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आंख में राखड़:सिंगाजी प्लांट : चार साल में 3.50 कराेड़ रुपए खर्चे, खत्म नहीं हुई राखड़ की धुंध

बीड़11 दिन पहले
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संदीप सोनी |

संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना से निकलने वाली राखड़ प्लांट सहित 10 किमी के 5 गांवों के लिए मुसीबत का कारण बनी हुई है। तेज हवा चलने से आसपास बड़ी मात्रा में फैल रही है। मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी ने उड़ती राखड़ को रोकने के लिए चार साल में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लेकिन राखड़ की धुंध कायम है। कभी मुरम बिछवाई तो कभी सरपत घास लगवाई। पानी के छिड़काव का टेंडर भी दिया, लेकिन 4 साल बाद भी हालत पहले जैसे ही है।

शनिवार को 40 किमी की रफ्तार से तेज हवा चली तो परियोजना की एक नंबर राखड़ बांध से भारी मात्रा में राखड़ के गुब्बारे उड़ रहे थे। इससे भगवानपुरा से भुरलाय मार्ग पर कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। फसलों पर भी राखड़ जम गई है। इससे खेत में काम करने वाले किसान भी परेशान हो गए। कोई आंखें मसल रहा था तो कोई शरीर खुजा रहा था।

फैक्ट फाइल

  • 90 हेक्टेयर जमीन पर फैल है राखड़ बांध
  • 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक राखड़ से भरा है बांध
  • 5 गांव जो प्लांट के पास हैं, उन्हें सबसे अधिक परेशानी
  • 1 नंबर राखड़ बांध की राखड़ गांव तक पहुंची, हो रही खुजली

राखड़ उड़ने से रोकने के लिए यह कर सकते हैं

  • उड़ने वाली राखड़ पर एक इंच काली मिट्टी का छिड़काव करना चाहिए और उस पर पानी का छिड़काव होना चाहिए, जिससे यह उड़ने से रुक सकती है
  • बांध भर जाने के बाद परियोजना द्वारा इस बांध को खाली कर देना चाहिए और ऐसी जगह पर डालना चाहिए जहां पर गिट्टी की खदान हो। उसी गड्ढे में यह राखड़ भरकर ऊपर से मिट्टी डालकर दबाना चाहिए।
  • गर्मी के दिनों में 24 घंटे पानी के फव्वारें चलाना चाहिए। वही अधिकारियों की मौजूदगी भी होनी चाहिए, जिससे यह राखड़ उड़ने से रुक सकती है

नाेट- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जानकारों के मुताबिक।

गर्मी में पानी छिड़केंगे

तेज हवा के कारण यह राखड़ उड़ती है। वैसे हमारे द्वारा गर्मी के दिनों में पानी का छिड़काव किया जाता है। जल्द ही राखड़ को उड़ने से रोका जाएगा।
संजय पिंडोर, अतिरिक्त मुख्य अभियंता

अफसर ठोस उपाय नहीं कर रहे हैं तो हमें जहर दे दें

मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी ने बांध पर पानी के छिड़काव के लिए ठेकेदार नियुक्त किया है, लेकिन कोई भी ठेकेदार कर्मचारी यहां मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने बताया राखड़ भोजन और पानी के साथ शरीर में जा रही है। आक्रोशित किसानों ने कहा यदि परियोजना के अफसर इसे रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं कर पा रहे हैं तो इससे अच्छा हमें जहर देकर मार दें, ताकि इस नासूर समस्या से छुटकारा मिल सके।

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