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  • For Treatment, MY Hospital In Indore Identified, Expert Said: Avoiding Infection Is Important To Control Sugar, Effect On Eyes, Nose And Brain; Do Not Be Afraid But Do Not Ignore The Symptoms

खंडवा में ब्लैक फंगस का खतरा:इलाज के लिए इंदौर का एमवाय अस्पताल चिन्हित, विशेषज्ञ बोले- इंफेक्शन से बचने शुगर पर कंट्रोल जरूरी, आंख, नाक और दिमाग पर असर

खंडवा/सावन राजपूतएक वर्ष पहले
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प्रदेश सहित जिले में कोरोना की रफ्तार तो कम हो रही है, पर उसके साथ नई मुसीबत ब्लैक फंगस आ गई है। यह मुसीबत लगातार बढ़ रही है। सरकारी अस्पतालों में फ्री इलाज की व्यवस्था तो है लेकिन इंजेक्शन व दवाइयों का संकट है। इधर, खंडवा सहित निमाड़ के मरीजों का इलाज इंदौर के एमवाय अस्पताल में होगा। विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी से डरे नहीं लेकिन लक्षण को नजर अंदाज न करें। शुगर को कंट्रोल में रखें। आंख, नाक व दिमाग में सामान्य असर दिखे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

खंडवा मेडिकल कॉलेज के ENT विशेषज्ञ डॉ. संजय अग्रवाल के अनुसार प्रदेश सरकार ने ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इंदौर के एमवाय अस्पताल को चिन्हित किया है। हालांकि, जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में पोस्ट कोविड वार्ड तैयार किया गया है। जहां सामान्य लक्षण दिखने पर चेकअप के लिए पेशेंट आ सकते है। यहां डॉक्टरों की पैनल फंगस की स्थिति देख पेशेंट को इंदौर के लिए रेफर करेेगी। जिले में अब तक 3 से 4 लोगों की मौत चुकी है।

डॉ. अग्रवाल का कहना है कि जब डॉट एंड कॉट हो तो अलर्ट होना चाहिए। डायबिटीज को अन कंट्रोल नहीं होने देना है। होम आइसोलेशन में ऑक्सीजन को लेकर विशेष रूप से सावधान रहना है। ह्यूमिटी फायर में पानी को प्रत्येक दिन चेंज करें तथा ऑक्सीजन के ट्यूब को भी प्रतिदिन बदलते रहें। ऑक्सीजन पाइप और पानी नहीं बदलने के कारण ही ब्लैक फंगस ग्रो कर रहा है। तीसरा खतरा ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाले मरीजों को है। होम आइसोलेशन में कॉटिको स्टेरॉयड कम मात्रा में ले रहे लोग तो सुरक्षित हैं, लेकिन जो हाई डोज की इंजेक्टेबल ले रहे हैं तो उन लोगों में ब्लैक फंगस अधिक होने का खतरा है।

भास्कर एक्सपर्ट व्यू : डॉ. संजय अग्रवाल से सवाल-जवाब

डॉ. संजय अग्रवाल
डॉ. संजय अग्रवाल

Q. मध्यप्रदेश खासकर कौन सा फंगस मिल रहा है?

जवाब: प्रदेश में म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) मिला है। ब्लैक फंगस की धमनियों में यह फंगस जम जाता है। यह गैंगरीन जैसी बन जाती है। हडि्डयां तक सड़ जाती हैं।

Q. एक साल बाद अचानक यह फंगस कैसे फैला, पहली लहर में तो नहीं था?

जवाब : अधिकतर यह ऐसे कोविड संक्रमितों में मिला है, जो शुगर और किडनी और कैंसर बीमारी से पीड़ित थे या फिर कोविड इलाज के दौरान उन्हें स्टेराॅइड इंजेक्शन लगा हो। दूसरी लहर में इस इंजेक्शन का प्रयोग अधिक हुआ। कोविड के बाद शरीर काफी कमजोर हो जाता है। इस बार डबल म्यूटेंट वाला कोविड था। हालांकि कारणों पर अभी रिसर्च चल रहा है।

Q. यदि कोविड पेशेंट्स हैं तो ही यह हो रहा है या सामान्य पेशेंट्स भी चपेट में आए हैं?

जवाब : नहीं यह हर किसी को तो नहीं हो रहा है। अभी जो देखने में आया है, यह उन्हीं लोगों को हो रहा है, जो कोविड पॉजिटिव निकले थे। अस्पताल में लंबे समय से तक ऑक्सीजन पर भर्ती रहे थे। साथ ही, उस समय इन्हें इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन दी गई थी। ऐसे कोविड पेशेंट जो पहले से किसी गंभीर बीमारी जिसमें शुगर, हाई बीपी व अन्य बीमारी से पीड़ित थे, उनको यह ब्लैक फंगस होने की संभावना 80 फीसदी हो जाती है। क्योंकि ऐसे पेशेंट की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

Q. यह फंगस मरीज को किस तरह से प्रभावित करता है? इसके लक्षण क्या हैं?

जवाब : जब यह नाक की झिल्ली के भीतर जाता है, तो वहां पर सूजन आ जाती है। ऐसे में एक तरफ की नाक बंद भी हो सकती है। नाक बंद होने से आवाज में बदलाव दिखेगा। एक तरफ सिर पर भारीपन बना रहता है। अगर यह सिर से आंखों में पहुंच जाए, तो आंखों में सूजन आ जाती है। सिर दर्द रहता है। यदि आंखों में ज्यादा सूजन आती है, तो आंख अपनी जगह से बाहर आने लगती है। आंख के बाहर आने से देखने में परेशानी होती है। आंखें लाल होने साथ ही कभी-कभी दिखाई देना भी बंद हो जाता है। इसके लक्षण काफी गंभीर रहते हैं।

Q. कोविड से ठीक होने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब : कोविड के बाद आंख, चेहरे को लगातार साफ रखें। ब्लड में शुगर की मात्रा न बढ़ने दें, हायपर ग्लाइसेमिया से बचें। कोविड से ठीक हुए पेशेंट ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें, जांच कराते रहें। स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का नियंत्रण का ख्याल रखें। इससे बचने के लिए जरूरी है कि नाक और मुंह का हाइजीन का ध्यान रखना है। गंदगी वाली जगह पर नहीं जाना है। मास्क जरूर लगाना है। एंटी बायोटिक और एंटी फंगल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के परामर्श पर ही करें।

Q. बिहार में सफेद फंगस का भी पता चला है, वो क्या है और इससे किस तरह अलग है?

जवाब : सफेद वाले की तुलना में ब्लैक फंगस अधिक एग्रेसिव होता है। यह ब्लड के जरिए फैलता है। एक से दूसरे अंग में तेजी से फैलता है। ब्रेन में पहुंचने के बाद मरीज की जान बचाना मुश्किल है। जबकि सफेद फंगस कम घातक होता है। यह ब्रेन में नहीं पहुंचता है। जहां से शुरू होता है, उसी के आसपास के अंगों को सड़ाते हुए आगे बढ़ता है।

Q. कोविड लोगों में हाथ मिलाने, छींकने से फैल रहा है। फंगस भी फैलता है?

जवाब : ब्लैक फंगस कोविड की तरह वायरल डिसीज नहीं है, इसलिए यह हाथ मिलाने, छूने या छींकने से नहीं फैलता है। हां पर यह कोविड पेशेंट को ही हो रहा है, इसलिए सोशल डिस्टेंस रखें तो अच्छा रहेगा। भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें। ऐसे व्यक्ति से मिलते समय मास्क भी पहनकर रहें।

Q. हमारे यहां फंगस के इलाज के लिए क्या-क्या सुविधा है, जैसे कोविड सेंटर बने हैं, क्या इसके लिए भी अलग से कुछ सुविधा है?

जवाब : इसका इलाज सरकार ने फ्री करने की घोषणा की है। खंडवा सहित निमाड़ क्षेत्र के मरीजों के लिए इंदौर के एमवाय अस्पताल में विशेष वार्ड बनाए गए हैं। खंडवा में मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों की निगरानी में जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में पोस्ट कोविड वार्ड बनाया गया है। जहां मरीजों की पहचान की जाती है।

Q. ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज को ठीक होने में कितना समय लगता है?

जवाब : यह कैंसर से भी घातक है। इसमें डेथ रेट अधिक है। खासकर फंगस दिमाग में पहुंच गया तो मरीज का बचना मुश्किल है। इलाज 15 दिन से डेढ़ महीने तक चलता है। इसके बाद ही फिर जांच करनी पड़ती है। तब पता चलेगा कि मरीज पूरी से ठीक हुआ या अभी उसे और इलाज की जरूरत है।

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