विराजमान आचार्य वर्धमान सागर महाराज सहित मुनि संघ ने लोगों का अभिवादन इस तरह स्वीकार किया। - Dainik Bhaskar
मंच पर विराजमान आचार्य वर्धमान सागर महाराज सहित मुनि संघ ने लोगों का अभिवादन इस तरह स्वीकार किया।
  • 3800 किमी चलकर आए मुनि संघ ने नवंबर-19 में शुरू की थी यात्रा

शहर में 23 साल बाद मुनि संघ का आगमन हुआ। इसमें आचार्य 108 वर्धमान सागर महाराज (दक्षिण वाले) सहित एक आचार्य और 17 मुनि शामिल थे। इससे पहले 1998 में श्री विद्यासागर महाराज का संघ शहर में आया था।

शनिवार सुबह 7.30 बजे गांधी भवन के पास स्टेशन रोड पर बड़ी संख्या में समाज के लोग संतों की आगवानी के लिए पहुंचे। बच्चे भी ध्वज पताका लिए दौड़ते हुए स्टेशन रोड पहुंचे। ठंडी हवा के बीच मुनि संघ का आगमन होते ही मौजूद लोगों ने उनकी चरण वंदना कर अगवानी की। यहां से शोभायात्रा के रूप में मुनि संघ केवल राम चौराहा से बुधवारा, रामगंज होते हुए सराफा स्थित पोरवाड़ जैन मंदिर पहुंचा।

यहां मुनि मिल, पार्श्वनाथ भगवान दर्शन के बाद शोभायात्रा घासपुरा स्थित खंडेलवाल दिगम्बर जैन मंदिर पहुंची। यहां मुनि संघ की मंगल आरती व चरण धुलाकर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया। आहारचर्या के पश्चात ही मुनि संघ ने महाराष्ट्र के सांगली जाने के लिए बुरहानपुर की ओर विहार कर दिया। संचालन पंकज-प्रदीप छाबड़ा ने किया।

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मार्ग में शामिल नहीं था खंडवा, आग्रह पर आया संघ
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर का पद विहार नेमावर से महाराष्ट्र के लिए चल रहा है। संघ के रास्ते में खंडवा शामिल नहीं था। इसलिए 10 मार्च को झूमरखाली पहुंचकर मुनि सेवा समिति के विजय सेठी, पवन गदिया, कांति भाई, पंकज जैन, सचिन छाबड़ा, नरेंद्र जैन, वीरेंद्र भटयांण ने संघ को खंडवा आमंत्रित करने के लिए श्रीफल भेंट कर आग्रह किया तो मुनि संघ ने आने की स्वीकृति दे दी।

संघ में शामिल हैं यह मुनि
मुनि संघ में वृषभ सागर, विदेह सागर, गुण सागर, श्रुत सागर, निर्भय सागर, अजय सागर, अभय सागर, अचल सागर, अविचल सागर, शाश्वत सागर, अनंत सागर, शिव सागर, आदि सागर, नेमि सागर, नमी सागर, निर्दोष सागर, निर्लोभ सागर शामिल हैं।

यह भी हुआ

  • शोभायात्रा में कांतिलाल जैन ने भजनों की प्रस्तुति दी।
  • कार्यक्रम में आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन विनोद अंकित बडज़ात्या ने किया।
  • शास्त्र भेंट अखिल भारतीय महिला परिषद सदस्यों ने किया।
  • मंगलाचरण अशोक लुहाड़िया ने किया।
  • आहारचर्या का पुण्यार्जन धनपाल कासलीवाल, अमर लुहाडिय़ा, अतुल जैन, कैलाश पहाडिय़ा, निरुपमा प्रवीण बैनाड़ा, मोहिनी जैन, सुषमा प्रमोद जैन, दिलीप पहाड़िया व पवन रावका परिवार को मिला।

खान-पान की शुद्धता भूलने से हो रहे ज्यादा बीमार : आचार्य
घासपुरा मंदिर परिसर में आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने कहा सुख-शांति चाहिए तो पश्चिम संस्कृति के पीछे नहीं जाए। इस धीमे जहर से दूर रहना जरुरी है। दुनिया में 250 से ज्यादा देश है। 10-12 में ही अंग्रेजी का प्रभाव है। हर देश अपनी भाषा में पढ़ाई करा रहे हैं। देश की राष्ट्रभाषा पर अभिमान होना चाहिए। सबकुछ भारतीय संस्कृति के अनुकूल होना चाहिए। पश्चिमी संस्कृति से अपनी भाषा और खान-पान की शुद्धता भूल रहे हैं। इसलिए ज्यादा बीमार हो रहे हैं। मोह का क्षय ही मोक्ष है। वित्त के पीछे न लगकर वितराग के पीछे लगना चाहिए। हमें भी मोक्ष चाहिए तो यही कहना पड़ेगा। प्रवचन में वीरेंद्र भट्यान, दिलीप पहाडिय़ा, ख्यालीलाल सेठी, सुनील जैन, विजय सेठी, कैलाश पहाड़िया, पंकज सेठी, अविनाश जैन, प्रेमांशु चौधरी, धनपाल कासलीवाल, पंकज जैन महल, सचिन छाबड़ा, विजय सेठी, राकेश गंगवाल, पंकज सेठी, दीपक सेठी, मनीष पाटनी, सतीश काला, पवन गदिया सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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