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जिरोती त्योहार मनाएंगे आज:जिरोती भित्ति चित्रकला की जगह कागज पर चित्रों ने ली, शहर में भित्ति चित्रकला सीमित घरों में ही नजर आएंगी

खंडवा2 महीने पहले
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त्योहार के एक दिन पहले कालमुखी गांव में रेखा सूर्यवंशी ने अपने घर में गेरू और रंग-बिरंगी चाॅक मिट्‌टी से बनाई जिरोती माता। - Dainik Bhaskar
त्योहार के एक दिन पहले कालमुखी गांव में रेखा सूर्यवंशी ने अपने घर में गेरू और रंग-बिरंगी चाॅक मिट्‌टी से बनाई जिरोती माता।

नई पीढ़ी को निमाड़ी संस्कृति दिखाने वाली जिरोती भित्ति चित्रकला की जगह अब कागज पर छपे हुए चित्रों ने ले ली है। हरियाली अमावस्या के दिन मनाया जाने वाले जिरोती के त्योहार के पहले ही घरों में दरवाजे के दोनों तरफ लोक चित्रकला जिरोती के भित्ति चित्र पीढ़ियों से बनाए जाते रहे हैं। इन्हीं लोक चित्रों का पूजन कर त्योहार मनाया जाता रहा है। जिले में इस बार रविवार को जिरोती का त्योहार मनाया जाएगा।

समय के साथ ही त्योहार मनाने का तरीका भी बदल गया है। पहले हर घर की दीवार पर महिलाएं एक दिन पहले ही जिरोती माता के चित्र बनाते नजर आती थीं। अब इस तरह के दृश्य गांवों में ही दिखाई दे रहे हैं। शहरी क्षेत्र में अधिकांश लोग गेरू और रंग-बिरंगी चाक मिट्‌टी की बजाए कागज पर छपे हुए जिरोती माता के चित्र लगाकर त्योहार मना रहे हैं। वहीं गांवों में आज भी निमाड़ी संस्कृति और त्योहार मूल स्वरूप में मनाए जा रहे हैं। शनिवार को त्योहार के एक दिन पहले ही कालमुखी गांव में रेखा सूर्यवंशी और कविता सूर्यवंशी सहित अनेक महिलाओं ने अपने घर दरवाजे के दोनों ओर जिरोती माता की आकृति बनाई।

भित्ति चित्रों में है संस्कृति व जनजीवन

लोक कलाकार साधना हेमंत उपाध्याय ने बताया जिरोती माता के भित्ति चित्र में निमाड़ की प्राचीन संस्कृति दिखाई देती है। इसमें पालना, सिंहासन पर महिलाएं, बच्चे, चांद-सूरज, नथ, झुमके, फूल-पत्तियों सहित विभिन्न आकृतियां बनाई जाती हैं। इसमें नाग, तुलसी माता, रसोई घर, प्रसूता का कक्ष। गणगौर माता, पंखा, बिच्छू की आकृति बनाई जाती है। इन सभी आकृतियों में हमारी संस्कृति और जनजीवन नजर आता है।

अलग आकृतियों में जिरोती के चित्र

धार्मिक पुस्तक विक्रेता योगेश शर्मा ने बताया दुकानों पर जिरोती माता की कागज पर छपी हुई अलग-अलग आकृतियां लोग ले जा रहे हैं। पहले की अपेक्षा अब इसकी मांग बढ़ गई है। गेरू और चाक मिट्‌टी से बनाने में समय अधिक लगता है, संभवत: इसलिए अब अधिकांश लोग छपी हुई जिरोती माता ले जा रहे हैं।

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