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हादसा नहीं, हत्या है ये:नदी में ब्लास्ट से उड़ा पत्थर, टप्पर फाड़कर गिरा 12 वर्षीय बच्ची की मौत, बड़ी बहन का पैर टूटा

खंडवा18 दिन पहले
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बालिका को जिला अस्पताल लाया गया। - Dainik Bhaskar
बालिका को जिला अस्पताल लाया गया।
  • सेमलिया-राजगढ़ में भाम नदी पर निर्माणाधीन बांध में गलत तरीके से किए जा रहे विस्फोट का नतीजा

भाम-राजगढ़ मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माणाधीन बांध में रविवार दोपहर 12 बजे ब्लास्टिंग के दाैरान उड़े पत्थर पास ही बने टप्पर को फाड़ते हुए नीचे गिरे, जिससे 12 साल की बालिका की माैत हाे गई, जबकि उसकी बड़ी बहन का पैर टूट गया। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कंपनी का सुपरवाइजर घायल बहनों को इधर से उधर लेकर भटकता रहा। जिला अस्पताल लाने से पहले ही बालिका दम ताेड़ चुकी थी। जानकारी के अनुसार ग्राम सेमलिया-राजगढ़ के पास भाम नदी पर सितंबर 2017 से 228 करोड़ रुपए की लागत से बांध निर्माण कार्य चल रहा है। जिसका निर्माण सत्य लक्ष्मी इंफ्रास्ट्रक्चर इंदौर द्वारा निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। रास्ता बनाने के लिए नदी में ब्लास्ट करते ही पत्थर उड़कर टीन के टपरे को फाड़ता हुआ अंदर खेल रही बालिका सुषमा पिता जगन्नाथ युवनी (12) के दोनों पैरों पर लगा।

पास ही बैठी सुषमा की बड़ी बहन मथुरा पति चैनसिंह (30) के बायें पैर में पत्थर लगने से फ्रैक्चर हो गया। घटना के बाद दोनों बहनों को घायल अवस्था में गुड़ी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया। हालत गंभीर होने से जिला अस्पताल रैफर किया। घायल बहनों के साथ कंपनी का सुपरवाइजर अशोक बरपा भी खंडवा आया।
पुलिस केस से बचने के लिए सुपरवाइजर ने एक घंटे तक घायल बहनों को शहर के प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराने की कोशिश की। इस दौरान समय पर इलाज न मिलने से सुषमा ने दम तोड़ दिया। बालिका के पिता जगन्नाथ युवनी ने कहा कि ब्लास्ट से पहले हमें सूचना नहीं दी। नहीं तो हम वहां से पहले ही हट जाते। यह हादसा नहीं हत्या है। दोषियों पर कार्रवाई होना चाहिए। इधर पिपलौद थाना टीआई बलरामसिंह राठौड़ मामले में पीड़ित परिवार के बयान ले रहे है। देर शाम तक एफआईआर नहीं हुई।
पिता बोले- ब्लास्ट से पहले बताया होता तो हम हट जाते

बेशर्मी की हद : शर्मनाक कृत्य कर हंसता रहा सुपरवाइजर
सुपरवाइजर अशोक दबे पांव अस्पताल से भाग गया। उसे पकड़कर अस्पताल लाया गया। बालिका की मौत की जानकारी मिलने पर वह खिलखिला रहा था। विधायक राम दांगोरे ने सुपरवाइजर को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द किया। सीएसपी ललित गठरे व मोघट थाना टीआई बीएल अटोदे ने हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया।

घायल बड़ी बहन का दर्द... बेटी की तरह बहन की परवरिश की
सुषमा (मृतका) जब दूध पीती थी तब ही मां की मौत हो गई। मैंने उसे बेटी की तरह पाला। बांध निर्माण में हम लोग पानी का छिड़काव करते हैं। शनिवार दोपहर 12 बजे की बात है। भोजन करने के बाद मैं अपनी ढाई साल की बेटी नितिका को दूध पिला रही थी।

मेरे पास ही छोटी बहन सुषमा खेल रही थी। अचानक छत का टीन फाड़ते हुए पत्थर आकर पैरों में लगा। मेरे भी पैर में पत्थर लगा। हम अपने टप्पर में बैठे हुए थे। अगर सूचना दे देते तो दूर जाकर बैठते। मेरी बहन ने बहुत देर तक दम रखा। सुपरवाइजर अशोक दो घंटे तक धूप में इधर-उधर लेकर भटकता रहा।

विधायक बोले- ठेकेदारों के साथ काम कर रहे अधिकारी
एक साल पहले मैंने विधानसभा में प्रश्न उठाया था कि यहां ब्लास्टिंग मत कीजिए ये प्राकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लेकिन उसमें किसी अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया। ठेकेदार मनोज शर्मा, सुरेश चौधरी, अशोक बरपा पर अधिकारियों की मेहरबानी है। कार्रवाई नहीं हुई तो मैं धरने पर बैठूंगा। ठेकेदारों के साथ अधिकारी पार्टनर बन काम कर रहे हैं।

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