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खंडवा में नवजात खरीद-फरोख्त मामला:एक्सपर्ट बोले - यह अपराध मानव तस्करी से जुड़ा, जिम्मेदार डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दी न CWC को; बढ़नी चाहिए धाराएं...

सावन राजपूत/खंडवा3 महीने पहले
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मेडिकल चौराहा स्थित सोनी अस्पताल। - Dainik Bhaskar
मेडिकल चौराहा स्थित सोनी अस्पताल।

नवजात की खरीद-फरोख्त मामले में पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट तक पहुंचा दिया है। मुख्य आरोपी डॉ. सौरभ सोनी, कमलेश पटेल व संजुला पटेल को न्यायालय में पेश किया। कोर्ट ने संजुला को जेल भेज दिया, जबकि डॉ. सौरभ और मोहसिन को पुलिस रिमांड पर भेजा गया। इधर, एक्सपर्ट का कहना है कि नवजात की खरीद-फरोख्त गंभीर अपराध है। यह संगठित और बड़े स्तर का गिरोह है, जो मानव तस्करी से जुड़ा है। ऐसे मामलों में सीधे हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग करता है। प्रकरण में मानव तस्करी की धारा 370 व जेजे एक्ट की धारा 80 भी लगना चाहिए।

यह बात एक्सपर्ट राघवेंद्र कुमार पुराेहित ने भास्कर से चर्चा में कही। वे मप्र के शिवपुरी में बाल संरक्षण अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। मंदसौर में देह व्यापार और बाल विवाह के विरुद्ध मुहिम चलाने में वे चर्चा में रहे। इस काम के लिए उन्हें सीएम ने पुरुस्कृत भी किया। पुरोहित के अनुसार ऐसे प्रकरण में हो सकता है गर्भवती बालिका व उसके परिवार को कानून की जानकारी नहीं हो। यदि वह गर्भवती है तो हो सकता है बलात्कार हुआ हो या फिर सामाजिक बुराई के चलते मामले को रफा-दफा करने की मंशा हो, लेकिन एक जिम्मेदार डॉक्टर या संस्थान का दायित्व बनता है कि इस तरह का केस आने पर वह स्थानीय पुलिस या बाल कल्याण समिति को सूचना दें।

इसके उलट अवैधानिक तरीके से डिलीवरी कराना अपराध तो है, इसके साथ नवजात को बेचना मानव तस्करी की श्रेणी में आता है। हो सकता है इसके पहले भी कई मामले हो चुके हो। दूसरा, पुलिस ने पॉक्सो और जेजे एक्ट की धाराएं लगाई है, वह एकदम सही है, लेकिन जेजे एक्ट की धारा 80 को छोड़ दिया गया है। जेजे एक्ट यानी किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 80 यह कहती है कि यदि कानूनी प्रक्रिया का अनुसरण किए बिना दत्तक ग्रहण करने के प्रयोजन के लिए कोई व्यक्ति या संगठन प्रस्थापना करता है, उसे देता या प्राप्त करता है, तो संबंधित को तीन वर्ष तक का कारावास व एक लाख रुपए जुर्माने या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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स्थानीय पुलिस या फिर बाल कल्याण समिति को सूचना देना अनिवार्य

लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण कानून में दुराचार पीड़ित अवयस्क के संबंध में जानकारी प्राप्त होते ही विशेष किशोर पुलिस इकाई,बाल कल्याण समिति तथा स्थानीय पुलिस को सूचना देना अनिवार्य है। पीड़ित अवयस्क के मामले को छुपाकर, उसके नवजात को अवैध तरीके से विक्रय करना बाल तस्करी का अपराध है। यौन शोषण के फलस्वरूप गर्भवती हुई अवयस्क बालिकाओं के नवजातों को (यदि वह न अपनाना चाहे) बाल कल्याण समिति के समक्ष समर्पित करने का कानून में प्रावधान है। पीड़िता अथवा उसके परिजनों की सहमति पर भी उस बच्चे को बगैर बाल कल्याण समिति के संज्ञान लाए किसी को देना अपराध है। बच्चों को गोद लेना-देना एक वैधानिक प्रक्रिया है। उस प्रक्रिया से इतर बच्चों को गोद देना या लेना गंभीर जुर्म है। बाल देखभाल और सुरक्षा कानून अभ्यर्पित, अनाथ बच्चों को किसी भी प्रयोजन के लिए क्रय- विक्रय करना दंडनीय अपराध माना गया है।

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इधर, 4 पत्रकारों के खिलाफ अपहरण, फिरौती का प्रकरण दर्ज

डॉ. सौरभ सोनी ने कोतवाली में पत्रकार देवेंद्र जायसवाल, अजीत लाड़, जयराज उर्फ मल्ली पिल्ले और सदाकत पठान के खिलाफ धारा 341, 323, 365, 384, 385, 389 व आईपीसी 34 के तहत केस दर्ज कराया। डाॅक्टर ने बताया कि 22 जुलाई 2021 की शाम 5 बजे इन पत्रकारोें ने मेरे क्लिनिक पर काम करने वाले कमलेश पटेल के मोबाइल से फोन लगाकर मुझे रेस्ट हाउस के पास बुलाया। यहां पत्रकाराें ने मुझे गाली, गले व पीठ पर हाथ मारकर कार में बैठा लिया। मेरा मोबाइल छुड़ा लिया। कार में पहले से मेरा नौकर कमलेश और मोहसिन बैठे थे। चारों पत्रकार मुझे और मेरे दोनाें साथियों को लेकर एंजिल प्लेनेट स्कूल के पीछे ले गए। 50 लाख रुपए की डिमांड की। मना करने पर पुलिस के हवाले करने की धमकी देकर तीन से चार घंटे बंधक बनाकर रखा। इसके बाद वे चारों 20 लाख रुपए लेने के लिए राजी हो गए। मैंने 2 लाख रुपए व चेक बुक बुलवाई। 7,75,000 रुपए एवं 10 लाख रु. का चेक सिक्योरिटी के एवज में दिया।

- क्लीनिक से जब्त दस्तावेजों की जांच शुरू

कोतवाली टीआई बीएल मंडलोई ने बताया आरोपी मोहसिन ने प्राथमिक पूछताछ में बताया कि उसने बुरहानपुर की मुस्लिम दंपती से 90 हजार रुपए में नवजात को बेचने सौदा किया था, लेकिन बात मीडियाकर्मियों व पुलिस तक पहुंच जाने के कारण वे डील नहीं कर सके। पुलिस अब इस दंपती की तलाश कर रही है। इधर, पुलिस सौरभ साेनी के क्लिनिक से जब्त दस्तावेजों की जांच भी कर रही है। जिसमें नाबालिगों के प्रसव आदि की जानकारी जुटाई जा रही है।

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