नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5:बधाई...जिले में एक हजार बेटों पर जन्म ले रही 1272 बेटियां

खंडवा2 महीने पहले
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  • जिले में 15 साल से कम आयु की जनसंख्या में आई गिरावट, 2015-16 में 30.9 प्रतिशत थी अब 26.0 पर पहुंची
  • ये बड़ा रिकॉर्ड क्योंकि...5 साल पहले खंडवा में एक हजार बेटों पर 832 बेटियां ही थी, जबकि प्रदेश में अभी एक हजार पुरुषों पर 956 बेटियां

यह सुखद खबर है कि 13 लाख की आबादी वाले खंडवा जिले में अब 1000 बेटों पर 1272 बेटियां जन्म ले रही हैं। पहले अनुपात 832 था। इसी तरह अब जिले में एक हजार पुरुषों पर 999 महिलाएं हैं, जो बराबरी से मात्र एक अंक पीछे हैं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 949 था। लिंगानुपात में आए सुधार के पीछे भ्रूण हत्या में आई कमी को मुख्य कारण माना जा रहा है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के हाल में जारी आंकड़ों से यह बात सामने आई है। जिले में 15 साल से कम आयु की जनसंख्या में गिरावट आई है। वर्ष 2015-16 में 30.9 प्रतिशत थी, जो अब 4.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ अब 26.0 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं 5 साल में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति जागरूकता आई है।

खासकर कोरोना के बाद। जिले में 38.1 फीसदी लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस कराया है, जबकि यह आंकड़ा पांच साल पहले मात्र 10.7 फीसदी था। बीमारी ने अब लोगों की सोच को बदल दिया है। परिवार के मुखिया अब अपने साथ पत्नी-बच्चों का अलग-अलग हेल्थ इंश्योरेंस करने पर जोर दे रहे हैं। सर्वे में पहली बार शुगर, बीपी, कैंसर स्क्रीनिंग और तंबाकू-शराब के सेवन काे भी शामिल किया।

यहां हमारी स्थिति सुधरी

जिले में 76.7% घरों में शौचालय
जिले में शौचालय का उपयोग 76.7 फीसदी लोग कर रहे हैं। जो पहले 36.8 प्रतिशत हुआ करता था। वहीं गैस उपभोक्ताओं की वर्तमान में संख्या 48.3 फीसदी है। यह आंकड़ा पांच साल पहले 28.0 प्रतिशत था। स्वच्छ पेयजल का आंकड़ा भी पिछले पांच साल में 78.1 से बढ़कर 88.7 पर पहुंच गया।

कारण : स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव-गांव शौचालय बने। उज्जवला योजना में मुफ्त गैस कनेक्शन बांटे गए।

15 से 19 साल की 2.8% महिलाएं गर्भवती
जिले में बाल विवाह में गिरावट आई है। पांच साल पहले सर्वे के दौरान 6.1 फीसदी महिलाएं 15 से 19 साल की उम्र वाली गर्भवती थी। अब 2.8 फीसदी है। वहीं 15 से 24 साल आयुवर्ग की किशोरियां मासिक धर्म के दौरान हाइजीन का उपयोग कर रही है। यह आंकड़ा पहले 27.2 फीसदी था जो अब 68.4 हो गया है।

कारण : जनजागरूकता से बाल विवाह पर रोक लगी है। किशोरियों में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता आई है।

बच्चों के टीकाकरण में 29.2% का इजाफा
बच्चों के टीकाकरण का प्रतिशत भी बढ़ा है। पांच साल पहले यह आंकड़ा 58.7 था जो अब 87.9 पर पहुंच गया है। वहीं संस्थागत प्रसव का आंकड़ा अब 81.8 से बढ़कर 93.2 फीसदी हो गया है। इसमें सरकारी संस्थान में प्रसव कराने वालों का आंकड़ा पांच साल में 76.4 प्रतिशत से बढ़कर 90 पर पहुंच गया है।

कारण : लोगों में जनजागरूकता से बच्चों का टीकाकरण और संस्थागत प्रसव बढ़ा।

पर यहां ठीक नहीं

बच्चे व महिलाओं में एनीमिया रोग बढ़ा
जिले में 6 से 59 महीने के बच्चों में पहले 77.0% एनीमिया पीड़ित थे, जो अब 86.8 हो गए हैं। वहीं 15 से 49 साल की सामान्य महिलाओं में यह आंकड़ा पांच साल में 58.3% से बढ़कर 66.9 पर पहुंच गया। एक घंटे के भीतर 3 साल से कम आयु के बच्चों को मां का दूध पिलाने का आंकड़ा 30.6% से 52.9 हो गया।

कारण : जिले के आदिवासी अंचल में पोषण आहार की कमी के साथ शिक्षा का अभाव।

पुरुष शुगर, महिलाएं ब्लड प्रेशर से पीड़ित
पुरुषों में शुगर लेवल 9.5 और महिलाओं में 9.0 प्रतिशत है। वहीं महिलाओं में ब्लड प्रेशर 21.3 और पुरुषों में 17.6 प्रतिशत है। जिन्हें नियंत्रित करने के लिए दवाएं लेनी पड़ रही है। इन आंकड़ों पर वर्ष 2015-16 में हेल्थ सर्वे नहीं हुआ था।

कारण : अनियमित दिनचर्या और अत्यधिक काम का दबाव होने से शुगर और बीपी की समस्या बढ़ रही है।

जिले में 44.9% पुरुष खाते हैं तंबाकू
जिले में 15 साल से अधिक आयु के 44.9 फीसदी पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि 15 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में यह आंकड़ा 6.9 फीसदी है। वहीं 15 साल से अधिक आयु के 14.8 फीसदी पुरुष और 0.4 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती है। तंबाकू और शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, यह जानते हुए भी इनका सेवन कर रहे हैं।

कारण : सामजिक बदलाव के कारण शराब पीने को एक स्टेटस सिंबल के रूप में देखा जा रहा है।

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