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खसरे पर संपत्ति के मालिक की होगी अपनी आईडी:हर साल अप्रैल में किसानों की जमीन के हिसाब से खसरे में बदलाव होगा, तुरंत मिलेेगी जानकारी

खंडवा6 महीने पहले
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किसानों को उनकी जमीन के खसरे में कुछ बदलाव दिखेगा। क्याेंकि अब हर साल अप्रैल में किसानों की मौजूदा जमीन के हिसाब से खसरे में बदलाव हाेता रहेगा। खसरे पर किसान की अपनी आईडी रहेगी, जिसे पोर्टल पर दर्ज करते ही उसे अपनी पूरी जमीन की जानकारी मिल जाएगी।

किसानों की जरूरत को देखते हुए भू-अभिलेख विभाग ने बरसों पुरानी व्यवस्था को बदला है। भू-सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख नियम 2020 के आधार पर ही सालों पुराने भू-अभिलेख के प्रारूप में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है।

खसरे में कॉलम तो पहले की तरह 12 ही रखे गए हैं, लेकिन किसान की जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव हुआ है। अब हर किसान को आधार की तरह यूनिक आईडी मिलेगी। जिसकी मदद से वह अपने नाम पर दर्ज सारी संपत्ति की जानकारी एक ही क्लिक पर पता कर सकेगा।

ऐसे समझें खसरे में हुए बदलाव को

पहले : खसरे के कॉलम नंबर-1 में सिर्फ सर्वे नंबर से जुड़ी संख्या अंकित होती थी।
अब- जमीन के हर भाग को एक यूनिक आईडी मिलेगी, यह सिस्टम से जनरेट होगी।

पहले- कॉलम नंबर-2 में क्षेत्रफल, खाते से बाहर जमीन का वर्णन होता था।
अब- भूमि उपयोग का रूप दर्ज होगा जैसे कृषि, अन्य या आवासीय। इन्हें कैटेगरी में बांटा जाएगा।

पहले- कॉलम 3 में कब्जेधारी, निवास, मालिक और लगान की डिटेल होती थी।
अब- प्लॉट का नंबर होगा। ऐसा कृषि भूमि के अलावा उपयोग पर किया जाएगा।

पहले- कॉलम नंबर-4 में पट्‌टे की रकम और उप पट्‌टे के भाग का क्षेत्रफल रहता था।
अब- क्षेत्रफल, भूमि का उपयोग, भू भाटक लिखा जाएगा। कृषि भूमि हेक्टेयर में और आवासीय वर्गमीटर में लिखी जाएगी।

पहले- कॉलम 5 में फसल की डिटेल रहती थी।
अब- भूमि स्वामी का पता, उसके परिवार व जमीन सरकारी है या नहीं यह लिखा जाएगा।

पहले- कॉलम-6 में क्षेत्रफल और 7 में दो फसली क्षेत्रफल तथा 8 में चालू वर्ष की पड़त रहती थी।
अब- कॉलम-6 में हर भूमि स्वामी का अंश, कॉलम-7 में पट्‌टेधारी की डिटेल तथा 8 नंबर कॉलम में आधिकारिक किसान का नाम।

पहले- कॉलम नंबर-11 में खाते के बाहर की फसल, क्षेत्रफल और 12 में कैफियत होती थी।
अब- कॉलम-10 में फसल खरीफ, रबी या अन्य की कैटेगरी और कॉलम-12 में जमीन पर कुएं-पेड़ व अन्य संरचना, सिंचाई के साधन लिखे जाएंगे।

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