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  • Railways Is Building A Water Recycling Plant Of 5 Lakh Liters Capacity At A Cost Of Rs 2 Crore, Water Will Be Used For Cleaning Platforms And Trains

दो करोड़ रुपए की लागत से वॉटर रिसाइकिलिंग प्लांट:रेलवे बना रहा दो करोड़ रुपए की लागत से 5 लाख लीटर क्षमता का वॉटर रिसाइकिलिंग प्लांट, प्लेटफार्म और ट्रेनों की सफाई में इस्तेमाल होगा पानी

खंडवा20 दिन पहले
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नाले के पास तैयार किया रहा प्लांट का भवन, चारों ओर से बाउंड्री बनाने के साथ ही लगाएं जाएंगे पेड़। - Dainik Bhaskar
नाले के पास तैयार किया रहा प्लांट का भवन, चारों ओर से बाउंड्री बनाने के साथ ही लगाएं जाएंगे पेड़।
  • चिड़िया मैदान क्षेत्र में तीन पुलिया नाले के पास किया जा रहा काम, छह माह बाद प्लांट से स्टेशन पर होगी पानी की सप्लाई

दो करोड़ रुपए की लागत से रेलवे 5 लाख लीटर क्षमता का वॉटर रिसाइकिलिंग प्लांट बना रहा है। चिड़िया मैदान क्षेत्र में तीन पुलिया नाले के पास प्लांट का निर्माण किया जा रहा। छह माह बाद इसी पानी से रेलवे प्लेटफार्म, गार्डन की सिंचाई और ट्रेनों की सफाई का काम किया जाएगा।

प्लांट बनने से हर दिन स्टेशन व ट्रेनों की सफाई से लेकर उद्यान की सिंचाई में उपयोग होने वाले 1 से 1.5 लाख लीटर पीने के पानी की बचत होगी। जानकारी के मुताबिक स्टेशन पर पीने के लिए हर दिन 1 से 1.25 लाख लीटर पानी की उपयोग होता है। स्टेशन पर पीने के लिए पानी आबना नदी से फिल्टर कर बस स्टैंड के सामने बनी सीमेंट टंकी में स्टोर किया जाता है।

जबकि धुलाई व उद्यान की सिंचाई के लिए आबना से ही नॉन फिल्टर पानी बस स्टैंड के सामने ही स्थित पुरानी लोहे की टंकी में रखा जाता है। डब्ल्यूआरपी का निर्माण करने वाली अहमदनगर की कंपनी के पार्टनर एवं सुपरवाइजर प्रशांत काले ने बताया नाले व रेलवे क्वार्टर से निकलने वाले पानी को फिल्टर कर उपयोग के लिए रेलवे को देंगे।

प्लांट का वर्कआर्डर एक साल के लिए 1 जनवरी 2020 को रेलवे ने जारी किया था। यह प्लांट दीपावली तक चालू हो जाएगा। इसका पूरा काम मशीन पर आधारित है। पिछले साल 7 जून से प्लांट का निर्माण शुरू किया था। पर्यावरण प्रेमी एवं रेलवे कांट्रेक्टर राजीव सेठी ने बताया प्लांट के निर्माण स्टेशन पर पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी। स्टेशन की सफाई, टायलेट और उद्यान की सिंचाई में इस पानी का उपयोग होगा।

ऐसे डब्ल्यूआरपी में साफ होगा नाले का पानी
नाले का पानी प्लांट के पास बने 1.5 लाख लीटर क्षमता के टैंक में जमा होगा। मशीन द्वारा पानी प्लांट के ऊपर बने तीन छोटे-छोटे आयताकार खानों से होकर गुजरते हुए चौथे टैंक से होकर पांचवें टैंक में पहुंचेगा। पांचवें से छठवें टैंक में पानी के पहुंचने पर कचरा नीचे बैठ जाएगा और केवल पानी सातवें टैंक में पहुंचेगा।

नालियों से गुजरता हुआ पानी आठवें में क्लोरिन से फिल्टर होकर नौवें टैंक की दवाओं में मिलेगा। जहां पर पानी शुद्ध होने के बाद 5 लाख लीटर क्षमता के संग्रहण टैंक में जमा होगा। यहां से रेलवे को पानी की सप्लाई की जाएगी।

5 लाख लीटर क्षमता का बना भुसावल में भी प्लांट
जानकारी के मुताबिक रेलवे पांच लाख लीटर क्षमता का वॉटर रिसाइकिलिंग प्लांट भुसावल, अमरावती और अकोला में भी बना रहा है। रेलवे द्वारा बनाए गए दौड़ व मनमाड़ में वॉटर रिसाइकिलिंग प्लांट दो साल पहले ही चालू हो चुका है। पानी की किल्लत से जूझने वाले महाराष्ट्र के इन दोनों स्टेशनों पर अब पानी की पर्याप्त सुविधा है।

प्लेटफार्म एवं ट्रेनों की सफाई में करेंगे उपयोग

  • तीन पुलिया के पास नाले के पानी को साफ करने के लिए प्लांट रेलवे लगा रहा है। डब्ल्यूआरपी से मिलने वाले पानी का स्टेशन के प्लेटफार्म व ट्रेनों की सफाई में उपयोग किया जाएगा। -जीएल मीणा, स्टेशन मैनेजर, सेंट्रल रेलवे खंडवा
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