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ग्राउंड रिपोर्टजिनसे शिवराज मिले, राहुल भी मिलेंगे, वे बदहाल:टंट्या मामा के वंशज बोले-न पक्का मकान मिला, न गैस कनेक्शन

सावन राजपूत / खंडवा2 महीने पहले

राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान टंट्या भील के वंशजों से भी मिलेंगे। वह खंडवा के बड़ौदा-अहीर में टंट्या भील की जन्मस्थली भी जाएंगे। दैनिक भास्कर ने टंट्या भील के वंशजों से बात की तो वे सरकार से नाराज नजर आए।

बातचीत में उन्होंने बताया, नेता हमारे घर आते हैं, कहते हैं आप टंट्या मामा के वंशज हो, हम आपका सम्मान करेंगे। हम लोग जाते हैं और वो हमें मंच पर बैठाते हैं। वादा करते हैं कि आपकी मदद करेंगे। अब तक ऐसे कई वादे हो चुके हैं, लेकिन निभाया किसी ने भी नहीं। ये घर की छत देख रहे हो, कभी भी गिर सकती है। बारिश में इससे पानी टपकता है। सरकार ने आजतक रत्तीभर भी मदद नहीं दी। चूल्हे पर खाना पकाते हैं। शौच के लिए बाहर जाते हैं। हमारे पास खेती के लिए जमीन थी, जिसे टंट्या मामा के स्मारक के लिए दान में दे दिया। अब मजदूरी कर जैसे-तैसे गुजर बसर कर रहे हैं।

इससे पहले भाजपा सरकार ने टंट्या भील के वंशजों को बुलाकर उनका सम्मान किया था और वादे किए थे। दैनिक भास्कर की विशेष रिपोर्ट-

राहुल के साथ मंच पर बैठेंगे टंट्या मामा के वंशज
भारत जोड़ो यात्रा का पड़ाव टंट्या भील की जन्मस्थली पर भी रहेगा। टंट्या स्मारक पर जाकर वे माल्यार्पण करेंगे। इसके बाद स्मारक स्थल के पास ही उनकी जनसभा होगी। सभा के लिए एक खेत में सारी तैयारियां की गई हैं। यहां कांग्रेस के 30 आदिवासी विधायक और उनके क्षेत्र के लोग शामिल होंगे। जिस मंच से राहुल गांधी भाषण देंगे, उस पर टंट्या मामा के वंशजों को भी बैठाया जाएगा। इसके लिए उन्हें निमंत्रण देकर आधारकार्ड व दस्तावेज भी लिए गए हैं, ताकि सभा से मंच तक पहुंचने के लिए सुरक्षा जांच के दौरान वंशजों को किसी तरह की दिक्कत न हो।

टंट्या भील के वंशज आज भी चूल्हा जलाकर अपना खाना पकाते हैं। उज्ज्वला योजना का लाभ आज तक नहीं मिला है।
टंट्या भील के वंशज आज भी चूल्हा जलाकर अपना खाना पकाते हैं। उज्ज्वला योजना का लाभ आज तक नहीं मिला है।

गांव वाले ताने मारते हैं कि तुम मंत्रियों के पास जाते हो मिलता क्या है
टंट्या भील के वंशज यानी जयसिंह की बहू उषाबाई बताती है कि वह आठवीं तक पढ़ी हैं। घर में शौचालय तक नहीं है, शौच के लिए दूर खेतों में जाना पड़ता है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ तक नहीं मिला। कच्चे और टूटे-फूटे मकान में रह रहे हैं। रोजगार नहीं है हम खेत में मजदूरी करके पेट पालते हैं। हमारे पास खेती के लिए जमीन नहीं है। जो जमीन थी वो हमारे ससुर ने टंट्या भील के मंदिर (स्मारक) के लिए दान दे दी। नेता आकर चले जाते हैं, वो मंच से सम्मान तो कर देते हैं, लेकिन मदद कुछ नहीं करते। सम्मान के रूप में हम इस अपमान के घूंट को पी रहे हैं। गांववाले ताना मारते हैं कि तुम मंत्री-मुख्यमंत्री के पास जाते हो, लेकिन तुम्हें आज तक मिला क्या है? उषाबाई के पति दिलीप बेलदारी करते हैं।

इस घर और आंगन को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जननायक के वंशज किस हाल में जी रहे हैं। वहीं नेता लोग आदिवासी वोटों के लिए इस परिवार को कभी भी मंच पर अपने साथ बैठा लेते हैं। इसके बाद वे भूल जाते हैं कि इनकी मदद भी करना है।
इस घर और आंगन को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जननायक के वंशज किस हाल में जी रहे हैं। वहीं नेता लोग आदिवासी वोटों के लिए इस परिवार को कभी भी मंच पर अपने साथ बैठा लेते हैं। इसके बाद वे भूल जाते हैं कि इनकी मदद भी करना है।

शिवराज काे बताया तब जाकर मिला खाना पकाने काम
65 वर्षीय सोनाबाई के पति जयसिंह ने ही स्मारक बनाने के लिए 2010 में जमीन दान दी थी। सोनाबाई के पास कोई काम नहीं था। बढ़ती उम्र के बीच सोनाबाई मजदूरी नहीं कर सकती थीं। वह बताती हैं कि काम के लिए अफसर-नेताओं के सामने हाथ फैलाए, फिर एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह को बताया कि कुछ काम दिलवाओ। कुछ दिनों बाद टंट्या मामा की स्मारक में छात्रावास संचालित हुआ तो यहां खाना पकाने का काम मिला। 6 हजार रुपए महीने के हिसाब से मानदेय मिलता है। पास में ही घर है, जो कच्चा है। एक बेटा मिथेन मेरे पास रहता है, दूसरा जितेंद्र गांव में अंदर रहता है। जितेंद्र लोगों के यहां खेतों में मजदूरी करता है। मिथेन काे पंधाना के हॉस्टल में चपरासी का काम मिला है।

2021 में यहीं से निकली थी जनजाति गौरव यात्रा
मध्यप्रदेश की सियासत में आदिवासी समाज का अहम योगदान रहा है। 2018 में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार बनाने में आदिवासियों की भूमिका थी। कई आदिवासी सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जो कि भाजपा के खाते में हुआ करती थी। यही वजह है कि कमलनाथ सरकार गिरने के बाद वापस सत्ता में आई शिवराज सरकार ने अपनी चुनावी रणनीति आदिवासियों पर केंद्रित कर दी। नवंबर 2021 में जनजाति गौरव यात्रा का आगाज टंट्या भील की जन्मस्थली से ही किया। उनकी कर्मस्थली पर पातालपानी रेलवे स्टेशन का नामकरण भी टंट्या भील के नाम पर किया गया।

अब दोबारा जनजाति गौरव यात्रा निकाली जा रही है। 20 नवंबर को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कुक्षी के डही से इसकी शुरुआत कर दी है। 23 नवंबर को यात्रा टंट्या भील की जन्मस्थली पर पहुंची। 4 दिसंबर को इंदौर के भंवरकुआं चौराहा पर टंट्या मामा की प्रतिमा का मुख्यमंत्री चौहान अनावरण करेंगे। समापन पर इंदौर के नेहरू स्टेडियम में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके अलावा भी शिवराज सरकार ने जनजाति गौरव के नाम पर ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल में बड़े आयोजन किए है। जिनकी अध्यक्षता राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कर चुके हैं।

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स्थानीय भाजपा विधायक कहते हैं कि टंट्या मामा के वंशजों को इसलिए सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा, क्योंकि हो सकता है वो नियमों से बाहर होंगे।
स्थानीय भाजपा विधायक कहते हैं कि टंट्या मामा के वंशजों को इसलिए सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा, क्योंकि हो सकता है वो नियमों से बाहर होंगे।

विधायक बोले- नियमानुसार ही मिलेगा लाभ
आदिवासी सीट पंधाना से भाजपा समर्थित विधायक राम दांगोरे का कहना है कि टंट्या मामा के वंशजों में करीब 15 परिवार हैं। हर एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं दिला सकता। सोनाबाई को छात्रावास में भोजन बनाने और उनके लड़के मिथेन को एक अन्य छात्रावास में नौकरी दी है। दोनों को 8-8 हजार रुपए मिलते हैं। सोनाबाई को मैं खुद अपने वेतन से 3 हजार रुपए महीने की आर्थिक सहायता देता हूं। रही बात स्मारक के निर्माण के लिए जमीन दान देने की तो उस समय मैं विधायक नहीं था, लेकिन जहां तक मुझे पता है कि सड़क किनारे कोई जमीन नहीं दे रहा था तो उन्होंने आगे आकर जमीन दान दी थी। इसके एवज में सरकार ने आर्थिक सहायता भी दी थी। अब कुछ परिवारों को सरकारी आवास या शौचालय योजना का लाभ नहीं मिला है, तो वो नियम से बाहर होंगे। नियम में होगा तो जरूर लाभ मिलेगा, अन्यथा ऐसे तो मैं अपने रिश्तेदारों को भी लाभ दूं।