पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

प्याज:अरब देशों में जाएगा खंडवा के प्याज से बना पावडर-पेस्ट

खंडवा2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जिले के 50 किसानाें के लिए 100 मी.टन के 50 भंडार गृह व 150 मी.टन के प्रोसेसिंग यूनिट बनेंंगे

जिले के प्याज से बना पेस्ट व पावडर अरब के देशों में भी बिकेगा। चिप्स बनाने वाली देश की ब्रांडेड कंपनियां भी स्वाद बढ़ाने के लिए इसका पेस्ट व पावडर खरीदेगी। जिले में यह सब प्याज के भंडारगृह व प्रोसेसिंग यूनिट डालने के बाद होगा। इससे किसानों को अच्छे प्याज के बाजार में बेहतर दाम तो मिलेंगे ही, उसका खराब प्याज भी चटनी, पाउडर व पेस्ट बनाने के काम आएगा। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत एक जिला एक उत्पाद योजनांतर्गत जिले में प्याज का भंडारण करने वाले 50 किसानों के लिए सौ-सौ मीट्रिक टन के 50 भंडार गृह व 150 मीट्रिक टन के प्रोसेसिंग यूनिट बनाए जाएंगे। प्रोसेसिंग यूनिट पर 30 लाख रुपए तक खर्च होंगे, जिस पर शासन द्वारा 10 लाख रुपए या 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। प्रोसेसिंग यूनिट लगने के बाद विभाग एजेंसी के माध्यम से उत्पाद की मार्केटिंग भी कराएगा। जिसमें एमएससी कृषि के तीन, बीएससी कृषि के तीन, एमबीए के तीन कर्मचारी टेली मार्केटिंग, जबकि 13 कर्मचारी मार्केटिंग प्रोग्रामर रहेंगे।

अभी केवल एक यूनिट, 52 और किसानों को जोड़ेंगे
जिले में प्याज की प्रोसेसिंग यूनिट केवल बमनगांव में है, जबकि पंधाना लछोरा, जसवाड़ी, बेड़ियांव, खड़की, टिगरियांव, मोरदड़, तिरंदाजपुर, खिड़गांव, सिंगोट व भखराड़ा जहां प्याज की खेती अधिक होती है, यहां के 52 किसानों को भंडारण व प्रोसेसिंग यूनिट का काम दिया जाएगा।

10000
हेक्टेयर भूमि पर 9500 किसान प्याज की खेती करते हैं जिले में हर साल। जिले में प्याज का उत्पादन साल दर साल बढ़ता जा रहा है।

1.40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन था 2019-20 में

1.90 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का 2020-21 में

जिले के किसान को इसलिए कम दामों में बेचना पड़ता है प्याज

{जिले के प्याज उत्पादक किसानों के पास उत्पादित प्याज को रखने की क्षमता का अभाव।

{क्षेत्र में प्याज प्रोसेसिंग इकाई नहीं। यह बड़ी समस्या है।

{क्षेत्र में प्याज की ग्रेडिंग, पैकेजिंग इकाई भी स्थापित नहीं है।

30% तक का नुकसान होता है हर साल
किसानों को हर साल प्याज का करीब 30% का नुकसान होता था। फसल खराब होने पर उसे फेंकने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं होता था।
3 से 4 रु. किलो का भाव मिल रहा है बाजार में किसान को
ऐसे में उसकी लागत भी नहीं निकल रही। अब यूनिट डलने के बाद ए ग्रेड का प्याज बाजार में बिकेगा, जबकि बी व सी ग्रेड के प्याज की प्रोसेसिंग होगी।

नुकसान नहीं होगा, विदेश में बिकेगा पेस्ट, पावडर

प्रोसेसिंग यूनिटें डल जाने के बाद किसानों को प्याज के सही दाम मिलेंगे, जबकि ग्रेडिंग में छंटनी वाले प्याज से बना पेस्ट व पावडर विदेशों तक बेचा जाएगा। किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है राजू बड़वाहे, उपसंचालक, उद्यानिकी विभाग

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज आपकी प्रतिभा और व्यक्तित्व खुलकर लोगों के सामने आएंगे और आप अपने कार्यों को बेहतरीन तरीके से संपन्न करेंगे। आपके विरोधी आपके समक्ष टिक नहीं पाएंगे। समाज में भी मान-सम्मान बना रहेगा। नेग...

    और पढ़ें