पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

24 घंटे में 1.4 इंच बारिश:किसानों ने अब 52 हजार हेक्टेयर में लगाया मक्का, मूंग और कपास

खंडवा7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
किसानों ने अब 52 हजार हेक्टेयर में लगाया मक्का, मूंग और कपास - Dainik Bhaskar
किसानों ने अब 52 हजार हेक्टेयर में लगाया मक्का, मूंग और कपास
  • क्योंकि, कम बारिश के कारण खराब हुआ था सोयाबीन का बीज, 2.12 लाख हेक्टे. में से 1.60 लाख हेक्टे. ही बचा
  • इस साल खरीफ सीजन में 3.18 लाख हेक्टेयर में है बोवनी का लक्ष्य

जिले में पिछले 24 घंटे में ही औसत 1.4 इंच हुई। इस साल अब तक 10 इंच बारिश हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 14.1 इंच बारिश हुई थी, इस मान से अब तक 4.1 इंच बारिश कम हुई है। अब लगातार तीन दिन से रूक-रूककर हो रही बारिश से किसानों को राहत मिली है। जिन किसानों का सोयाबीन बीज खराब हो गया था अब उन्होंने खेतों में मक्का-मूंग और कपास की बोवनी की है। जिले में 2.12 लाख हेक्टेयर रकबे में किसानों ने सोयाबीन लगाया था, जिसमें से 1.60 लाख हेक्टेयर ही बचा। अब 52 हजार हेक्टेयर में खराब हुए सोयाबीन की जगह अन्य फसलों की बोवनी किसानाें ने की है।

जिले में इस साल कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के लिए 3.18 लाख हेक्टेयर में मुख्य फसल सोयाबीन काे 2.12 लाख हेक्टेयर, कपास 51 हजार हेक्टेयर, मिर्च 8 हजार हेक्टेयर, प्याज 10 हजार हेक्टेयर, मक्का 10 हजार, मूंग 5 हजार, उड़द 2 हजार, मूंगफली 2500 हेक्टेयर सहित बाकी रकबे में अन्य उद्यानिकी फसलों की बोवनी का लक्ष्य रखा था। 10 जून के बाद पहली बारिश के बाद किसानों ने बोवनी कर दी। इसके बाद 20 दिन तक बारिश नहीं होने व जमीन को पानी नहीं मिलने से 52 हजार हेक्टेयर में लगी फसलें मुरझा व खराब हो गई। बारिश की खेंच से पंधाना, छैगांवमाखन के किसानों की फसलें अधिक प्रभावित हुई। यहां के किसानों ने कलेक्टर, तहसीलदार को ज्ञापन देकर सर्वे कराने व मुआवजा राशि की मांग भी की थी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।

आंकड़ों में छैगांवमाखन के 21 गांवों के किसान प्रभावित
इन फसलों का रकबा बढ़ा

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन का रकबा 2.12 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.60 लाख हेक्टेयर हो गया। जबकि मक्का का रकबा 10 से 10 हजार हेक्टेयर, कपास 51 से 61 हजार हेक्टेयर, मूंग 5 से 10 हजार हेक्टेयर, मूंगफली 2500 से 5 हजार हेक्टेयर हो गया।

1 माह पीछे हुई फसल कम होगा उत्पादन
सोयाबीन का रकबा घटने के साथ-साथ इस साल खरीफ फसलों का उत्पादन भी कम हो जाएगा। क्योंकि दोबारा बोवनी से उपज की कटाई सितंबर की जगह अक्टूबर में होगी। सितंबर में पानी नहीं मिलने का असर फसलों पर पड़ेगा जिससे उत्पादन कम हो जाएगा।

किसान बोले- 50% रकबे में दोबारा बोवनी की
इधर किसान नेता व किसान जिले के 50% रकबे में फसलें खराब होने व दोबारा बोवनी होना बता रहे हैं। भाकिसं जिला संयोजक सुभाष पटेल ने बताया खंडवा, छैगांवमाखन, पंधाना ब्लाक में खरीफ का सर्वाधिक रकबा होता है। यहां किसानों ने 50% रकबे में दोबारा बोवनी की है। जिला प्रशासन सर्वे करने की मांग भी की थी लेकिन आज तक कोई सर्वे नहीं हुआ। किसानों ने खराब फसलें हटाकर वहां दोबारा बोवनी की।

हमारे आंकड़ों में छैगांवमाखन ब्लाक के 21 गांव प्रभावित

  • 52 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन का रकबा कम हुआ है। जबकि छैगांवमाखन ब्लाक के 21 गांव प्रभावित हुए हैं जिसमें छैगांव, भोजाखेड़ी, बरूड़, सिरसौद, मलगांव, देशगांव सहित अन्य ग्राम शामिल है जिसका रकबा 2500 हेक्टेयर है। यहां भू-राजस्व की टीम सर्वे करेगी। -आनंदसिंह सोलंकी, सहायक अधिकारी, कृषि विभाग

सर्वे का काम भू-राजस्व का

  • छैगांवमाखन ब्लाक में फसलें प्रभावित हुई हैं। यहां पर सर्वे का काम भू-राजस्व द्वारा किया जाएगा। जिले में अब तक 95% बोवनी हो चुकी है। 20% में ही दोबारा बोवनी की स्थिति बनी है। बारिश से मुरझाई फसलों को फायदा हुआ है। यहां किसान खाद का पहला छिड़काव करें, इसके बाद निंदाई, गुड़ाई कर खरपतवार निकालना चाहिए। -केसी वास्केल, प्रभारी, उपसंचालक कृषि विभाग

खबरें और भी हैं...