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इलाज के नाम पर मलहम-पट्‌टी:मेडिकल कॉलेज में एनेस्थीसिया के चार डॉक्टर छुट्‌टी पर, जिला अस्पताल में नहीं हो रहे ऑपरेशन

खंडवा11 दिन पहले
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  • दुर्घटना के बाद सिर्फ मलहम-पट्‌टी, ऑपरेशन के इंतजार में तड़प रहे मरीज क्योंकि एनेस्थीसिया का एक मात्र कार्यरत डॉक्टर की कोरोना वार्ड में लगी ड्यूटी

सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीज जिला अस्पताल में दर्द से तड़प रहे हैं। दुर्घटना के बाद इमरजेंसी कक्ष में मरहम-पट्‌टी बांधी गई है उसे 15 दिन हो गए। डॉक्टर ने फ्रेक्चर व ऑपरेशन करना बताया है, लेकिन यह कब होगा, कुछ पता नहीं। ऐसे में दर्द की इंतेहा बढ़ रही है। मरीजों का सब्र जवाब देने लगा। ये वाे लोग है जो जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर भरोसा कर भर्ती तो हो गए, लेकिन अब खुद पछता रहे हैं। नियमानुसार फ्रेक्चर मरीजों का ऑपरेशन दुर्घटना एक-दो रोज बाद हाे जाना चाहिए। नहीं तो संक्रमण का खतरा रहता है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं है। सिर्फ एनेस्थीसिया डॉक्टर की वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है।

वह भी इसलिए कि एक साथ चार एनेस्थीसिया छुट्‌टी पर चले गए। जबकि एक की ड्यूटी कोविड वार्ड में है। मेडिकल काॅलेज और जिला अस्पताल प्रबंधन के समन्वय न होने से व्यवस्था बिगड़ गई है। इस मामले को लेकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन व मेडिकल कॉलेज के डीन दोनों एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराकर जिम्मेदारी से बच रहे है। डीन का कहना है कि यह जिम्मेदारी सिविल सर्जन की है। जबकि सिविल सर्जन को पता ही नहीं है चार डॉक्टर उनकी अनुमित के बगैर छुट्‌टी पर चले गए है।

शहर के प्रायवेट अस्पतालों में रोज हो रहे ऑपरेशन

जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के 80 फीसदी डॉक्टर शहर के प्रायवेट अस्पतालों में ऑपरेशन कर रहे हैं। अगर वे चाहें तो जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के ऑपरेशन के लिए एनेस्थेसिया को उपलब्ध करवा सकते हैं। रोगी कल्याण समिति द्वारा एनेस्थीसिया की फीस दी जाती है। कई डॉक्टर तो मरीज को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में ले जाते हैं और कई निजी में फीस लेकर सरकारी में ऑपरेशन कर देते हैं।

नियम यह है

अगर जिला अस्पताल में किसी कारणवश एनेस्थीसिया नहीं है तो बाहर से बुला सकते है, रोगी कल्याण समिति प्रत्येक ऑपरेशन पर 1500-2000 रुपए तक अस्पताल प्रबंधन दे सकता है। अस्पताल में तीन एनेस्थेसिया पहले से पदस्थ है।

यह बाेले जिम्मेदार अफसर

एनेस्थीसिया की व्यवस्था के लिए सीएमएचओ को पत्र लिखा है। आउटसोर्स से व्यवस्था की जाएगी। मेडिकल लीव व इमरजेंसी में एनेस्थीसिया छुट्‌टी पर चले गए है। बाहर से बुलाने की व्यवस्था सिविल सर्जन को करना रहती है। हमारे मेडिकल कॉलेज में कोई प्रावधान नहीं है।
-डॉ. अनंत पंवार, डीन मेडिकल कॉलेज

हमारे पास पहले से ही 5 एनेस्थीसिया है। बाहर से बुलाने पर वह एक ही सवाल करते है आपके कहा गए। एनेस्थीसिया छुट्‌टी पर है यह बात मुझे कल ही पता चली। फिर भी हम मरीजों को किसी तरह से परेशान नहीं होने देंगे। जल्द ही यह व्यवस्था करवाएंगे।
-डॉ. ओपी जुगतावत, सिविल सर्जन व प्रबंधक मेडिकल कॉलेज

दो फेक्ल्टी है दो रेजीडेंट हैं। इनमें से एक मेटरनिटी लीव पर हैं व एक आकस्मिक अवकाश पर है। एक का फ्रेक्चर हो गया है व एक कार्यरत है। डॉ. भूपेंद्र चौहान की ड्यूटी कोविड में चल रही है। जो कि शनिवार को पूरी हो चुकी है। सोमवार को उनका साप्ताहिक अवकाश होगा। इस मामले को लेकर हमने सीएमएचओ को पत्र लिखा है। जितना जल्द हो सके समस्या का समाधान करेंगे।
-डॉ. सुनील बाजोलिया, सहायक प्राध्यापक, ईएनटी, मेडिकल कॉलेज

भास्कर ने किया रियलिटी चैक

केस 1 : पट्‌टी बांधने के बाद कोई पूछने नहीं आया

घर में काम करते समय गिर गया था। तब से दायां पैर नहीं उठ रहा है। यहां बताने पर डॉक्टर बोले पैर की हड्‌डी टूट गई है। ऑपरेशन करना होगा। भर्ती हुए 13 दिन हो गए। मरहम-पट्‌टी के बाद कोई पूछने नहीं आया। ऑपरेशन कब होगा पता नहीं। दर्द से परेशान हूं। इतना पैसा भी नहीं कि निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवा सकू।
-मीत कैलाश सिचिया, मरीज

केस 2 : बर्दाश्त से बाहर हो गया था दर्द

2 अक्टूबर को बाइक को कार ने टक्कर मार दी थी। बायां पैर फ्रेक्चर होने के बाद से यहां भर्ती हूं। मरहम-पट्‌टी बंधी है। 4 दिन हो गए दर्द की गोलियां भी खत्म हो गई। ऑपरेशन के लिए आज-कल कहते हैं। ऑपरेशन क्यों नहीं हो रहा, या कब होगा बताने वाला कोई नहीं। 1-2 रोज और देखते हैं। नहीं तो कर्जा लेकर निजी में ऑपरेशन करवाएंगे।
-अंकित संजय राव, ग्राम पोखर

केस 3 : इलाज के नाम पर सिर्फ पट्‌टी बांधी

हरसूद रोड पर पेठिया के पास 11 अक्टूबर को मैं व मेरा दोस्त बाइक से जा रहे थे। कार चालक ने टक्कर मार दी। साथी की मौत हो गई। मेरा पैर टूट गया। दर्द से परेशान हूं। अस्पताल में कोई सुनने वाला नहीं है। 1-1 गोली सुबह-शाम लो और चुपचाप पलंग पर पड़े रहो। मजदूरी करता हूं। इसलिए इलाज के लिए यहां आना पड़ा। यहां पट्‌टी बदलने के अलावा दूसरा इलाज नहीं हो रहा।
-सोनू कालू चाकरे, दादाजी वार्ड

केस 4 : 16 दिन बाद भी नहीं हुआ ऑपरेशन

2-3 अक्टूबर की रात सिनेमा चौक में बदमाशों ने मारपीट की और हाथ-पैर तोड़ दिए। न तो अब तक बदमाशों को पुलिस पकड़ पाई और न मेरा इलाज हो पाया। यहां भर्ती हुए 16 दिन हो गए। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने के लिए 2 दिन का बोला था। अब मुझे डर है कि जख्मों से कहीं संक्रमण न फैल जाए। आज ही प्रायवेट अस्पताल में ऑपरेशन की बात की है।
-विशाल बसंतानी, सिंधी कॉलोनी

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