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राहत:बैंक के अऋणी व डिफाल्टर किसानों को भी सोसायटियों से नकद में मिलेगा यूरिया

खंडवाएक महीने पहले
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  • किसानों की परेशानी को देखते हुए कलेक्टर ने दिए निर्देश

अब जिले के अऋणी, कालातीत व राष्ट्रीयकृत बैंकों के क्रेडिट कार्डधारक किसानों को भी सहकारी समितियों से नकद रुपए देने पर यूरिया मिलेगा। यूरिया बेचने की जानकारी सोसायटी को अपने रजिस्टर व किसान की ऋण पुस्तिका में दर्ज करनी होगी। ऐसा होने पर किसान बाजार में महंगे दाम पर यूरिया खरीदने से तो बचेगा, साथ ही यूरिया की कालाबाजारी भी नहीं हो सकेगी।

शासन के निर्देशानुसार वर्तमान में सहकारिता क्षेत्र में 55% तथा निजी क्षेत्र में 45% उर्वरक बाजार में विक्रेताओं के माध्यम से बेची जा रही थी। इस कारण जिले के अऋणी कृषक, राष्ट्रीयकृत बैंकों के क्रेडिट कार्डधारी किसान एवं डिफाल्टर किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिलने में समस्या आ रही थी। ऐसे किसान बाजार से 266.50 रु. प्रति बोरी कीमत वाला यूरिया 350 रु. तक में लेने को मजबूर थे।

किसानों को विपणन संघ के गोदाम से भी नकद यूरिया मिलना बंद हो गया था। किसानों की परेशानी को देखते हुए कलेक्टर अनय द्विवेदी ने सोमवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय उर्वरक समिति की बैठक में निर्णय लिया कि जिले में स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के माध्यम से नकद खाद क्रय-विक्रय की व्यवस्था की जा सकती है।

उन्होंने जिला सहकारी बैंक प्रबंधक एके हर्षोला, सहकारिता उपायुक्त के. पाटनकर, विपणन संघ अधिकारी रोहित श्रीवास्तव व कृषि उपसंचालक आरएस गुप्ता को निर्देश दिए कि वे सेवा सहकारी समितियों को प्राप्त होने वाले आगामी उर्वरक के स्टाक में से 20% उर्वरक समितियों में आने वाले गांवों के अऋणी कृषक, राष्ट्रीयकृत बैंकों के क्रेडिट कार्डधारक किसान एवं डिफाल्टर किसानों को भी नकद में बंटवाएं। किसानों को बेचे गए उर्वरक की मात्रा रजिस्टर व ऋण पुस्तिका में भी दर्ज की जाए, ताकि जिले में उर्वरक की कालाबाजारी एवं उर्वरक की कमी न हो और किसानों को उर्वरक आसानी से मिल सकें।

80% व 20% का था नियम, बदलाव से बढ़ी परेशान
पिछले साल तक शासन द्वारा 80% तक यूरिया सहकारिता के क्षेत्र में व 20% तक यूरिया का वितरण बाजार में विक्रेताओं को किया जाने का नियम था। सरकार ने इसी साल नीति को बदलकर उसे 55% व 45% कर दिया। ऐसे में अऋणी व डिफाल्टर किसानों को यूरिया मिलना बंद हो गया। वे बाजार से महंगा यूरिया खरीद रहे थे।

समितियों व बाजार पर नजर रखेगी टीम
जिला स्तरीय उर्वरक समिति द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि नीति में बदलाव के बाद एक टीम सोसायटियों व बाजार की दुकानों पर नजर रखेगी। सोसायटियों द्वारा अऋणी व डिफाल्टर किसानों को नगद में यूरिया नहीं देने पर यह टीम संबंधित सोसायटी पर कार्यवाही करेगी। किसान अपनी शिकायत कृषि विभाग स्थित शिकायत कंट्रोल रूम में कर सकेंगे।

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