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मानवता:एक महीने से किशोर कुमार मुक्तिधाम पर पड़ी थी करीब 50 शवों की अस्थियां, अस्थियां विसर्जित, मिला मोक्ष

खंडवाएक महीने पहले
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पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा अस्थियां विसर्जित की तो किशोर कुमार मुक्तिधाम पर चिताओं के अवशेष नहीं दिखाई दे रहे हैं। इनसेट : ऐसे थे हालात। - Dainik Bhaskar
पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा अस्थियां विसर्जित की तो किशोर कुमार मुक्तिधाम पर चिताओं के अवशेष नहीं दिखाई दे रहे हैं। इनसेट : ऐसे थे हालात।

काेरोना प्रोटोकाल से अंतिम संस्कार के बाद किशोर कुमार मुक्तिधाम पर कई परिजन अस्थियां लेने नहीं आए। लंबे समय तक जगह-जगह ढेर के रूप में आबना नदी के किनारे अस्थियां पड़ी रहीं। भास्कर ने इस मामले को प्रकाशित किया तो पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति ने अस्थियों को विसर्जित करने की जिम्मेदारी ली। शुक्रवार को महोपनिषद् में लिखे श्लोक “अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुंबकम् ।।” अर्थात “यह मेरा है या पराया, ऐसा सिर्फ छोटे दिल वाले ही सोचते हैं। उदार चरित्र वालों के लिए तो सारा विश्व एक परिवार की तरह है।”

भाव के साथ सुबह 8.15 से पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के सदस्य किशोर कुमार मुक्ति धाम पहुंच गए। हाथों में ग्लब्स, चेहरे पर मास्क और फेस शील्ड लगाकर इन सदस्यों ने फावड़े से अस्थियों को तगाड़ी में उठाया और बोरियों में एकत्र कर सम्मान आबना नदी में विसर्जित कर दिया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 50 शवों की अस्थियों और चिताओं की राख का विसर्जन किया। यह पुण्य का काम समिति के आशीष चटकेले, मुबारक पटेल, नागेश वलांजकर, रितेश चौहान, संतोष मालवीया, विकास सातले, नीलेश धवले, राजेश बोबड़े, प्रेरित जैन, अमित वर्मा, विशाल शिंदे और साहिल चौहान ने किया।

अस्थियां जल में मिलने से मिलता है मोक्ष

गरुड़ पुराण में लिखा है अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को नदियों के जल में विसर्जित करने से मृत आत्मा को मोक्ष मिलता है। मान्यता है मृत्यु के 10 दिन तक आत्मा आसपास ही रहती हैं।
पंडित संजय राजवैध, किशोर नगर

समिति सदस्य बोले : भारतीय संस्कृति का यही मूल विचार -सारा विश्व हमारा परिवार

अस्थियों के विसर्जन पश्चात समिति सदस्यों ने कहा कि सारा विश्व हमारा परिवार है। भारतीय संस्कृति का यही मूल विचार है। कोविड- 19 महामारी के भय से कई परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार के पश्चात अस्थियों का विसर्जन नहीं किया था। इसलिए गुरुवार को अस्थियों व राख का विसर्जन हिंदू धर्मानुसार आबना नदी में प्रवाहित कर किया। ताकि मृतकों की आत्माओं को मुक्ति प्राप्त हो सके। पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा सालभर “ज्ञात-अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार का सेवाकार्य” विधि-विधान पूर्वक किया जाता है। इसलिए यह काम भी जिम्मेदारी के साथ किया।

सावधानी और साहस से करें अंतिम संस्कार

कोविड 19 महामारी के दौर में डरने की आवश्यकता नहीं है। सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सावधानी पूर्वक साहस के साथ परिस्थिति का सामना कर परिजन का अंतिम संस्कार करें।
आशीष चटकेले, अध्यक्ष पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक समिति खंडवा

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