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विश्व हृदय दिवस आज:ढाई साल में 73 बच्चों के हृदय के निशुल्क हो चुके ऑपरेशन, 2021-22 में जिले में हृदय रोग से पीड़ित 0 से 18 साल के 38 बच्चे चिह्नित

खंडवा2 महीने पहले
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इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में 24 सितंबर को सेगवाल की दिव्या पिता उमराव का ऑपरेशन हुआ। - Dainik Bhaskar
इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में 24 सितंबर को सेगवाल की दिव्या पिता उमराव का ऑपरेशन हुआ।

विश्व हृदय दिवस 29 सितंबर को मनाया जाएगा। जिले की बात करें तो हृदय रोग से पीड़ित मरीजों में अब बड़ों के साथ ही बच्चों की संख्या भी तेजी से सामने आ रही है। जिले में 2021-22 में हृदय रोग से पीड़ित 38 बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत चिन्हित किया गया। इसमें अब तक 14 बच्चों का ऑपरेशन हो चुका है। वहीं बाकी बचे 24 बच्चों के इलाज के लिए राशि जारी हो चुकी है। इन मरीजों की 20 दिन के भीतर सर्जरी हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक पिछले ढ़ाई साल में योजना के तहत 73 बच्चों के हृदय का इलाज हो चुका है। आरबीएसके जिला समन्वय महेश पवार ने बताया कार्यक्रम के तहत हर दिन 0 से लेकर 18 साल आयुवर्ग के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जाता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019-2020 में 34, 2020-2021 में 25 और 2021-2021 में 1 अप्रैल से लेकर अबतक 14 बच्चों के हृदय की सर्जरी हो चुकी है। विभाग के पास बच्चों के इलाज के कोई भी प्रकरण लंबित नहीं है।

शिविर: विश्व हृदय दिवस पर जिला अस्पताल में शिविर आज, मरीजों की होगी जांच

विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को जिला अस्पताल में हृदय रोगियों के इलाज के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया है। ए ब्लॉक के कक्ष क्रमांक 17 एवं 18 में मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ के डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जांच कर सलाह दी जाएगी। जिला अस्पताल की तरह ही जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सिविल अस्पताल में भी हृदय रोग की जांच एवं इलाज किया जाएगा।

सलाह: हृदय रोग का मुख्य कारण अनियमित दिनदचर्या, तनाव और नशा

सीएमएचओ डॉ.डीएस चौहान ने बताया वर्तमान जीवन शैली में हृदय रोग का जोखिम बढ़ गया है,। इससे बचाव के लिए लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए। किसी व्यक्ति के सीने में दर्द, दबाव या शारीरिक श्रम के बाद अपच का आभास होता हो, कन्धे या हाथ में दर्द या दबाव, जबड़ों में अकारण दर्द, परिश्रम के बाद सांस में तकलीफ, सीढ़ी चढ़ने पर सांस फूलना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे तो बगैर देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए।

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