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धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम:प्रदेश में इंदौर-खंडवा में सबसे ज्यादा लव जेहाद; छोटे शहरों में आदिवासी ​​​​​​​युवतियां और बड़े शहरों में कॉलेज छात्राएं शिकार

खंडवा10 महीने पहलेलेखक: मनीष पाराशर
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आदिवासी युवतियां इसलिए टारगेट पर क्योंकि वे किसी भी जाति के युवक से शादी करें लेकिन आरक्षण का लाभ समाप्त नहीं होता, जबकि एससी की लड़की का आरक्षण खत्म हो जाता है। - Dainik Bhaskar
आदिवासी युवतियां इसलिए टारगेट पर क्योंकि वे किसी भी जाति के युवक से शादी करें लेकिन आरक्षण का लाभ समाप्त नहीं होता, जबकि एससी की लड़की का आरक्षण खत्म हो जाता है।

प्रदेश में लव जिहाद के सबसे ज्यादा मामले इंदौर और खंडवा में सामने आए हैं। छोटे शहरों में लव जिहाद की सबसे ज्यादा शिकार आदिवासी युवतियां हुई हैं। इनमें आठवीं-दसवीं तक पढ़ी हुई नाबालिग लड़कियां ज्यादा हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर सक्रियता थी। जबकि भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहरों में कॉलेज की छात्राएं और जॉब करने वाली युवतियां शिकार हुई हैं।

पीड़ित युवतियों का आरोप है कि साेशल मीडिया पर मुस्लिम लड़कों ने हिंदू बनकर (पहचान छुपाकर) दोस्ती की। इसके बाद उन्हें शादी का झांसा दिया गया। जब युवतियां इनके झांसे में आ गईं तो शर्त रख दी कि धर्म परिवर्तन करोगी तो ही शादी होगी। बात इतनी आगे बढ़ने पर हकीकत पता चली और युवतियों ने पुलिस की शरण ली।

धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम पारित होने के एक साल में प्रदेश में अब तक ऐसे मामलों में 67 केस दर्ज हुए हैं। इनमें से 24 मामले इसी साल जनवरी में दर्ज हुए। इनमें 36 मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, जबकि 29 की जांच अभी चल रही है। पुलिस ने इन मामलों में 109 आरोपी बनाए हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा इंदौर में 13 मामले दर्ज किए गए जबकि खंडवा में 11 केस दर्ज हुए। तीसरे स्थान पर भोपाल में 9 लड़कियों से धोखा हुआ।

भोपाल-इंदौर पुलिस से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां के केसों में 50 प्रतिशत सामान्य वर्ग की युवतियां शामिल हैं। भोपाल के टीलाजमालपुरा, कोहेफिजा, कमलानगर और अशोका गार्डन में सामान्य वर्ग की युवतियाें ने केस दर्ज करवाया है। इधर, इंदौर के कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि लगभग 13 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें सामान्य के अलावा ओबीसी और अन्य वर्ग की पीड़िताएं हैं। उधर, दूसरी ओर, खंडवा, उज्जैन, धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, रीवा जिलों में 95 प्रतिशत मामलों में आदिवासी युवतियों को शिकार बनाया गया।

पहचान छुपाकर दोस्ती, शादी के पहले धर्म बदलने की शर्त

इंदौर-भोपाल के 15 मामलों की स्टडी करने पर सामने आया कि सोशल मीडिया पर हिंदू लड़के के नाम की प्रोफाइल बनाकर मुस्लिम लड़कों ने दोस्ती कर उनका भरोसा जीता। फिर, शादी का झांसा देकर अपने पास बुलाया। यहां पर शादी के लिए शर्त रख दी कि पहले धर्म परिवर्तन करो तब शादी होगी। धर्म परिवर्तन की बात पता लगने पर लड़के के मुस्लिम होने की बात पता चली। इसी तरह की स्थिति अन्य जिलों में बनी।

शादी को शून्य करने के लिए राज्य सरकार ने बनाया कानून

धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा में 8 मार्च को ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2021’ पारित किया गया था। राज्यपाल की अनुमति के बाद मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में यह अधिनियम 27 मार्च 2021 को प्रकाशित हो गया है। इसका उद्देश्य दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन करवाकर शादी करना है। ऐसी शादी को शून्य करने के लिए कानून लाया गया है।

लव जिहाद का ये भी बड़ा कारण

प्रदेश के आदिम जाति मंत्रणा परिषद के सदस्य व पंधाना विधायक राम दांगोरे ने बताया कि आदिवासी युवती यदि किसी अन्य समाज के लड़के से शादी कर लेती है तो उसको सरकार से मिलने वाले लाभ और आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ता। जबकि एससी की युवती किसी अन्य समाज के व्यक्ति से शादी करती है तो उसका आरक्षण समाप्त हो जाता है। इसलिए आदिवासी युवतियों को टारगेट किया जा रहा है। 15 ऐसे मामले हैं, जिनमें मुस्लिम लड़कों ने आदिवासी युवतियों से शादी की और उनके नाम पर जमीन, सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।

जांच के बाद ही केस दर्ज

ब से अधिनियम बना है तब से शहर में करीब 13 अपराध दर्ज हुए हैं। इन सभी मामलों में लड़कियों ने बयान दिए थे कि उन पर धर्म परिवर्तन करने का दबाब बनाया गया था। बयान के सत्यापन के बाद ही केस दर्ज किए।
- हरिनारायणचारी मिश्र, पुलिस कमिश्नर इंदौर

पीड़िता के बयान के आधार पर ही केस दर्ज किया जाता है। यदि, वह अपने बयान में जिक्र करती है कि दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था तो फिर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच की जाती है। इस अधिनियम के अधीन दर्ज अपराध की जांच एसआई या आला अधिकारियों द्वारा होती है। एसपी विवेक सिंह, खंडवा एसपी