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  • The Court Said The Victim Did Not Refuse To Have A Relationship, Because She Was Semi intelligent, Her Consent Was Not Valid, So The Accused Was Guilty Of Rape.

अर्द्ध विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म का मामला:कोर्ट ने कहा- पीड़िता ने संबंध बनाने से इंकार नहीं किया, क्योंकि वह अर्द्ध विक्षिप्त थी, उसकी सहमति मान्य नहीं इसलिए आरोपी दुष्कर्म का दोषी

खंडवा2 महीने पहले
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फैसला- पंधाना के ग्राम बरखेड़ी में 2014 में अर्द्ध विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी को 10 साल जेल की सजा सुनाई। - Dainik Bhaskar
फैसला- पंधाना के ग्राम बरखेड़ी में 2014 में अर्द्ध विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी को 10 साल जेल की सजा सुनाई।

पीड़िता गूंगी, अशिक्षिप्त व दुर्बल मस्तिष्क की है। आरोपी ने उसकी सहमति से भी संबंध बनाए हैं तब भी वह दुष्कर्मा का आरोपी कहलाएगा। मंदबुद्धि पीड़िता इस योग्य नहीं है कि संबंध बनाने के लिए अपनी सहमति दे सके। उसके साथ किया गया कृत्य सहमति नहीं माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसकी सहमति देने का प्रश्न ही नहीं उठता। आरोपी दुष्कर्म का दोषी है, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

पंधाना थाने के ग्राम बरखेड़ी में सात साल पुराने अर्द्ध विक्षिप्त महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को न्यायालय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सूरजसिंग राठौड़ की न्यायालय ने आरोपी कालू पिता अम्बालाल भील 36 वर्ष, निवासी ग्राम बरखेड़ी को धारा 376(2) (ठ) भादवि के तहत 10 साल जेल की सजा सुनाई। अभियोजन अधिकारी ने बताया अर्द्ध विक्षिप्त महिला के भाई फरियादी ने 7 फरवरी 2014 को पंधाना थाने में शिकायत की कि उसकी बहन बचपन से मानसिक रूप से विक्षिप्त है।

15 साल पहले माता पिता ने उसकी शादी खंडवा में की थी, शादी के दूसरे दिन ससुराल वाले विक्षिप्त होने पर उसकी बहन को यहीं छोड़ गए। तब से उसकी बहन गांव में नदी पार एक झोपड़ी में रहती है। तथा उसका पूरा परिवार गांव में रहता है। बहन की देखरेख के लिए वह रात में वहीं रहता है।

7 फरवरी की रात 8.30 बजे वह घर से बहन का खाना लेकर झोपड़ी में गया तो वह वहां नहीं थी। वह टार्च लेकर उसे तलाश करता हुआ पास ही एक गोदाम पर पहुंचा जहां कालू उसकी बहन के साथ जबरदस्ती कर रहा था। जब उसने शोर मचाया तो कालू जान से मारने की धमकी देकर भाग गया। घटना के बाद वह बहन को लेकर थाने आया और रिपोर्ट दर्ज कराई।

न्यायालय ने अपने निर्णय में उल्लेखित किया है कि पीड़िता गुंगी, अशिक्षित व दुर्बल मस्तिष्क की है और आरोपी द्वारा उसकी सहमति से भी सहवास किया हो तब भी वह बलात्कार का आराेपी है। पीड़िता इस योग्य नहीं है कि अपनी सहमति दे सके। उसके साथ किया गया बलात्कार सहमति से नहीं माना जा सकता।

न्यायालय ने आरोपी कालू की मेडिकल रिपोर्ट में चेहरे पर दांई एवं बांई आंख के पास खरोंच के निशान भी देखे जो कि घटना के समय के थे। साथ ही पुलिस के द्वारा एफएसएल जांच में भी पीड़िता के साथ बलात्कार होने की पुष्टि हुई है। उक्त आधार पर न्यायालय ने आरोपी को बलात्कार कर दोषी पाते हुए उसे सजा दी। अभियोजन की ओर से प्रकरण का संचालन जिला लोक अभियोजन अधिकारी चन्द्रशेखर हुक्मलवार ने किया।

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