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  • The Accused Made TI's 'private' Driver In The Nuisance, The CSP Said No Such Facts; They Are Responsible For Recovery From The Mafia Gang

खंडवा में हिंदू संगठनों का खाकी पर आरोप:उपद्रव में टीआई के ‘प्राइवेट’ ड्राइवर को बनाएं आरोपी, CSP बोले- ऐसे कोई तथ्य नहीं; माफिया से वसूली का जिम्मा इन्हीं का

खंडवा10 महीने पहले
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थाना मोघट रोड टीआई का प्राइवेट ड्राइवर आदिल, जो खाकी की वर्दी पहनकर ड्यूटी कर रहा है। - Dainik Bhaskar
थाना मोघट रोड टीआई का प्राइवेट ड्राइवर आदिल, जो खाकी की वर्दी पहनकर ड्यूटी कर रहा है।

देवउठनी ग्यारस पर हुए उपद्रव, पथराव मामले में अब हिंदू संगठनों ने मुस्लिम समाज के कामकाजी लोगों पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। कोतवाली टीआई के प्राइवेट ड्राइवर अहमद पर आरोप है कि, उसके द्वारा कंजर मोहल्ला में 20-25 से उपद्रवियों को भेजकर आगजनी और पथराव करवाया। शिकायत सीएसपी ललित गठरे से की गई। मामले में गठरे का कहना है कि, अभी तक ऐसे कोई तथ्य सामने नहीं आए है।

इनसाइड स्टोरी : माफिया गैंग से वसूली का जिम्मा इन्हीं ड्राइवर का

थाना प्रभारियों के पास अलग-अलग शिफ्ट में बतौर आरक्षक दो सरकारी ड्राइवर रहते है। बावजूद थाना प्रभारियों द्वारा एक प्राइवेट ड्राइवर रखा जाता है। इनका कोई ड्यूटी टाइम या सरकारी वेतन नहीं होता है। संबंधित थाना प्रभारी अपनी जेब से साप्ताहिक वेतन देते है। अब सवाल यह उठता है कि, सरकारी ड्राइवर होने के बाद भी प्राइवेट ड्राइवर का क्या काम, वह भी खाकी वर्दी में 24 घंटे 7 दिन ड्यूटी।

वसूली करते है प्राइवेट ड्राइवर

कोतवाली ही नहीं सभी पुलिस थानों में टीआई के प्राइवेट ड्राइवर की एक अहम भूमिका होती है। बतौर ड्राइवर वह एक एजेंट का रोल निभाता है। थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों जैसे- गली-मोहल्लों और टपरियों में बिक रही शराब के बदले ठेकेदार से कमीशन वसूलना, रेत के डंपर मालिकों से मासिक और जुट्टा, सट्टा और घोड़ीदाना वालों से साप्ताहिक हफ्ता वसूली। यह सब इकट्‌ठा कर अपने मालिक को सुपुर्दगी देना और अपने हिस्से का वसूली कमीशन लेना होता है। इन प्राइवेट ड्राइवर की कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं होती है, विश्वसनीय, जानकार, ईमानदार (अमानत में खयानत न कर दें) व्यक्ति को यह रोल दिया जाता है।

मोघट रोड टीआई का ड्राइवर वर्दी में

थाना मोघट रोड टीआई का भी एक प्राइवेट ड्राइवर है, आदिल नाम का यह युवक पुलिस वाला ड्रेसकोड (खाकी) पहनकर ड्यूटी करता है। इधर, पुलिस अफसरों का कहना है कि, एक टीआई के पास दो ड्राइवर होना चाहिए लेकिन रिजर्व फोर्स में ड्राइवरों की कमी है, शहरी थानों में थाना प्रभारियों को 24 घंटे ड्यूटी करना पड़ती है। इसलिए अतिरिक्त तौर पर संबंधित थाना प्रभारी अपने खर्चे पर ड्राइवर रखते है।

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