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काेराेना वायरस की वजह से फैसला / ईद की खुशी इतनी कि ढोल-ताशों के साथ ईदगाह आते थे समाजजन, 300 साल में पहली बार ईदगाह पर नहीं होगी नमाज

The joy of Eid is so much that Samajans used to come to Idgah with drums and cards, for the first time in 300 years, there will not be Namaz on Idgah
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The joy of Eid is so much that Samajans used to come to Idgah with drums and cards, for the first time in 300 years, there will not be Namaz on Idgah

  • शहर काजी व जिला प्रशासन की अपील - इस साल घरों में ही पढ़ें ईद की नमाज

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

खंडवा. काेराेना वायरस की राेकथाम के लिए लगाए गए लाॅकडाउन के चलते पहली बार दूध तलाई स्थित ईदगाह पर ईद की नमाज नहीं होगी। ऐसे में लोग घरों में ही चाश्त की नमाज पढ़ेंगे। 300 साल पुरानी ईदगाह पर किस तरह ईद मनाई जाती थी, कितना उत्साह रहता था, बता रहे हैं- रिटायर्ड प्रोफेसर व इतिहास के जानकार सैयद सफदर रजा खंडवी। 
मेरी 80 साल की उम्र हो गई है। जब मैं छोटा था तब मेरे दादा हाथ पकड़कर ईदगाह ले जाते थे। उनकी उम्र 100 साल की थी। अंग्रेजी हुकूमत से लेकर देश की आजादी के बाद 60 के दशक तक तत्कालीन शहर काजी मरहूम सैयद खान बहादुर हिफाजत अली खुतबा पढ़ते थे। ईद की नमाज इमलीपुरा मस्जिद के पेश इमाम पढ़ाते थे। बाद में यह परंपरा बदल गई। सुबह ईद की नमाज के बाद दिनभर ईदगाह पर मेला लगा रहता था। यहां नमाज पढ़ने के लिए शहर के सभी मुसलमान आते थे। तब ईद की नमाज मस्जिदों में नहीं होती थी। ईद के दिन शाम को शहर काजी की अहलिया (पत्नी) शहर की ख्वातीनों (महिलाओं) के साथ ईद की खुशियाें के लिए ईद मिलन समारोह होता था। 1954-55 तक ईदगाह की देखरेख का जिम्मा मिर्जा परिवार के हाथ में था। जब मैं कक्षा आठवीं में पढ़ता था। तब की बात है हम लोग ईद के एक दिन पहले ईदगाह मैदान के कंकर, पत्थर बीनते थे, ताकि नमाजियों के पैरों में न चुभे। ईदगाह पर नमाज के लिए कहारवाड़ी के शहादत खान पठान, यासीन खान साहब पठान, मुजािहद खान क्षेत्रवासियों के साथ एकत्र होकर ढोल-ताशों के साथ ईदगाह आते थे। उस समय शहर की मस्जिदों में लोग ईद की नमाज नहीं पढ़ते थे। शहर के इतिहास में पहली बार ईद के दिन ईदगाह पर नमाज नहीं होगी। 
प्रशासन... सार्वजनिक स्थानों पर नमाज, पूजा-पाठ करना प्रतिबंधित 
लॉकडाउन के दौरान जिले की सीमा में सभी धार्मिक स्थल व पूजा स्थल बंद रहेंगे। जिले में धार्मिक सभाओं को सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है। जिले में ईदगाह, मदरसों, मस्जिदों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। एडीएम नंदा भलावे कुशरे ने नए आदेश शनिवार शाम जारी किए।
शहर काजी की अपील... घरों में रहकर नमाज पढ़ें
ईद की नमाज को लेकर शहर काजी सैयद अंसार अली व सुन्नी उलेमा व आइम्मा कमेटी ने समाजजन से अपील की है कि वे घरों में रहकर नमाज पढ़ें। नमाज के बाद मुबारकबाद के दौरान मेल-मिलाप से बचें। सरकार के निर्देशों का पालन करें। लॉकडाउन में अब तक मस्जिदों में चार से पांच लोग नमाज पढ़ रहे थे, ईद के दिन भी ऐसा ही करें। 
लॉकडाउन में ईद की नमाज का हुक्म 
चाश्त की नमाज का वक्त...तुलूऐ आफताब के 20 मिनट के बाद जवाल के पहले तक है, लेकिन ईद के दिन नमाज-ए-ईद के पहले पढ़ना मकरूह है। इसलिए शहर में जब कहीं नमाज-ए-ईद हो जाए तो उसके बाद ही चाश्त की नमाज पढ़े। (दुर्रे मुख्तार मा शामी जिल्द 3 पेज 50 और बहारे शरीअत हिस्सा 4 पेज 107) 
नमाज-ए-चाश्त की नियत
नियत की मैंने चार रकाअत नमाज चाश्त की नफ्ल अल्लाह तआला के वास्ते मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर।

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