सिंगाजी की समाधि पर भक्तों की भीड़:शरद पूर्णिमा पर ढाई लाख लोगों ने किए दर्शन, 462 साल में दूसरी बार नहीं लग पाया मेला

खंडवाएक महीने पहले

निमाड़ के सद्गुरु संत सिंगाजी के समाधिस्थल पर 462 साल में दूसरी बार मेला नहीं लग पाया। इसके बावजूद ढाई लाख लोगों ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर समाधि के दर्शन किए। संत सिंगाजी अपने बाल्यकाल में चरवाहे थे इसलिए मान्यता है कि घर में मवेशी बीमार हो तो सिंगाजी का नाम लेते ही स्वस्थ हो जाते हैं। यही वजह है कि भक्त शरद पूर्णिमा पर करीब 10 हजार लीटर शुद्ध देसी घी का समाधिस्थल पर चढ़ावा चढ़ाते हैं।

संत सिंगाजी समाधिस्थल चारों तरफ से इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर से घिरा हुआ है। संत सिंगाजी ने अपने गुरु की बात को सच साबित करने के लिए विक्रम संवत 1616 की श्रावण सदी 9 को स्वेच्छा से समाधि ले ली थी। तब उन्होंने जल समाधि लेने की इच्छा जताई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

इंदिरा सागर बांध बनने पर समाधि स्थल डूब क्षेत्र में आ गया। सिंगाजी समाधि स्थल के महंत रतन महाराज ने बताया इस साल संत सिंगाजी महाराज की समाधि पर कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के लिए मेले की अनुमति नहीं मिली, लेकिन दर्शन के लिए श्रद्धालु प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आए।

NHDC ने बनवाया था 25 फीट गहरा परकोटा
निमाड़ के प्रमुख संत होने और लोगों की आस्था का सम्मान करते हुए NHDC ने यहां 2001 में 9 करोड़ रुपए खर्च कर 10 मीटर चौड़ा और 25 मीटर गहरा परकोटा बनाने का काम शुरू किया। 17 साल पहले 2004 में इसका काम पूर्ण हुआ। अब सिंगाजी समाधि स्थल पर्यटन केंद्र भी बन गया है। समाधि के तीन तरफ पानी भरा हुआ है। समाधि स्थल तक पहुंचने के लिए 2.50 किलोमीटर लंबा एप्रोच रोड बनवाया गया है।

800 निशान सिंगाजी महाराज को चढ़े

  • 5000 श्रद्धालु शाम 5 बजे की आरती में शामिल हुए
  • 1.50 लाख नारियल चढ़े
  • 35 ड्रम देसी घी चढ़ाया
  • 164 दीपक दीप स्तंभ प्रज्ज्वलित किए
  • 20 जवानों ने संभाली मेले की व्यवस्था
  • 65 सेवादारों ने संभाली व्यवस्था
सिंगाजी समाधि स्थल पर दर्शन के लिए जुटे लाखों श्रद्वालु।
सिंगाजी समाधि स्थल पर दर्शन के लिए जुटे लाखों श्रद्वालु।

ड्रोन: विकास चौहान