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पदयात्रा:45 साल बाद ऐसा होगा जब नहीं निकलेगी पंचकाेशी यात्रा, कार्तिक मेला भी स्थगित

खंडवा9 दिन पहले
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45 साल से सतत निकाली जा रही 75 किमी की ओंकारेश्वर-ममलेश्वर पंचकोशी पदयात्रा इस साल कोरोना की वजह से नहीं निकाली जाएगी। आठ दिन तक लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन भी नहीं होगा। यह निर्णय पंचकोशी पदयात्रा केंद्रीय समिति ने स्वयं लिया और प्रशासन को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है। पदयात्रा व मेले में हर साल मप्र के अलावा अन्य प्रदेशों से करीब 1 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं।
पंचकोशी पदयात्रा केंद्रीय समिति के सचिव राधेश्याम शर्मा ने बताया ओंकारेश्वर में हर साल पांच दिवसीय मां नर्मदा की ओंकारेश्वर-ममलेश्वर पंचकोशी पदयात्रा निकाली जाती है। जिसमें देशभर के करीब 1 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस साल पदयात्रा देवउठनी एकादशी 26 नवंबर से 30 नवंबर गुरुनानक जयंती तक आयोजित की जानी थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते समिति ने निर्णय लिया था कि पदयात्रा का स्वरूप छोटा किया जाकर परंपरा को बनाए रखें। इस संबंध में समिति के सदस्यों ने शनिवार 21 नवंबर को पुनासा एसडीएम से मुलाकात भी की, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए समिति ने ही इस साल पदयात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया। एसडीएम पुनासा ने बताया कि गत 20 नवंबर को पंचकोशी यात्रा व कार्तिक मेले के संबंध में बैठक भी ली गई थी, जिसमें निर्णय लिया गया था कि जिले में किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोविड-19 महामारी को देखते हुए शासन द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार यात्रा व मेले काे स्थगित किया गया है।
1975 से निकल रही है पदयात्रा: पंचकोशी पदयात्रा केंद्रीय समिति के सचिव राधेश्याम शर्मा ने बताया पदयात्रा 1975 से शुरू हुई थी। जाे हर साल देवउठनी ग्यारस से कार्तिक पूर्णिमा तक निकाली जाती है। ओंकारेश्वर में 8 दिन के लिए कार्तिक पूर्णिका का मेला भी लगता है।

ऐसी निकलती है यात्रा
75 किमी की पदयात्रा की शुरुआत पहले दिन ओंकारेश्वर से होती है। श्रद्धालु ऊंकार ध्वज हाथ में लेकर ओंकारेश्वर-ममलेश्वर के दर्शन व नर्मदा जल लेकर रवाना होते हैं। इसके बाद यात्रा कोठी, कोठी, अंजरूद के बाद सनावद में रात्रि विश्राम के लिए रुकती है। दूसरे दिन सनावद से रवाना होकर टोकसर में रात्रि विश्राम, तीसरे दिन नर्मदा पार होकर विमलेश्वर होते हुए बड़वाह में विश्राम, चौथे दिन बड़वाह से रवाना होकर सिद्धवरकूट में रात्रि विश्राम, पांचवें दिन पुल से नर्मदा पार होकर ओंकार पर्वत की 3 कोसी परिक्रमा पूरी करते हैं और अंतिम दिन ओंकारेश्वर-ममलेश्वर के दर्शन के बाद यात्रा संपन्न होती है।

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