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कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिकों ने कहा:हल्की सिंचाई व पुराने चारे से बचा सकते हैं फसल

खंडवा25 दिन पहले
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पांच से सात दिन में बारिश नहीं होती है तो किसान जमीन में हल्की सिंचाई कर कोल्पा चला सकते हैं, खले में रखे पुराने चारे को सोयाबीन की बिजाई के बीच बिछा दें तो तेज धूप में भाप बनकर पानी उड़ेगा नहीं। यही नहीं वे पौधे के ऊपर पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव कर दें तो जमीन का वाष्पीकरण रुक जाएगा और फसल कुछ दिनों के लिए मुरझाने से बच जाएगी।

कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिकों ने किसानों को सेमिनार में बुधवार को यह सलाह दी। इस साल करीब 2.50 लाख हेक्टेयर पर खरीफ फसलों की बोवनी होनी थी। सोयाबीन का रकबा 1.50 लाख हेक्टेयर था। 20 जून तक एक बारिश के बाद किसानों ने 60% बोवनी कर दी थी लेकिन एक पखवाड़े से बारिश नहीं होने से फसलें सूखने लगी है।

जमीन का पानी भाप बनकर उड़ रहा है। अगर एक या दो दिन में बारिश नहीं हुई तो जमीन में बची नमी भी भाप बनकर उड़ जाएगी और अंकुरित फसलें सूख जाएगी। 2.50 लाख हेक्टेयर में अब तक सोयाबीन की 1 लाख हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है।

जबकि मक्का 25 हजार, कपास 25 हजार, मूंग, उड़द मिलाकर 25 हजार हेक्टेयर की बोवनी हो चुकी है। इसके अलावा उद्यानिकी फसल में मिर्च, अदरक, हल्दी व प्याज मिलाकर 25 हजार हेक्टेयर की बोवनी हो चुकी है। 50 हजार हेक्टेयर रकबा ऐसा है जिसमें किसानों ने अब तक बोवनी नहीं की है।

सोयाबीन के बीज खत्म, मक्का, उड़द व मूंग लगाएं
बीज निगम प्रबंधक अमरसिंग ने बताया हमारे पास कोई सा भी बीज उपलब्ध नहीं है। 200 क्विंटल सोयाबीन व 100 क्विंटल मक्का का बीज था। जिसे शासकीय दामों 7500 रु अाैर 4400 रु क्विंटल में बेच दिया। अब किसानों को सोयाबीन का बीज मिलना मुश्किल है। किसान मक्का, उड़द या मूंग लगा सकते हैं।

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