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अच्छी खबर:पुराने हरसूद से पिपलानी तक 8 किमी बैकवाटर में पहुंच मार्ग का प्रस्ताव, रोजगार की संभावना

खंडवा12 दिन पहले
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  • मांधाता विधानसभा के किल्लौद ब्लॉक, नर्मदा परिक्रमा पथ की दूरी होगी कम, कईं गांवों के लोगों को सीधा रास्ता मिलेगा, पर्यटन भी विकसित होगा

इंदिरा सागर बांध परियोजना से प्रभावित हरसूद व किल्लौद ब्लॉक के लोगों के लिए अच्छी खबर है। क्षेत्रवासियों की अरसे पुरानी मांग को लेकर वन मंत्री विजय शाह द्वारा 9 सितंबर को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र से बड़ी आस जागी है। पत्र में पुराने हरसूद से पिपलानी तक जलमग्न होने वाले रेलवे ट्रैक पर उच्च स्तरीय ब्रिज व पहुंच मार्ग निर्माण का उल्लेख है। इससे क्षेत्रीय लोगों में पर्यटन के साथ रोजगार और डूब के अनेक गांवों के सीधे हरसूद मुख्यालय से जुड़ने की उम्मीद बंधी है। भास्कर की एक रिपोर्ट -

प्रस्ताव 8.5 किमी पहुंच मार्ग का
वन मंत्री विजय शाह का प्रस्ताव मात्र 8.5 किमी पहुंच मार्ग निर्माण का है, लेकिन इसको डूब क्षेत्र के नजरिए से देखा जाए तो मार्ग व ब्रिज बनने से लाभ अनेक है। डूब के कारण जलमग्न हरसूद के समीप के अंतिम छोर के गांव भराड़ी, बड़खलीया, नवलपुरा, इमलानी, महत्पुरा सहित अन्य गांव तथा दूसरे छोर के ग्राम भवराली, पिपलानी, चिखली पुनर्वास, इगरिया के अलावा किल्लौद ब्लॉक के लहाड़पुर, गुरांवा के रास्ते अन्य ग्रामों के लिए हरसूद मुख्यालय सीधा हो जाएगा। मार्ग निर्माण से लेंड वैल्यू बढ़नी तय है। हर साल हजारों नर्मदा परिक्रमा यात्रियों को लगभग 50 किमी कम पैदल चलना पड़ेगा।

फिलहाल ये रास्ता उपयोग में आता है... इंदिरा सागर बांध में जलभराव से पुराना राज्य मार्ग डूब जाता है। इसके लिए 32 किमी परिवर्तित नया राज्य मार्ग बनाया गया। हरसूद व किल्लौद ब्लॉक के लोगों को खिरकिया या पोखरणी के रास्ते नए राज्य मार्ग से नया हरसूद आना पड़ता है। किल्लौद ब्लॉक की 5 ग्राम पंचायत नर्मदा पार है। उन्हें 150 किमी का सफर तय करना पड़ता है। नए मार्ग से दूरी घटना तय है बल्कि हरसूद व किल्लौद ब्लॉक में प्रशासनिक पहुंच भी आसान होगी।

हनुवंतिया पर्यटन के बाद उठी मांग
पुराने हरसूद में जलाशय का पानी ग्रीष्म काल मध्य तक बना रहता है। कुछ साल पहले जब हनुवंतिया पर्यटन विकसित किया गया और गर्मी के समय बैकवाटर दूर चले जाने से इसका क्रेज कम होता देख क्षेत्र के लोगों ने पुराने हरसूद को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग उठाना शुरू किया। 255 से 252 मीटर जलभराव पर सामने आए दृश्य के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रामीण क्षेत्र के लिए कराए गए भारत उदय अभियान में भराड़ी, बड़खालीया, भावरली, पिपलानी पंचायत द्वारा मार्ग निर्माण का सुझाव शासन को भेजा। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सिंगाजी से पोखरनी मार्ग निर्माण की निविदा में फिर आस जागी लेकिन उसने पुराने हरसूद से पिपलानी शामिल नहीं था।

एनएचडीसी बजट के लिए तैयार
कोविड-19 के चलते प्रदेश सरकार आर्थिक संकट में है। ऐसे में डूब क्षेत्र का मामला होने से प्रस्ताव एनएचडीसी को सौंपा जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि वन मंत्री शाह के प्रस्ताव से एनएचडीसी के चेयरमैन एस मिश्र भी सहमत है। इससे पुराने हरसूद से पिपलानी मार्ग का जिम्मा एनएचडीसी के सुपुर्द किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है
^हरसूद व किल्लौद ब्लॉक के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने का इससे अच्छा माध्यम नहीं हो सकता। जलाशय के बीच 8 किमी मार्ग की कल्पना से मन रोमांचित हो जाता है। इससे पर्यटन व रोजगार की भी अपार संभावना है। मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
विजय शाह, वन मंत्री, म.प्र. शासन

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